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जीरकपुर के पार्कों में लाखों खर्च करके भी काउंसिल नहीं कर रही देखरेख, हालत खस्ता
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जीरकपुर। नगर काउंसिल के अधीन आने वाले शहर के पार्कों का बजट लाखों रुपये का रहता है। इसके बावजूद यहां के पार्कों की हालत दयनीय है और यहां पर अन्य व्यवस्थाएं तो दूर बल्कि फूल तक नहीं खिल रहे हैं। नगर काउंसिल इन पार्कों की कतई देखरेख नहीं कर रही है। इससे यहां आने वाले लोगों को व्यवस्थाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। अगर हम पार्कों के काम के लिए पिछले टेंडर की बात करें तो करीब 20-25 लाख रुपये के टेंडर पास हुए थे। लेकिन इस बार टेंडर खत्म हुए चार महीने से ऊपर का समय बीत चुका है और शहर के पार्क लावारिस पड़े हैं। यही कारण है कि पार्कों में लगा बच्चों के खेलने और कसरत करने वाला सामान टूट चुका है। हर साल पार्कों का बजट लाखों में होता है फिर भी इन पार्कों की हालत दयनीय बनी रहती है। इसके मुकाबले चंडीगढ़ और पंचकूला की बात करें तो वहां के पार्क बहुत सुंदर बने हुए हैं और उनके देखरेख के लिए विशेष प्रबंध किए हुए हैं।
वहीं दूसरी ओर जीरकपुर में वन विभाग की जमीन में 25 एकड़ का पार्क बनाया हुआ है। इसकी देखरेख एनजीओ की ओर से की जा रही है। यह पार्क नगर काउंसिल के पार्कों के मुकाबले साफ सुथरे हैं और इनमें घास व झाड़ियों को काट कर पार्क को सुंदर बनाया हुआ है। यहां यह कहना भी गलत नहीं होगा कि सरकारी हाथों के बजाय निजी हाथों में पार्क सुरक्षित हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि हम हर साल करोड़ों रुपये टैक्स के रूप में देते हैं लेकिन फिर भी हमे सुविधाएं नहीं दी जातीं। पार्कों के हालात इतने खराब हैं कि बड़ी घास खड़ी है और बच्चों के खेलने का सारा सामान टूटा हुआ है। पार्कों में लाइट्स भी नहीं जलती और लाइट्स चोरी भी हो चुकी हैं। पार्क में पैदल चलने वाले ट्रैक्स भी टूटे हुए हैं। वहीं लोगों ने यह भी शिकायत की कि जो भी पार्क प्राइवेट हाथों में हैं वह साफ सुथरे और सुंदर बने हुए है। लोगों ने कहा कि क्यों न पार्कों को प्राइवेट हाथों में दे दिया जाए।
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हर साल नगर काउंसिल द्वारा करीब 25 लाख रुपये के टेंडर पार्कों की देखरेख के लिए पास किए जाते हैं। लेकिन इस बार चार महीने से ऊपर का समय हो चुका है, लेकिन अभी तक टेंडर पास नहीं हुआ। इसके संबंध में किसी भी राजनीतिक पार्टी से पूछा जाए तो उनके पास एक ही बहाना होता है कि अभी टेंडर नही लगा। जब कि नगर काउंसिल के पास करोड़ो का बजट है। फिर भी नगर काउंसिल अधिकारियों को नेताओं के मुंह की तरफ देखना पड़ता है।
पिछले तीन माह से रुके हैं टेंडर
पार्कों का टेंडर अभी नहीं हुआ है, पिछले तीन महीने से टेंडर रुके हुए हैं। जैसे ही टेंडर हो जाएगा तो पार्कों की देखरेख और सफाई शुरू कर दी जाएगी। - मुकेश राय, एमई नगर काउंसिल, जीरकपुर।
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वहीं दूसरी ओर जीरकपुर में वन विभाग की जमीन में 25 एकड़ का पार्क बनाया हुआ है। इसकी देखरेख एनजीओ की ओर से की जा रही है। यह पार्क नगर काउंसिल के पार्कों के मुकाबले साफ सुथरे हैं और इनमें घास व झाड़ियों को काट कर पार्क को सुंदर बनाया हुआ है। यहां यह कहना भी गलत नहीं होगा कि सरकारी हाथों के बजाय निजी हाथों में पार्क सुरक्षित हैं।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि हम हर साल करोड़ों रुपये टैक्स के रूप में देते हैं लेकिन फिर भी हमे सुविधाएं नहीं दी जातीं। पार्कों के हालात इतने खराब हैं कि बड़ी घास खड़ी है और बच्चों के खेलने का सारा सामान टूटा हुआ है। पार्कों में लाइट्स भी नहीं जलती और लाइट्स चोरी भी हो चुकी हैं। पार्क में पैदल चलने वाले ट्रैक्स भी टूटे हुए हैं। वहीं लोगों ने यह भी शिकायत की कि जो भी पार्क प्राइवेट हाथों में हैं वह साफ सुथरे और सुंदर बने हुए है। लोगों ने कहा कि क्यों न पार्कों को प्राइवेट हाथों में दे दिया जाए।
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हर साल नगर काउंसिल द्वारा करीब 25 लाख रुपये के टेंडर पार्कों की देखरेख के लिए पास किए जाते हैं। लेकिन इस बार चार महीने से ऊपर का समय हो चुका है, लेकिन अभी तक टेंडर पास नहीं हुआ। इसके संबंध में किसी भी राजनीतिक पार्टी से पूछा जाए तो उनके पास एक ही बहाना होता है कि अभी टेंडर नही लगा। जब कि नगर काउंसिल के पास करोड़ो का बजट है। फिर भी नगर काउंसिल अधिकारियों को नेताओं के मुंह की तरफ देखना पड़ता है।
पिछले तीन माह से रुके हैं टेंडर
पार्कों का टेंडर अभी नहीं हुआ है, पिछले तीन महीने से टेंडर रुके हुए हैं। जैसे ही टेंडर हो जाएगा तो पार्कों की देखरेख और सफाई शुरू कर दी जाएगी। - मुकेश राय, एमई नगर काउंसिल, जीरकपुर।