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सीवरेज के मेन होल साबित हो रहे हैं मौत के कुएं

Fri, 12 Apr 2019 11:27 PM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 12 Apr 2019 11:27 PM IST
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सीवरेज के मेन होल साबित हो रहे हैं मौत के कुएं
मेनहोल मुलाजिमों के लिए साबित हो रहे ‘मौत के कुएं’
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कुराली में सीवरेज लाइन साफ करने गए मुलाजिम की मौत से उठे कई सवाल
मुलाजिमों के पास नहीं थे किसी तरफ के लाइफ सेफ्टी उपकरण
अमर उजाला ब्यूरो
कुराली। कुराली में सीवरेज लाइन की सफाई करते समय मुलाजिम की मौत होने से कई सवाल नगर काउंसिल व प्रशासन पर उठ रहे हैं। मेनहोल मुलाजिमों के लिए मौत के कुएं साबित हो रहे हैं, क्योंकि लाइनों की सफाई करने वाले मुलाजिमों को किसी भी तरह के लाइफ सेफ्टी संबंधी कोई उपकरण अभी तक मुहैया नहीं करवाए जाते हैं। इस केस में भी यह बात सामने आ रही है।
कुराली में सीवरेज लाइन की सफाई करने का काम नगर काउंसिल ने प्राइवेट कंपनी को दे रखा है। ठेकेदार के मुलाजिमों द्वारा ही काम किया जा रहा था, लेकिन मुलाजिमों की जान से इस तरह से खिलवाड़ होगा यह किसी ने सोचा नहीं था। कुछ जानकारों ने बताया कि मुलाजिमों के पास किसी तरह के सेफ्टी उपकरण नहीं थे। वह जैसे ही लाइन में उतरे, जहरीली गैस उन्हें चढ़ गई, जिससे एक मुलाजिम की मौत हो गई जबकि दो बेेहोश हो गए। इलाका निवासी जगदीप सिंह ने बताया कि नगर काउंसिल ठेकेदार से फ्री में तो काम करवा नहीं रही थी, बाकायदा उसकी पेमेंट होती है। ऐेसे में ठेकेदार अपने मुलाजिमों की जान से कैसे खेल सकता है। जांच में जो भी दोषी पाया जाता है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
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नियम तो यह भी कहते हैं
मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट 2013 के तहत किसी भी व्यक्ति को सीवरेज में भेजना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। अगर किसी विषम परिस्थिति में सीवरेज के अंदर जाना पड़ा तो इसके लिए 27 तरह के नियमों का पालन करना होता है, लेकिन इन नियमों की खुले तौर पर धज्जियां उड़ाई जाती हैं। आशीष गुप्ता बताते हैं कागजों में बताया गया है कि सफाईकर्मी को ऑक्सीजन सिलिंडर, मास्क, विशेष सूट और न जाने क्या-क्या दिया जाना चाहिए, लेकिन असल में उसे कुछ नहीं दिया जाता। सफाईकर्मी बिना किसी सुरक्षा के मेनहोल में उतर रहे हैं। आशीष ने बताया कि आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि जिस गटर के पास से आप मुंह पर कपड़ा लगाकर गुजर जाते हैं, उसमें सीवरेज के कर्मचारी उतर जाते हैं। इससे सबसे ज्यादा उसकी सेहत पर असर पड़ता है। कर्मचारियों को सांस की बीमारी, चर्म रोग जैसी बीमारियां हो जाती हैं।
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