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नई वार्डबंदी के खिलाफ अकाली पार्षदों ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
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मोहाली। नगर निगम चुनावों को लेकर की गई वार्डबंदी के दौरान सत्ताधारियों की ओर से अकाली-भाजपा के पार्षदों के वार्डो को पूरी तरह से तोड़ दिया गया है। अब अकाली दल के पार्षदों की ओर से इस वार्ड बंदी को रद्द करके नए सिरे से वार्डबंदी करवाने की मांग को लेकर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में पटीशन दायर कर दी गई है। इसकी सुनवाई सोमवार को होने की संभावना जताई जा रही है।
अकाली पार्षद परविंदर सोहाना, सुरिंदर सिंह रोडा, गुरमुख सोहल, कमलजीत सिंह और अन्य की ओर से हाईकोर्ट में पटीशन दायर की गई है। इस पटीशन में कहा गया है कि नए सिरे जो वार्डबंदी की गई है, उसमें सत्ताधारी पार्टी के उम्मीदवारों को फायदा देने के लिए काम किया गया है। इससे आम लोगों को काफी ज्यादा असुविधा पैदा होगी, क्योंकि इस वार्डबंदी में कई वार्डों में एक मोहल्ले को कई हिस्सों में बांट दिया गया है। शहर की हदबंदी में कोई बढ़ोतरी नहीं करने के कारण इस बार डीलिमिटेशन की जरूरत ही नहीं थी और सिर्फ रीएडजस्टमेंट ही की जानी थी। जिसके तहत वार्ड नंबर-1 की शुरूआत पिछली वार्डबंदी के अनुसार ही होनी थी। लेकिन राजनीतिक हितों को मुख्य रखते हुए इस बार वार्डबंदी की नंबरिंग की शुरूआत किसी अन्य जगह से की गई है और नंबर बदल दिए गए हैं जो कि कानूनी तौर पर गलत है।
वहीं, सरकार की ओर से की गई वार्डबंदी की प्रक्रिया भी गलत है। वार्डबंदी करने के लिए जो बोर्ड बनाया जाता है, उसमें निगम के पूर्व मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर या डिप्टी मेयर में से किसी एक का सदस्य होना जरूरी होता है। जबकि कांग्रेस सरकार के सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्घू के अलावा उनके भाई जीती सिद्घू और एक कांग्रेसी पार्षद कुलजीत सिंह बेदी को सदस्य बना लिया गया है ताकि सेहत मंत्री अपनी मनमर्जी से वार्डबंदी कर सकें।
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अकाली पार्षदों ने पटीशन में यह भी कहा है कि नगर निगम के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव 18 अगस्त, 2015 को हुआ था और उनका कार्यकाल 17 अगस्त, 2020 तक का था। लेकिन सरकार की ओर से निगम को भंग करके और बाद में जुलाई में वार्डबंदी बोर्ड का गठन कर दिया गया। इसमें मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर को शामिल ही नहीं किया गया। पटीशन में मांग की गई है कि इस वार्डबंदी को रद्द करके नए सिरे से वार्ड बंदी की जाए, ताकि बिना पक्षपात के चुनाव हो सके।
दूसरी ओर इस संबंधी पूर्व अकाली पार्षद परविंदर सोहाना ने बताया कि वह चुनाव से नहीं डरते और अकाली दल चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार है। लेकिन सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्घू की ओर से जिस तरीके से अपने पद का गलत इस्तेमाल करके वार्डबंदी के दौरान अकाली भाजपा पार्षदों के वार्डों को तोड़ा गया है, उससे लोगों में असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है और राजनीति फायदे को मुख्य रख कर की गई वार्डबंदी और सरकार की धक्केशाही के खिलाफ माननीय हाईकोर्ट में जाना जरूरी था। इसलिए उक्त पटीशन हाईकोर्ट में दायर की गई है।
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अकाली पार्षद परविंदर सोहाना, सुरिंदर सिंह रोडा, गुरमुख सोहल, कमलजीत सिंह और अन्य की ओर से हाईकोर्ट में पटीशन दायर की गई है। इस पटीशन में कहा गया है कि नए सिरे जो वार्डबंदी की गई है, उसमें सत्ताधारी पार्टी के उम्मीदवारों को फायदा देने के लिए काम किया गया है। इससे आम लोगों को काफी ज्यादा असुविधा पैदा होगी, क्योंकि इस वार्डबंदी में कई वार्डों में एक मोहल्ले को कई हिस्सों में बांट दिया गया है। शहर की हदबंदी में कोई बढ़ोतरी नहीं करने के कारण इस बार डीलिमिटेशन की जरूरत ही नहीं थी और सिर्फ रीएडजस्टमेंट ही की जानी थी। जिसके तहत वार्ड नंबर-1 की शुरूआत पिछली वार्डबंदी के अनुसार ही होनी थी। लेकिन राजनीतिक हितों को मुख्य रखते हुए इस बार वार्डबंदी की नंबरिंग की शुरूआत किसी अन्य जगह से की गई है और नंबर बदल दिए गए हैं जो कि कानूनी तौर पर गलत है।
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वहीं, सरकार की ओर से की गई वार्डबंदी की प्रक्रिया भी गलत है। वार्डबंदी करने के लिए जो बोर्ड बनाया जाता है, उसमें निगम के पूर्व मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर या डिप्टी मेयर में से किसी एक का सदस्य होना जरूरी होता है। जबकि कांग्रेस सरकार के सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्घू के अलावा उनके भाई जीती सिद्घू और एक कांग्रेसी पार्षद कुलजीत सिंह बेदी को सदस्य बना लिया गया है ताकि सेहत मंत्री अपनी मनमर्जी से वार्डबंदी कर सकें।
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अकाली पार्षदों ने पटीशन में यह भी कहा है कि नगर निगम के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव 18 अगस्त, 2015 को हुआ था और उनका कार्यकाल 17 अगस्त, 2020 तक का था। लेकिन सरकार की ओर से निगम को भंग करके और बाद में जुलाई में वार्डबंदी बोर्ड का गठन कर दिया गया। इसमें मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर को शामिल ही नहीं किया गया। पटीशन में मांग की गई है कि इस वार्डबंदी को रद्द करके नए सिरे से वार्ड बंदी की जाए, ताकि बिना पक्षपात के चुनाव हो सके।
दूसरी ओर इस संबंधी पूर्व अकाली पार्षद परविंदर सोहाना ने बताया कि वह चुनाव से नहीं डरते और अकाली दल चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार है। लेकिन सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्घू की ओर से जिस तरीके से अपने पद का गलत इस्तेमाल करके वार्डबंदी के दौरान अकाली भाजपा पार्षदों के वार्डों को तोड़ा गया है, उससे लोगों में असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है और राजनीति फायदे को मुख्य रख कर की गई वार्डबंदी और सरकार की धक्केशाही के खिलाफ माननीय हाईकोर्ट में जाना जरूरी था। इसलिए उक्त पटीशन हाईकोर्ट में दायर की गई है।