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ग्राउंड रिर्पोट गांव में आई बिजली पर दीये जलाकर रहते हैं लोग
Updated Mon, 06 Aug 2018 01:44 AM IST
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गांव में आई बिजली पर दीया जलाकर रहते हैं लोग
मसौल में आजादी के वर्षों बाद भी गांववालों को नहीं मिल रहीं मूलभूत सुविधाएं
दुनिया के सबसे पुराने जीवाश्म मिलने के बाद सुर्खियों में आया था गांव
गांव के लिए कोई सड़क नहीं, नहीं चलती है सरकारी बस
मजबूरी में लोग छोड़ रहे गांव, सरकारी घोषनाएं कागजों में जीवित
अमर उजाला ब्यूरो
नयागांव। दुनिया के सबसे पुराने जीवाश्म मिलने के बाद सुर्खियों में आए गांव मसौल में वर्षों बाद भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। आजादी के कई साल बीत जाने के बाद भी इस गांव में आने के लिए सड़क तक नहीं है। गांव में रहनेवालों को मूलभूत सुविधाओं के लिए अब भी संघर्ष करना पड़ रहा है। बारिश के दौरान गांव का संपर्क भी शहर से टूट जाता है। चुनाव के समय नेता बड़े बड़े वादे करते हैं, लेकिन गांव की हालत अब भी काफी खस्ता है।
हरियाणा-हिमाचल की सीमा पर बसा मसौल पंजाब का आखिरी गांव है। यहां पहुंचने के लिए कोई सीधी सड़क तक नहीं है। हालांकि पूर्व सरकार ने इस गांव को शहर से जोड़ने के लिए छह पुल बनाने का काम शुरू किया था, लेकिन अब तक यह काम पूरा नहीं हो पाया है। इसके अलावा इस बार हुई तेज बारिश में कई जगहों पर सड़क बह गई है। सड़क में गड्ढे बन गए हैं, जिससे लोगों को दिक्कत हो रही है। इलाके में कोई सरकारी बस भी नहीं चलती, लोग निजी वाहनों पर ही निर्भर हैं। उचित सुविधाएं न मिल पाने के कारण अधिकतर लोग गांव छोड़ कर चंडीगढ़ या पड़ोसी शहर में बस रहे हैं।
लो वोल्टेज में आती है बिजली
गांव में कुछ समय पहले बिजली की समस्या थी। इस कारण कई लोग गांव छोड़कर कहीं और जाकर बस गए थे। गांव के लोगों के मुताबिक कई वर्षों के बाद गांव में बिजली की समस्या तो हल हो गई, लेकिन इसका लाभ उन्हें नहीं मिला। यहां लो वोल्टेज की समस्या है। अब भी लोग दीये जलाकर रात गुजारते हैं। गांव में पानी की समस्या भी गंभीर है। लोगों को पानी के टैंकर मंगवाकर गुजारा करना पड़ रहा है।
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ऊंटों के जरिए चल रहा रोजगार
गांव के लोग अपना परिवार का खर्च चलाने के लिए ऊंट रखे हुए हैं। उसे चंडीगढ़ के लगने वाले मेलों में लोगों का मनोरंजन कर अपना खर्च चला रहे हैं।
बारिश के दिनों में गांव जाना नहीं आसान
मसौल गांव के लिए जो रास्ता नयागांव से जाता है, उसमें तीन जगह नदियां पड़ती हैं। बारिश के दिनों में यहां से गुजरना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है। इससे गांव के लोगों और स्कूल जाने वाले बच्चों को काफी परेशानी होती है।
गांव में एक सरकारी स्कूल, हालत खस्ता
गांव में बच्चों के पढ़ने के लिए सिर्फ एक ही सरकारी स्कूल है, उसकी हालत ठीक नहीं है। स्कूल में 35 बच्चे पढ़ते हैं और इस स्कूल में सिर्फ दो टीचर हैं। सभी बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है। स्कूल तक पहुंचने के लिए बच्चों को एक नदी से होकर गुजरना पड़ता है। बारिश के दिनों में बच्चे स्कूल नहीं जा सकते। इस कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
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मसौल में आजादी के वर्षों बाद भी गांववालों को नहीं मिल रहीं मूलभूत सुविधाएं
दुनिया के सबसे पुराने जीवाश्म मिलने के बाद सुर्खियों में आया था गांव
गांव के लिए कोई सड़क नहीं, नहीं चलती है सरकारी बस
मजबूरी में लोग छोड़ रहे गांव, सरकारी घोषनाएं कागजों में जीवित
अमर उजाला ब्यूरो
नयागांव। दुनिया के सबसे पुराने जीवाश्म मिलने के बाद सुर्खियों में आए गांव मसौल में वर्षों बाद भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। आजादी के कई साल बीत जाने के बाद भी इस गांव में आने के लिए सड़क तक नहीं है। गांव में रहनेवालों को मूलभूत सुविधाओं के लिए अब भी संघर्ष करना पड़ रहा है। बारिश के दौरान गांव का संपर्क भी शहर से टूट जाता है। चुनाव के समय नेता बड़े बड़े वादे करते हैं, लेकिन गांव की हालत अब भी काफी खस्ता है।
हरियाणा-हिमाचल की सीमा पर बसा मसौल पंजाब का आखिरी गांव है। यहां पहुंचने के लिए कोई सीधी सड़क तक नहीं है। हालांकि पूर्व सरकार ने इस गांव को शहर से जोड़ने के लिए छह पुल बनाने का काम शुरू किया था, लेकिन अब तक यह काम पूरा नहीं हो पाया है। इसके अलावा इस बार हुई तेज बारिश में कई जगहों पर सड़क बह गई है। सड़क में गड्ढे बन गए हैं, जिससे लोगों को दिक्कत हो रही है। इलाके में कोई सरकारी बस भी नहीं चलती, लोग निजी वाहनों पर ही निर्भर हैं। उचित सुविधाएं न मिल पाने के कारण अधिकतर लोग गांव छोड़ कर चंडीगढ़ या पड़ोसी शहर में बस रहे हैं।
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लो वोल्टेज में आती है बिजली
गांव में कुछ समय पहले बिजली की समस्या थी। इस कारण कई लोग गांव छोड़कर कहीं और जाकर बस गए थे। गांव के लोगों के मुताबिक कई वर्षों के बाद गांव में बिजली की समस्या तो हल हो गई, लेकिन इसका लाभ उन्हें नहीं मिला। यहां लो वोल्टेज की समस्या है। अब भी लोग दीये जलाकर रात गुजारते हैं। गांव में पानी की समस्या भी गंभीर है। लोगों को पानी के टैंकर मंगवाकर गुजारा करना पड़ रहा है।
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ऊंटों के जरिए चल रहा रोजगार
गांव के लोग अपना परिवार का खर्च चलाने के लिए ऊंट रखे हुए हैं। उसे चंडीगढ़ के लगने वाले मेलों में लोगों का मनोरंजन कर अपना खर्च चला रहे हैं।
बारिश के दिनों में गांव जाना नहीं आसान
मसौल गांव के लिए जो रास्ता नयागांव से जाता है, उसमें तीन जगह नदियां पड़ती हैं। बारिश के दिनों में यहां से गुजरना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है। इससे गांव के लोगों और स्कूल जाने वाले बच्चों को काफी परेशानी होती है।
गांव में एक सरकारी स्कूल, हालत खस्ता
गांव में बच्चों के पढ़ने के लिए सिर्फ एक ही सरकारी स्कूल है, उसकी हालत ठीक नहीं है। स्कूल में 35 बच्चे पढ़ते हैं और इस स्कूल में सिर्फ दो टीचर हैं। सभी बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है। स्कूल तक पहुंचने के लिए बच्चों को एक नदी से होकर गुजरना पड़ता है। बारिश के दिनों में बच्चे स्कूल नहीं जा सकते। इस कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।