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दुबई में फंसे 8 नौजवानों को लाया गया स्वेदश, बाकी 21 को लाने की प्रक्रिया जारी

Sun, 16 Feb 2020 02:03 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 16 Feb 2020 02:03 AM IST
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8 young men stranded in Dubai brought home, process to bring remaining 21 in progress
जीरकपुर। फर्जी ट्रेवल एजेंटों की ठगी का शिकार होकर दुबई में 29 नौजवान फंसे हुए थे। इनमें से 8 नौजवानों को शनिवार को मोहाली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से स्वदेश लाया गया है। इन नौजवानों को अपने वतन पहुंचाने का काम ‘सरबत दा भला’ ट्रस्ट के चेयरमैन एसपी ओबरॉय ने किया है। वे इससे पहले भी विदेशों में फंसे भारतीयों को वतन पहुंचाने का बीड़ा उठा चुके हैं।
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गौरतलब है कि लंबे समय से फर्जी ट्रेवल एजेंटों की ओर से लोगों को विदेश में पक्की नौकरी का झांसा देकर ठगी की वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है। एजेंटों की ठगी का खामियाजा रोजगार की तलाश में गए नौजवानों को भुगतना पड़ता है।
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मिली जानकारी के अनुसार शनिवार को दुबई से आने वाली फ्लाइट ने करीब सुबह 10 बजे मोहाली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड किया। इसमें वो 8 नौजवान मौजूद थे जो बेरोजगारी से परेशान होकर काम की तलाश के लिए भारत छोड़कर दुबई गए थे। दरअसल ये नौजवान दुबई तो चले गए थे, लेकिन दुबई में इनकी मुश्किलें कम होने के बजाय और ज्यादा बढ़ गईं थी। ये नौजवान पक्की नौकरी के झांसे में आकर दुबई में जिस कंपनी में नौकरी पर रखवाए गए थे, उस कंपनी ने करीब 2 महीने तक की नौकरी करवाकर नियमों का हवाला देकर उन्हें कंपनी से निकाल दिया था। इतना ही नहीं, कंपनी ने नौजवानों को सैलरी तक नहीं दी और जिन कमरों में नौजवानों को ठहराया गया था। उन कमरों को मकान मालिक ने उनसे खाली करवा लिया, क्योंकि कंपनी की तरफ से किराया नहीं दिया गया था।
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पेट भरने के लिए गुरुद्वारों में खाया लंगर
फर्जी ट्रेवल एजेंटों की ओर से की गई ठगी का पता जब नौजवानों को चला तो उन्होंने अपने-अपने स्तर पर दुबई में काम ढूंढने की कोशिश की। लेकिन इनको कहीं काम नहीं मिला। हालात ऐसे हो गए थे कि जितने पैसे नौजवानों के पास थे, उन पैसों से उन्होंने किसी तरह काम चलाया और जब पैसे भी खत्म हो गए तो कुछ नौजवानों ने दुबई के गुरुद्वारों में जाकर शरण ली। श्री गुरुद्वारा साहिब में नौजवानों ने लंगर से पेट भरकर काम चलाया, परंतु दुबई के गुरुद्वारों में व्यक्ति को एक रात से ज्यादा रहने की इजाजत नहीं थी। इसके चलते नौजवानों को गुरुद्वारा छोड़कर सड़कों पर खाक छानने के लिए मजबूर होना पड़ गया था।
नौजवानों में 4 हरियाणा, 3 पंजाब और एक दिल्ली निवासी
मोहाली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ‘सरबत दा भला’ ट्रस्ट के चेयरमैन एसपी ओबरॉय के साथ शनिवार को लौटे 29 में से 8 नौजवानों में से 4 हरियाणा, 3 पंजाब और एक युवक दिल्ली का रहने वाला है। स्वदेश लौटने वालों में पंजाब के जिला रोपड़ से मिंटू सिंह, होशियारपुर (मुकेरियां) से जोरावर सिंह, अमृतसर से जोवनजीत सिंह के अलावा हरियाणा के जिला कुरुक्षेत्र से शुभम, पवन शर्मा, रिंकू और जिला करनाल से इंद्रजीत सिंह और दिल्ली निवासी पुनीत के नाम शामिल हैं। शनिवार को इन नौजवानों ने मीडिया से बातचीत कर आपबीती बताई।
‘सरबत दा भला’ ट्रस्ट से किया संपर्क
दुबई में परेशानियां झेल रहे नौजवानों ने ‘सरबत दा भला’ ट्रस्ट के चेयरमैन एसपी ओबरॉय से संपर्क साधा। इसके बाद ट्रस्ट ने नौजवानों की वतन वापसी के लिए अपने स्तर पर टिकटों का खर्चा उठाया और मोहाली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शनिवार को दुबई के अंदर फंसे 29 में से 8 नौजवानों को चेयरमैन एसपी ओबरॉय अपने साथ भारत ले आए।
क्या बोले पीड़ित नौजवान...
अपना देश छोड़कर काम की तलाश में दुबई गया था, लेकिन वहां भी मुसीबतों ने पीछा नहीं छोड़ा। जिस कंपनी में कार्यरत था, वो कंपनी बंद हो गई और सैलरी भी नहीं मिली। बस फिर क्या था, पूरे 2 महीनों तक दुबई में काम की तलाश में सड़कों पर कभी इधर तो कभी उधर धक्के खाए। परंतु काम नहीं मिला।
-मिंटू सिंह, रोपड़
कंपनी बंद होने के बाद दुबई में फंसकर हम नौजवानों ने ‘सरबत दा भला’ ट्रस्ट के सदस्यों से संपर्क साधा, जिन्होंने बिना कोई देरी किए हमें भारत पहुंचाया। उनका हम तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं।
-शुभम, कुरुक्षेत्र
जिस कंपनी में मेरी जॉब थी, उस कंपनी ने 2 महीने काम करवाकर नौकरी से निकाल दिया। दो महीनों तक जो काम किया था, उसकी भी सैलरी नहीं दी। इसके बाद मैंने एक अनजान देश और अजनबी लोगों के बीच क्या-क्या तकलीफें झेलीं, बस वो मैं बयां नहीं कर सकता।
-पुनीत, दिल्ली
पहले तो कंपनी बंद हो गई और फिर जिस रूम में हमें ठहराया हुआ था, वो रूम मकान मालिक ने खाली करवा लिया। क्योंकि कंपनी ने मकान मालिक को किराया नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने दुबई के श्री गुरुद्वारा साहिब में रात बिताई, लेकिन अगले दिन उनको गुरुद्वारा साहिब छोड़ना पड़ा। तकलीफें यहां भी कम नहीं हुई, इसके बाद सड़कों की खाक छानने के लिए मजबूर होना पड़ा।
-जोरावर सिंह, मुकेरियां
मैं पिछले साल 6 अक्तूबर को काम की तलाश में दुबई गया था और जिस कंपनी में मेरी जॉब थी, उसका मालिक पाकिस्तान से संबंध रखता था। मालिक अचानक कंपनी को बंद करके चला गया और हमारी सैलरी तक नहीं दी। रूम का किराया न देने की वजह से हमें बाहर निकाल दिया गया, जिसके बाद कभी गुरुद्वारा साहिब तो कभी सड़कें ही उनका सहारा बनीं।

-पवन शर्मा, कुरूक्षेत्र
कोट्स..
मुझे शुक्रवार को ही इन नौजवानों की मुश्किलों का पता चला और ये सुनकर दिल को बहुत ठेस पहुंची। युवकों के दुबई से भारत भेजने के लिए ट्रस्ट की तरफ से नौजवानों की टिकटों का इंतजाम करवाकर शनिवार को इन्हें मोहाली एयरपोर्ट पहुंचाया। बाकी 21 युवकों के वीजा कैंसिल करवाकर उन्हें भी अगले हफ्ते भारत लाया जाएगा, जिसका सारा खर्चा ट्रस्ट ही उठाएगी। मेरी राज्य सरकार और केंद्र सरकार से मांग है कि अगर प्रशासन फर्जी ट्रेवल एजेंटों के खिलाफ नकेल कस दे तो नौजवानों को ऐसी मुसीबतें नहीं झेलनी पड़ेंगी।
-एसपी ओबरॉय, चेयरमैन, सरबत दा भला।
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