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एरोट्रोपोलिस : भूमि अधिग्रहण से पहले पुडा भवन घेरेंगे किसान
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मोहाली। एरोट्रोपोलिस परियोजना के लिए आठ गांवों की 3864 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। 20 जुलाई को भूमि की कीमत तय करने के लिए प्रस्तावित अवार्ड से पहले किसानों ने मोर्चा खोल दिया है।
किसानों ने साफ कर दिया है कि वे अवार्ड प्रक्रिया का विरोध करेंगे और पुडा भवन का घेराव करेंगे। ऐसे में जीएमएडीए की महत्वाकांक्षी एरोट्रोपोलिस विस्तार परियोजना और किसानों के बीच टकराव की स्थिति बनने लगी है। किसानों का कहना है कि सरकार उनकी सहमति के बिना जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है, जबकि प्रशासन का तर्क है कि यह परियोजना क्षेत्र के नियोजित विकास के लिए जरूरी है।
इस संबंध में किसान चैंबर में को आठ गांवों कुरड़ी, बड़ी, मटरां, पत्तों, सियाऊ, बाकरपुर, किशनपुरा और छत्त के किसानों की बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 20 जुलाई को पुडा भवन में प्रस्तावित अवार्ड सुनाए जाने का विरोध किया जाएगा और कार्यालय का घेराव किया जाएगा। बैठक के दौरान भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) के प्रदेश नेता नछत्तर सिंह बैदवाण की अगुवाई में संघर्ष समिति का गठन भी किया गया।
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समिति अब संबंधित गांवों में जाकर किसानों को लामबंद करेगी, ताकि अधिग्रहण प्रक्रिया के खिलाफ व्यापक आंदोलन खड़ा किया जा सके।
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की लैंड पूलिंग नीति किसानों के हितों की रक्षा करने के बजाय उन्हें उनकी जमीन से बेदखल करने का माध्यम बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों की सहमति और उचित समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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किसानों ने साफ कर दिया है कि वे अवार्ड प्रक्रिया का विरोध करेंगे और पुडा भवन का घेराव करेंगे। ऐसे में जीएमएडीए की महत्वाकांक्षी एरोट्रोपोलिस विस्तार परियोजना और किसानों के बीच टकराव की स्थिति बनने लगी है। किसानों का कहना है कि सरकार उनकी सहमति के बिना जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है, जबकि प्रशासन का तर्क है कि यह परियोजना क्षेत्र के नियोजित विकास के लिए जरूरी है।
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इस संबंध में किसान चैंबर में को आठ गांवों कुरड़ी, बड़ी, मटरां, पत्तों, सियाऊ, बाकरपुर, किशनपुरा और छत्त के किसानों की बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 20 जुलाई को पुडा भवन में प्रस्तावित अवार्ड सुनाए जाने का विरोध किया जाएगा और कार्यालय का घेराव किया जाएगा। बैठक के दौरान भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) के प्रदेश नेता नछत्तर सिंह बैदवाण की अगुवाई में संघर्ष समिति का गठन भी किया गया।
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समिति अब संबंधित गांवों में जाकर किसानों को लामबंद करेगी, ताकि अधिग्रहण प्रक्रिया के खिलाफ व्यापक आंदोलन खड़ा किया जा सके।
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की लैंड पूलिंग नीति किसानों के हितों की रक्षा करने के बजाय उन्हें उनकी जमीन से बेदखल करने का माध्यम बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों की सहमति और उचित समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।