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Mohali News: टाउन प्लानर की गिरफ्तारी के बाद गमाडा के कई अधिकारी विजिलेंस की रडार पर
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विजिलेंस ने डेवलपर्स जरनैल बाजवा, सीटीपी पंकज बावा के घर दी थी दबिश
सीटीपी बावा व अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। हाउसिंग प्रोजेक्ट पास करने और सही फीस जमा न कराने के आरोप में गिरफ्तार चीफ टाउन प्लानर पंजाब ( सीटीपी) पंकज बावा पांच दिन के रिमांड पर है। उससे लगातार पूछताछ हो रही है। विजिलेंस के सूत्रों के अनुसार पंकज बावा ने अपने पद पर रहते हुए कई कॉलोनाइजर को प्रोजेक्ट पास करवाने में मदद की है। बता दें कि सन्नी एनक्लेव खरड़ के डायरेक्टर जरनैल सिंह बाजवा और पटवारी लेखराज के खिलाफ भी विजिलेंस केस दर्ज कर जांच कर रही है।
बाजवा डेवलपर्स के अलावा शहर के ऐसे कौन से प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिनमें पंकज बावा की संलिप्तता हो सकती है, विजिलेंस इसकी भी जांच में जुटी है। बाजवा डेवलपर्स लिमिटेड सन्नी एनक्लेव खरड़ सबसे पुराना प्रोजेक्ट है। ऐसे में गमाडा के कई अधिकारी विजिलेंस की रडार पर हैं। कभी भी किसी को पूछताछ के लिए समन जारी हो सकता है। सन्नी एनक्लेव खरड़ के डायरेक्टर जरनैल सिंह बाजवा के जिस प्रोजेक्ट को पास करने के आरोप में टाउन प्लानर पंकज बावा को विजिलेंस ने गिरफ्तार किया है, वह पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहा है।
विजिलेंस के बताए अनुसार बावा बातों को घुमा रहा है। हालांकि सूत्रों अनुसार विजिलेंस जल्द ही बड़ी कार्रवाई कर सकती है। बता दें कि जरनैल सिंह बाजवा अपने सन्नी एनक्लेव प्रोजेक्ट को लेकर शुरू से विवादों में रहा है। बाजवा डेवलपर्स के डायरेक्टर जरनैल सिंह बाजवा पर पहले भी कई मामले दर्ज हैं। वह कई मामलों में जेल भी जा चुका है, चंडीगढ़ में भी उसके खिलाफ मामला दर्ज है। इस मामले में पटवारी लेखराज की भूमिका के बारे में विजिलेंस गंभीरता से जांच कर रही है। आशंका है कि पटवारी के अलावा कई गमाडा के अधिकारियों की मिलीभगत सामने आ सकती है।
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जिक्रयोग है कि आरोपी बावा चंडीगढ़ सेक्टर- 22ए का रहने वाला है, उसे उसी के घर से गिरफ्तार किया गया था। राजस्व पटवारी लेखराज, जो सेवामुक्त है, उसके साथ बावा मिलीभगत कर वह अपना काम करवाता था। उस पर गैर कानूनी तौर पर हाउसिंग प्रोजेक्ट पास करने और अपेक्षित फीस जमा न करवाने का आरोप है। विजिलेंस थाना मोहाली में उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून की धारा 13(1) (ए) और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा मामले की जांच के दौरान गमाडा चीफ टाउन प्लानर पंजाब और नगर काउंसिल खरड़ के अधिकारियों व कर्मचारियों या निजी व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जानकारी देते हुए विजिलेंस प्रवक्ता ने बताया कि एक शिकायत की जांच के दौरान पाया गया कि मैसर्ज बाजवा डेवेलपर्स लिमटिड ने मोहाली जिले के गांव सिंहपुर, हसनपुर और जंडपुर की 179 एकड़ जमीन में राज्य सरकार से रिहायशी व व्यापारिक प्रोजेक्ट पास करवाया था। आधिकारिक कमेटी की तरफ से 22 मार्च 2013 को लिए गए फैसले अनुसार प्रमोटर ने कैंसर राहत फंड के तौर पर प्रोजेक्ट की लागत का एक फीसदी या अधिकतम 1 करोड़ रुपये सरकार के पास जमा नहीं करवाया और गमाडा के अधिकारियों व कर्मचारियों ने नियमानुसार डेवलपर्स के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की।
इसके अलावा बाजवा डेवलपर्स लिमिटेड ने सेक्टर-120, 123, 124 व 125 में सन्नी एन्क्लेव, गांव जंडपुर, सिंहपुर, हसनपुर में रिहायशी मेगा प्रोजेक्ट का लेआउट प्लान भी मंजूर करवा लिया था, जिसमें 9.9 एकड़ में आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्गों ( ईडब्ल्यूएस) के लिए रिहायशी योजना भी मंजूर करवा ली थी। इस क्षेत्रफल में गांव हसनपुर का 4 कनाल 17. 1/10 मरले और गांव सिंहपुर का 57 कनाल 0.1/ 2 मरले क्षेत्रफल गमाडा के नाम पर रजिस्टर्ड करवा दिया, लेकिन बाजवा डेवलपर्स लिमिटेड की तरफ से 1.32 एकड़ क्षेत्रफल की रजिस्टरी अभी भी गमाडा के नाम पर नहीं करवाई गई थी। यह भी सामने आया कि 7 साल बाद भी जमीन का इंतकाल गमाडा के नाम पर रजिस्टर्ड नहीं करवाया गया और क्षेत्र अब भी मैसर्स बाजवा डेवलपर्स को सहमति देने वाले जमीन मालिकों की मलकीयत के अधीन है, जो बाजवा डेवेलपर्स लिमिटेड की गमाडा के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ मिलीभगत को स्पष्ट तौर पर साबित करता है।
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सीटीपी बावा व अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। हाउसिंग प्रोजेक्ट पास करने और सही फीस जमा न कराने के आरोप में गिरफ्तार चीफ टाउन प्लानर पंजाब ( सीटीपी) पंकज बावा पांच दिन के रिमांड पर है। उससे लगातार पूछताछ हो रही है। विजिलेंस के सूत्रों के अनुसार पंकज बावा ने अपने पद पर रहते हुए कई कॉलोनाइजर को प्रोजेक्ट पास करवाने में मदद की है। बता दें कि सन्नी एनक्लेव खरड़ के डायरेक्टर जरनैल सिंह बाजवा और पटवारी लेखराज के खिलाफ भी विजिलेंस केस दर्ज कर जांच कर रही है।
बाजवा डेवलपर्स के अलावा शहर के ऐसे कौन से प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिनमें पंकज बावा की संलिप्तता हो सकती है, विजिलेंस इसकी भी जांच में जुटी है। बाजवा डेवलपर्स लिमिटेड सन्नी एनक्लेव खरड़ सबसे पुराना प्रोजेक्ट है। ऐसे में गमाडा के कई अधिकारी विजिलेंस की रडार पर हैं। कभी भी किसी को पूछताछ के लिए समन जारी हो सकता है। सन्नी एनक्लेव खरड़ के डायरेक्टर जरनैल सिंह बाजवा के जिस प्रोजेक्ट को पास करने के आरोप में टाउन प्लानर पंकज बावा को विजिलेंस ने गिरफ्तार किया है, वह पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहा है।
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विजिलेंस के बताए अनुसार बावा बातों को घुमा रहा है। हालांकि सूत्रों अनुसार विजिलेंस जल्द ही बड़ी कार्रवाई कर सकती है। बता दें कि जरनैल सिंह बाजवा अपने सन्नी एनक्लेव प्रोजेक्ट को लेकर शुरू से विवादों में रहा है। बाजवा डेवलपर्स के डायरेक्टर जरनैल सिंह बाजवा पर पहले भी कई मामले दर्ज हैं। वह कई मामलों में जेल भी जा चुका है, चंडीगढ़ में भी उसके खिलाफ मामला दर्ज है। इस मामले में पटवारी लेखराज की भूमिका के बारे में विजिलेंस गंभीरता से जांच कर रही है। आशंका है कि पटवारी के अलावा कई गमाडा के अधिकारियों की मिलीभगत सामने आ सकती है।
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जिक्रयोग है कि आरोपी बावा चंडीगढ़ सेक्टर- 22ए का रहने वाला है, उसे उसी के घर से गिरफ्तार किया गया था। राजस्व पटवारी लेखराज, जो सेवामुक्त है, उसके साथ बावा मिलीभगत कर वह अपना काम करवाता था। उस पर गैर कानूनी तौर पर हाउसिंग प्रोजेक्ट पास करने और अपेक्षित फीस जमा न करवाने का आरोप है। विजिलेंस थाना मोहाली में उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून की धारा 13(1) (ए) और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा मामले की जांच के दौरान गमाडा चीफ टाउन प्लानर पंजाब और नगर काउंसिल खरड़ के अधिकारियों व कर्मचारियों या निजी व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जानकारी देते हुए विजिलेंस प्रवक्ता ने बताया कि एक शिकायत की जांच के दौरान पाया गया कि मैसर्ज बाजवा डेवेलपर्स लिमटिड ने मोहाली जिले के गांव सिंहपुर, हसनपुर और जंडपुर की 179 एकड़ जमीन में राज्य सरकार से रिहायशी व व्यापारिक प्रोजेक्ट पास करवाया था। आधिकारिक कमेटी की तरफ से 22 मार्च 2013 को लिए गए फैसले अनुसार प्रमोटर ने कैंसर राहत फंड के तौर पर प्रोजेक्ट की लागत का एक फीसदी या अधिकतम 1 करोड़ रुपये सरकार के पास जमा नहीं करवाया और गमाडा के अधिकारियों व कर्मचारियों ने नियमानुसार डेवलपर्स के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की।
इसके अलावा बाजवा डेवलपर्स लिमिटेड ने सेक्टर-120, 123, 124 व 125 में सन्नी एन्क्लेव, गांव जंडपुर, सिंहपुर, हसनपुर में रिहायशी मेगा प्रोजेक्ट का लेआउट प्लान भी मंजूर करवा लिया था, जिसमें 9.9 एकड़ में आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्गों ( ईडब्ल्यूएस) के लिए रिहायशी योजना भी मंजूर करवा ली थी। इस क्षेत्रफल में गांव हसनपुर का 4 कनाल 17. 1/10 मरले और गांव सिंहपुर का 57 कनाल 0.1/ 2 मरले क्षेत्रफल गमाडा के नाम पर रजिस्टर्ड करवा दिया, लेकिन बाजवा डेवलपर्स लिमिटेड की तरफ से 1.32 एकड़ क्षेत्रफल की रजिस्टरी अभी भी गमाडा के नाम पर नहीं करवाई गई थी। यह भी सामने आया कि 7 साल बाद भी जमीन का इंतकाल गमाडा के नाम पर रजिस्टर्ड नहीं करवाया गया और क्षेत्र अब भी मैसर्स बाजवा डेवलपर्स को सहमति देने वाले जमीन मालिकों की मलकीयत के अधीन है, जो बाजवा डेवेलपर्स लिमिटेड की गमाडा के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ मिलीभगत को स्पष्ट तौर पर साबित करता है।