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Mohali News: राष्ट्रीय लोक अदालत में 19,169 मामलों का हुआ समाधान
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मोहाली। जिले में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान बड़ी संख्या में मामलों का आपसी सहमति के आधार पर निपटारा किया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला कानूनी सेवा अथॉरिटी के चेयरमैन अतुल कसाना ने बताया कि लोक अदालत में कुल 21,410 मामलों को सुनवाई के लिए रखा गया था। इसमें से 19,169 मामलों का निपटारा कर 283 करोड़ 21 लाख 34 हजार 432 रुपये के अवार्ड पारित किए गए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के कार्यक्रम के तहत पंजाब राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के प्रशासनिक जजों की देखरेख में यह लोक अदालत आयोजित की गई। इसमें समझौता योग्य फौजदारी मामले, चेक बाउंस केस, बैंक रिकवरी केस, वैवाहिक विवाद, मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) मामले, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण, बिजली-पानी बिलों से जुड़े मामले तथा विभिन्न दीवानी मामलों को निपटारे के लिए रखा गया।
मोहाली जिला अदालत परिसर में लोक अदालत के लिए 16 बेंच गठित किए गए थे। इनकी अध्यक्षता अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों, फैमिली कोर्ट के अधिकारियों, सिविल जजों, चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट और अन्य न्यायिक अधिकारियों ने की। इसके अलावा डेराबस्सी में छह और खरड़ में पांच बेंच गठित किए गए थे, जहां विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई कर समझौते के आधार पर निपटारा किया गया।
जिला कानूनी सेवा अथॉरिटी की सचिव मेघा धालीवाल ने बताया कि लोक अदालत को सफल बनाने के लिए पहले से विभिन्न विभागों और संबंधित पक्षों के साथ बैठकें आयोजित की गई थीं। बैंकों, बिजली विभाग, श्रम विभाग और बीमा कंपनियों को भी अधिक से अधिक मामलों को समझौते के आधार पर लोक अदालत में रखने के लिए प्रेरित किया गया था।
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उन्होंने कहा कि लोक अदालतों के माध्यम से लोगों को त्वरित और सस्ता न्याय मिलता है, वहीं अदालतों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है। बड़ी संख्या में लोगों ने आपसी सहमति से अपने मामलों का समाधान कर राहत महसूस की।
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मोहाली जिला अदालत परिसर में लोक अदालत के लिए 16 बेंच गठित किए गए थे। इनकी अध्यक्षता अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों, फैमिली कोर्ट के अधिकारियों, सिविल जजों, चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट और अन्य न्यायिक अधिकारियों ने की। इसके अलावा डेराबस्सी में छह और खरड़ में पांच बेंच गठित किए गए थे, जहां विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई कर समझौते के आधार पर निपटारा किया गया।
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जिला कानूनी सेवा अथॉरिटी की सचिव मेघा धालीवाल ने बताया कि लोक अदालत को सफल बनाने के लिए पहले से विभिन्न विभागों और संबंधित पक्षों के साथ बैठकें आयोजित की गई थीं। बैंकों, बिजली विभाग, श्रम विभाग और बीमा कंपनियों को भी अधिक से अधिक मामलों को समझौते के आधार पर लोक अदालत में रखने के लिए प्रेरित किया गया था।
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उन्होंने कहा कि लोक अदालतों के माध्यम से लोगों को त्वरित और सस्ता न्याय मिलता है, वहीं अदालतों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है। बड़ी संख्या में लोगों ने आपसी सहमति से अपने मामलों का समाधान कर राहत महसूस की।