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सिख इतिहास से जुड़े तथ्यों को गलत लिखने पर तीन लेखकों समेत चार पर केस
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मोहाली। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) 12वीं की इतिहास की तीन पुस्तकों की बिक्री और इन्हें पढ़ाने पर प्रतिबंध लगा चुका है। अब बोर्ड ने सिख इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के मामले में स्टेट क्राइम ब्रांच में तीन लेखकों समेत चार लोगों के खिलाफ जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने व आपराधिक साजिश रचने समेत कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
आरोपियों में मनजीत सिंह सोढी, महिंदरपाल पाल कौर, एमएस मान और एक अज्ञात शामिल हैं। किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा की शिकायत पर केस दर्ज हुआ है। वह 93 दिन से इस मामले को लेकर संघर्ष कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस मामले में आरोपी लेखक गिरफ्तार किए जाएंगे।
बलदेव सिंह सिरसा ने पुलिस को दी शिकायत मेें बताया है कि किताबों में कुछ टिप्पणियां हैं, जो सिख इतिहास के अनुसार सही नहीं हैं। ये सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं। इन किताबों डॉ. मनजीत सिंह सोढी की मॉडर्न एबीसी ऑफ हिस्ट्री ऑफ पंजाब, मॉडर्न पब्लिशर्स जालंधर, डॉ. महिंदरपाल कौर की हिस्ट्री ऑफ पंजाब मल्होत्रा बुक डिपो (एमबीडी) जालंधर, एमएस मान की पंजाब का इतिहास राज पब्लिशर्स जालंधर शामिल हैं। इससे पहले पीएसईबी ने इन पुस्तकों के विषय-वस्तु की जांच करवाई थी। इसके बाद तीनों विवादित पुस्तकों की बिक्री पर पाबंदी लगा दी है। साथ ही तय किया था कि ये किताबें राज्य के स्कूलों में नहीं पढ़ाई जाएगी। ये किताबें 2007 से लेकर 2017 तक प्रचलित थीं। यह जांच बोर्ड के पड़ताल अफसर आईपीएस मल्होत्रा ने की थी। इसके बाद इस दिशा में फैसला लिया गया।
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किताबों संबंधी जारी सारी अधिसूचनाएं होंगी वापस
बोर्ड ने उक्त किताबों को 2017 तक नोटिफाई करते समय काम करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही पीएसईबी द्वारा ऐसी सारी अधिसूचनाएं जो कि इन किताबों के बारे में जारी की गई हैं, उन्हें भी वापस लेने का फैसला लिया गया है।
चार और पुस्तकों की हो रही है जांच
जालंधर के प्रदीप पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित व डॉ. एसी अरोड़ा की पुस्तक पंजाब का इतिहास की भी आईपीएस मल्होत्रा जांच कर रहे हैं। इसके साथ ही तीन अन्य पाठ्य-पुस्तकों जिनकी सामग्री उक्त पाठ्य-पुस्तकों से मिलती-जुलती हैं, उन्हें भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। इस बारे में रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह है किताबों में विवाद
तीनों किताबों के विषय-वस्तु को लेकर विवाद है। शिकायतकर्ता का कहना है कि किताबों में श्री गुरु नानक देव जी, श्री गुरु तेग बहादुर जी, बाबा बंदा सिंह बहादुर के अलावा कई सिख योद्धाओं के बारे में गलत जानकारी दी गई है। इससे आने वाली पीढ़ी को गलत संदेश जा रहा है। वहीं इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। कई सालों से विवाद से चल रहा है लेकिन पहले कोई कार्रवाई नहीं गई। इसके चलते सात फरवरी 2022 को बलजीत सिंह सिरसा की अगुवाई में पक्का मोर्चा लगाया गया था। इसके बाद बोर्ड ने जांच कमेटी बनाई थी जिसमें आरोप सही पाए गए थे। इसके बाद बोर्ड ने किताबों को स्कूलों में पढ़ाने और बिक्री को रोक दिया था। वहीं अब सिरसा की शिकायत पर इन तीन लेखकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
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आरोपियों में मनजीत सिंह सोढी, महिंदरपाल पाल कौर, एमएस मान और एक अज्ञात शामिल हैं। किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा की शिकायत पर केस दर्ज हुआ है। वह 93 दिन से इस मामले को लेकर संघर्ष कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस मामले में आरोपी लेखक गिरफ्तार किए जाएंगे।
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बलदेव सिंह सिरसा ने पुलिस को दी शिकायत मेें बताया है कि किताबों में कुछ टिप्पणियां हैं, जो सिख इतिहास के अनुसार सही नहीं हैं। ये सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं। इन किताबों डॉ. मनजीत सिंह सोढी की मॉडर्न एबीसी ऑफ हिस्ट्री ऑफ पंजाब, मॉडर्न पब्लिशर्स जालंधर, डॉ. महिंदरपाल कौर की हिस्ट्री ऑफ पंजाब मल्होत्रा बुक डिपो (एमबीडी) जालंधर, एमएस मान की पंजाब का इतिहास राज पब्लिशर्स जालंधर शामिल हैं। इससे पहले पीएसईबी ने इन पुस्तकों के विषय-वस्तु की जांच करवाई थी। इसके बाद तीनों विवादित पुस्तकों की बिक्री पर पाबंदी लगा दी है। साथ ही तय किया था कि ये किताबें राज्य के स्कूलों में नहीं पढ़ाई जाएगी। ये किताबें 2007 से लेकर 2017 तक प्रचलित थीं। यह जांच बोर्ड के पड़ताल अफसर आईपीएस मल्होत्रा ने की थी। इसके बाद इस दिशा में फैसला लिया गया।
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किताबों संबंधी जारी सारी अधिसूचनाएं होंगी वापस
बोर्ड ने उक्त किताबों को 2017 तक नोटिफाई करते समय काम करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही पीएसईबी द्वारा ऐसी सारी अधिसूचनाएं जो कि इन किताबों के बारे में जारी की गई हैं, उन्हें भी वापस लेने का फैसला लिया गया है।
चार और पुस्तकों की हो रही है जांच
जालंधर के प्रदीप पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित व डॉ. एसी अरोड़ा की पुस्तक पंजाब का इतिहास की भी आईपीएस मल्होत्रा जांच कर रहे हैं। इसके साथ ही तीन अन्य पाठ्य-पुस्तकों जिनकी सामग्री उक्त पाठ्य-पुस्तकों से मिलती-जुलती हैं, उन्हें भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। इस बारे में रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह है किताबों में विवाद
तीनों किताबों के विषय-वस्तु को लेकर विवाद है। शिकायतकर्ता का कहना है कि किताबों में श्री गुरु नानक देव जी, श्री गुरु तेग बहादुर जी, बाबा बंदा सिंह बहादुर के अलावा कई सिख योद्धाओं के बारे में गलत जानकारी दी गई है। इससे आने वाली पीढ़ी को गलत संदेश जा रहा है। वहीं इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। कई सालों से विवाद से चल रहा है लेकिन पहले कोई कार्रवाई नहीं गई। इसके चलते सात फरवरी 2022 को बलजीत सिंह सिरसा की अगुवाई में पक्का मोर्चा लगाया गया था। इसके बाद बोर्ड ने जांच कमेटी बनाई थी जिसमें आरोप सही पाए गए थे। इसके बाद बोर्ड ने किताबों को स्कूलों में पढ़ाने और बिक्री को रोक दिया था। वहीं अब सिरसा की शिकायत पर इन तीन लेखकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।