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Mohali News: एम्स के डॉक्टर लिख रहे बाहर की दवा, मरीजों की जेब पर बढ़ा बोझ
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जिला अस्पताल में लिखी जाती हैं बाहर की दवा। संवाद
मोहाली। फेज-6 स्थित जिला सिविल अस्पताल में त्वचा रोग से पीड़ित मरीजों को इन दिनों भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में त्वचा संबंधी बीमारियों की आवश्यक दवाएं लंबे समय से उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते डॉक्टरों को मजबूरी में मरीजों को बाहर की मेडिकल दुकानों से दवाएं लेने की सलाह देनी पड़ रही है।
अस्पताल में प्रतिदिन दर्जनों मरीज त्वचा रोग जैसे एक्जिमा, खुजली, फंगल संक्रमण, डर्मेटाइटिस आदि की समस्या लेकर पहुंचते हैं। मगर अस्पताल के स्टोर में इन बीमारियों के लिए आवश्यक दवाओं का स्टॉक या तो समाप्त हो चुका है या फिर कई महीनों से आया ही नहीं है। ऐसे में डॉक्टरों के पास मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के लिए कहने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
इस स्थिति से सबसे अधिक परेशानी गरीब और निम्न आय वर्ग के मरीजों को हो रही है। रोजाना मजदूरी करने वाले या आर्थिक रूप से कमजोर लोग जब मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर सिविल अस्पताल पहुंचते हैं और उन्हें बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं, तो उनके बजट पर सीधा असर पड़ता है।
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स्थानीय निवासी और मरीज गुरमीत सिंह ने बताया कि मैं पिछले दो हफ्तों से फंगल इन्फेक्शन की शिकायत लेकर अस्पताल आ रहा हूं, लेकिन डॉक्टर साहब हर बार बाहर से क्रीम और टैबलेट लाने को कह देते हैं। दवा की कीमत 300 रुपये से ज्यादा है, जो मेरे लिए हर बार खरीदना संभव नहीं। अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्होंने दवाओं की कमी के बारे में कई बार संबंधित विभाग को अवगत करा दिया है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। मरीजों और डॉक्टरों की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग जल्द से जल्द स्थिति की गंभीरता को समझे और आवश्यक दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करे ताकि लोगों को राहत मिल सके।
एम्स के डॉक्टर ने दवा लिखी है। इस बारे में एम्स की डायरेक्टर से भी बात की जाएगी। डॉक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे कि वे बाहर से दवाएं न लिखें। -डॉ. संगीता जैन, सिविल सर्जन
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अस्पताल में प्रतिदिन दर्जनों मरीज त्वचा रोग जैसे एक्जिमा, खुजली, फंगल संक्रमण, डर्मेटाइटिस आदि की समस्या लेकर पहुंचते हैं। मगर अस्पताल के स्टोर में इन बीमारियों के लिए आवश्यक दवाओं का स्टॉक या तो समाप्त हो चुका है या फिर कई महीनों से आया ही नहीं है। ऐसे में डॉक्टरों के पास मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के लिए कहने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
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इस स्थिति से सबसे अधिक परेशानी गरीब और निम्न आय वर्ग के मरीजों को हो रही है। रोजाना मजदूरी करने वाले या आर्थिक रूप से कमजोर लोग जब मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर सिविल अस्पताल पहुंचते हैं और उन्हें बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं, तो उनके बजट पर सीधा असर पड़ता है।
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स्थानीय निवासी और मरीज गुरमीत सिंह ने बताया कि मैं पिछले दो हफ्तों से फंगल इन्फेक्शन की शिकायत लेकर अस्पताल आ रहा हूं, लेकिन डॉक्टर साहब हर बार बाहर से क्रीम और टैबलेट लाने को कह देते हैं। दवा की कीमत 300 रुपये से ज्यादा है, जो मेरे लिए हर बार खरीदना संभव नहीं। अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्होंने दवाओं की कमी के बारे में कई बार संबंधित विभाग को अवगत करा दिया है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। मरीजों और डॉक्टरों की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग जल्द से जल्द स्थिति की गंभीरता को समझे और आवश्यक दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करे ताकि लोगों को राहत मिल सके।
एम्स के डॉक्टर ने दवा लिखी है। इस बारे में एम्स की डायरेक्टर से भी बात की जाएगी। डॉक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे कि वे बाहर से दवाएं न लिखें। -डॉ. संगीता जैन, सिविल सर्जन