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ड्रेनेज सिस्टम बना, पर नहीं हुई सफाई
Mohali
Updated Sun, 15 Jul 2012 12:00 PM IST
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मोहाली। फेज पांच में ड्रेनेज सिस्टम बनने के बाद भी इस बार बारिश का पानी भरा। वहीं, बलौंगी से कुंभड़ा चौक को जाने वाली सड़क ऊंची होने से भी लोगों को नुकसान हुआ। सड़क का पानी भी कोठियों की तरफ आ गया।
फेज पांच शहर के निचले इलाकों में है। यह फेज एक, दो और चार से काफी नीचा है। इसलिए इन सभी इलाकों का पानी हर बारिश में फेज पांच की तरफ आ जाता था। जिससे फेज पांच में हालात बेहद खराब होते थे, पानी घरों में चला जाने से लोगों का काफी नुकसान होता था। सबसे ज्यादा बुरा हाल 1724, 1749, 1715 वाले ब्लॉक और मंदिर के साथ लगते एचजी क्वार्टरों का होता था। यहां बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती थी। दस सालों तक समस्या झेलने के बाद 2007 में इसका हल निकाला गया। जिसके बाद 1749 नंबर कोठी के पास से एक कॉज-वे (खुला नाला) बनाया गया। जिससे यहां का पानी सीधा जेसीटी के आगे चला जाता था। कई लाख की लागत से बने इस प्रोजेक्ट से लोगों को काफी राहत मिली। लेकिन इस बारिश में फिर यहां पानी भर गया। इलाकावासियों का कहना है कि कॉज-वे की सफाई न होने के कारण उसमें ब्लॉकेज हो गई, जिससे पानी नहीं निकल सका। दूसरा नुकसान बलौंगी रोड ने पहुंचाया। चौड़ी करते समय यह सड़क काफी ऊंची हो गई और कोठियां नीची रह गईं। इस सड़क पर बनाई गई रोड गलियों को या तो ठीक ढंग से जोड़ा नहीं गया, या फिर वे गंदी थीं। लेकिन रोड का सारा पानी भी गुरद्वारा साहिब के सामने से फेज पांच की तरफ आ गया, जिससे जलभराव की समस्या हुई।
नाले की नियमित सफाई हो
इलाके के पूर्व पार्षद सुरेश कुमार लक्की ने कहा कि नाले की नियमित सफाई होनी चाहिए। क्योंकि इंडस्ट्रियल एरिया में कोई भी मलबा या पत्ते आदि इसमें फेंक जाता है। जिससे बारिश में समस्या आती है। साथ ही बलौंगी रोड की रोड गलियां साफ करके उन्हें ड्रेनेज सिस्टम में जोड़ा जाए ताकि सड़क का पानी उनमें जाए।
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फेज चार के लिए बने अलग ड्रेनेज लाइन
रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान अलबेल सिंह सियान ने कहा कि फेज पांच में दो और एक का पानी फेज चार से होता हुआ आता है। इसलिए फेज चार के लिए अलग ड्रेनेज लाइन बनाई जानी चाहिए। जोकि बोगनविलिया गार्डन से पीटीएल चौक होते हुए जेसीटी तक जाए। इससे पीछे से आया पानी बाहर-बाहर से निकल जाएगा।
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फेज पांच शहर के निचले इलाकों में है। यह फेज एक, दो और चार से काफी नीचा है। इसलिए इन सभी इलाकों का पानी हर बारिश में फेज पांच की तरफ आ जाता था। जिससे फेज पांच में हालात बेहद खराब होते थे, पानी घरों में चला जाने से लोगों का काफी नुकसान होता था। सबसे ज्यादा बुरा हाल 1724, 1749, 1715 वाले ब्लॉक और मंदिर के साथ लगते एचजी क्वार्टरों का होता था। यहां बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती थी। दस सालों तक समस्या झेलने के बाद 2007 में इसका हल निकाला गया। जिसके बाद 1749 नंबर कोठी के पास से एक कॉज-वे (खुला नाला) बनाया गया। जिससे यहां का पानी सीधा जेसीटी के आगे चला जाता था। कई लाख की लागत से बने इस प्रोजेक्ट से लोगों को काफी राहत मिली। लेकिन इस बारिश में फिर यहां पानी भर गया। इलाकावासियों का कहना है कि कॉज-वे की सफाई न होने के कारण उसमें ब्लॉकेज हो गई, जिससे पानी नहीं निकल सका। दूसरा नुकसान बलौंगी रोड ने पहुंचाया। चौड़ी करते समय यह सड़क काफी ऊंची हो गई और कोठियां नीची रह गईं। इस सड़क पर बनाई गई रोड गलियों को या तो ठीक ढंग से जोड़ा नहीं गया, या फिर वे गंदी थीं। लेकिन रोड का सारा पानी भी गुरद्वारा साहिब के सामने से फेज पांच की तरफ आ गया, जिससे जलभराव की समस्या हुई।
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नाले की नियमित सफाई हो
इलाके के पूर्व पार्षद सुरेश कुमार लक्की ने कहा कि नाले की नियमित सफाई होनी चाहिए। क्योंकि इंडस्ट्रियल एरिया में कोई भी मलबा या पत्ते आदि इसमें फेंक जाता है। जिससे बारिश में समस्या आती है। साथ ही बलौंगी रोड की रोड गलियां साफ करके उन्हें ड्रेनेज सिस्टम में जोड़ा जाए ताकि सड़क का पानी उनमें जाए।
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फेज चार के लिए बने अलग ड्रेनेज लाइन
रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान अलबेल सिंह सियान ने कहा कि फेज पांच में दो और एक का पानी फेज चार से होता हुआ आता है। इसलिए फेज चार के लिए अलग ड्रेनेज लाइन बनाई जानी चाहिए। जोकि बोगनविलिया गार्डन से पीटीएल चौक होते हुए जेसीटी तक जाए। इससे पीछे से आया पानी बाहर-बाहर से निकल जाएगा।