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विस्थापितों को नौकरियों में बंदरबांट
पठानकोट
Updated Sat, 21 Sep 2013 10:53 PM IST
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रणजीत सागर बांध परियोजना शाहपुरकंडी में विस्थापित परिवारों को नौकरी देने में अफसरों ने खूब बंदरबांट की। नियमों को दरकिनार कर अयोग्य उम्मीदवारों को भी नौकरी पर रखा गया।
विजिलेंस ने जांच में ऐसे दस केस पकड़े हैं, उनमें योग्यता पूरी करने के लिए माल महकमे से जाली दस्तावेज तैयार कराए गए। मामले में परियोजना के एक्सईएन, एसडीओ स्तर के अफसरों समेत एक दर्जन लोगों पर धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल अब तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
जानकारी के मुताबिक गांव गुलियाल निवासी सुदेश कुमार ने 19 जून, 2012 को शिकायत की थी कि उसकी जमीन परियोजना के निर्माण के समय अधिगृहीत की गई थी। नियमानुसार उसे परियोजना पर नौकरी नहीं दी गई।
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आरोप था कि सुदेश की जगह पर किसी और को नौकरी पर रख लिया गया। शिकायत में कई केसों में अयोग्य लोगों को नौकरी पर रखने के आरोप लगाए गए थे। जांच में पता चला कि सुदेश की जगह बांध प्रशासन ने उसके भाई संजय को नौकरी दी और संजय की मौत के बाद उसकी पत्नी परियोजना पर नौकरी कर रही है।
जांच में खुलासा हुआ कि विस्थापित परिवारों को नौकरी देने के लिए बनाई गई नीति के उल्ट परियोजना पर अयोग्य लोगों को नौकरी पर रखा गया है।
मई, 1986 को जमीन का अधिग्रहण करने के बाद 19 अक्तूबर, 1993 को विस्थापित परिवारों के एक सदस्य को नौकरी देने के लिए बनाई आरएंडआर योजना के तहत तीन शर्तें रखी गईं। मकान, 50 फीसदी जमीन और मकान तथा जमीन का 75 फीसदी हिस्सा अधिगृहीत होने वाले परिवार के सदस्य को नौकरी दिया जाना तय किया गया।
परियोजना के निर्माण के समय विस्थापित हुए 1573 में से केवल 769 परिवार ही उपरोक्त शर्तें पूरी करते थे। पिछले 20 साल में उनमें से बांध प्रशासन ने 404 परिवारों को नौकरी दी है, उनमें से 273 केसों की जांच में 10 केसों में उपरोक्त शर्तें पूरी न करने वाले उम्मीदवारों को भी नौकरी पर रखा गया।
उसमें किसी की 73 फीसदी जमीन अधिगृहीत की गई थी और उसने माल महकमे और बांध परियोजना के अधिकारियों से मिलीभगत करके जाली विस्थापित दस्तावेज तैयार कर उसके आधार पर नौकरी हासिल की। जबकि कुछ केसों में 35 फीसदी से भी कम जमीन अधिगृहीत किए जाने वालों को नौकरी पर रखा गया है।
1994-98 में भर्ती होने के बाद उक्त मुलाजिम नियमित भी हो गए और बांध प्रशासन से सभी लाभ हासिल कर रहे हैं। उक्त मामले में विजिलेंस ने एक्सईएन, एसडीओ समेत एक दर्जन लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोप में मामला दर्ज किया है।
विजिलेंस पठानकोट के डीएसपी नरेश ठाकुर ने कहा कि बांध प्रशासन से रिकार्ड मांगा गया है और उसकी जांच पड़ताल जारी है।
उन्होंने कहा कि अभी किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। उधर, बांध के अधिशाषी अभियंता आरएल मित्तल ने कहा कि उन्हें अभी विजिलेंस की ओर से सूचित नहीं किया गया है और सूचना के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
12 साल बाद रिपोर्ट का इंतजार
पठानकोट। रणजीत सागर बांध परियोजना शाहपुरकंडी पर नियमों को दरकिनार कर फर्जी लोगों को नौकरी पर रखने की जांच के लिए पंजाब सरकार और बांध प्रशासन ने पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है, लेकिन 12 साल गुजरने के बाद भी कमेटी की रिपोर्ट नहीं हो सकी है। विजिलेंस के मुताबिक वर्ष 2000 में नौकरी देने में अनियमितता बरतने की शिकायत पर पंजाब सरकार और बांध प्रशासन ने पांच सदस्यीय कमेटी गठित की थी और उसमें 105 लोगों के गलत दस्तावेजों के आधार पर भर्ती होने के आरोप लगाए गए लेकिन जांच के 12 साल गुजरने के बाद भी अभी तक रिपोर्ट का कुछ पता नहीं चल सका है। विजिलेंस के डीएसपी नरेश ठाकुर ने कहा कि बांध प्रशासन की पांच सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट भी मांगी गई है, लेकिन अब तक रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है।
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विजिलेंस ने जांच में ऐसे दस केस पकड़े हैं, उनमें योग्यता पूरी करने के लिए माल महकमे से जाली दस्तावेज तैयार कराए गए। मामले में परियोजना के एक्सईएन, एसडीओ स्तर के अफसरों समेत एक दर्जन लोगों पर धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल अब तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
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जानकारी के मुताबिक गांव गुलियाल निवासी सुदेश कुमार ने 19 जून, 2012 को शिकायत की थी कि उसकी जमीन परियोजना के निर्माण के समय अधिगृहीत की गई थी। नियमानुसार उसे परियोजना पर नौकरी नहीं दी गई।
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आरोप था कि सुदेश की जगह पर किसी और को नौकरी पर रख लिया गया। शिकायत में कई केसों में अयोग्य लोगों को नौकरी पर रखने के आरोप लगाए गए थे। जांच में पता चला कि सुदेश की जगह बांध प्रशासन ने उसके भाई संजय को नौकरी दी और संजय की मौत के बाद उसकी पत्नी परियोजना पर नौकरी कर रही है।
जांच में खुलासा हुआ कि विस्थापित परिवारों को नौकरी देने के लिए बनाई गई नीति के उल्ट परियोजना पर अयोग्य लोगों को नौकरी पर रखा गया है।
मई, 1986 को जमीन का अधिग्रहण करने के बाद 19 अक्तूबर, 1993 को विस्थापित परिवारों के एक सदस्य को नौकरी देने के लिए बनाई आरएंडआर योजना के तहत तीन शर्तें रखी गईं। मकान, 50 फीसदी जमीन और मकान तथा जमीन का 75 फीसदी हिस्सा अधिगृहीत होने वाले परिवार के सदस्य को नौकरी दिया जाना तय किया गया।
परियोजना के निर्माण के समय विस्थापित हुए 1573 में से केवल 769 परिवार ही उपरोक्त शर्तें पूरी करते थे। पिछले 20 साल में उनमें से बांध प्रशासन ने 404 परिवारों को नौकरी दी है, उनमें से 273 केसों की जांच में 10 केसों में उपरोक्त शर्तें पूरी न करने वाले उम्मीदवारों को भी नौकरी पर रखा गया।
उसमें किसी की 73 फीसदी जमीन अधिगृहीत की गई थी और उसने माल महकमे और बांध परियोजना के अधिकारियों से मिलीभगत करके जाली विस्थापित दस्तावेज तैयार कर उसके आधार पर नौकरी हासिल की। जबकि कुछ केसों में 35 फीसदी से भी कम जमीन अधिगृहीत किए जाने वालों को नौकरी पर रखा गया है।
1994-98 में भर्ती होने के बाद उक्त मुलाजिम नियमित भी हो गए और बांध प्रशासन से सभी लाभ हासिल कर रहे हैं। उक्त मामले में विजिलेंस ने एक्सईएन, एसडीओ समेत एक दर्जन लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोप में मामला दर्ज किया है।
विजिलेंस पठानकोट के डीएसपी नरेश ठाकुर ने कहा कि बांध प्रशासन से रिकार्ड मांगा गया है और उसकी जांच पड़ताल जारी है।
उन्होंने कहा कि अभी किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। उधर, बांध के अधिशाषी अभियंता आरएल मित्तल ने कहा कि उन्हें अभी विजिलेंस की ओर से सूचित नहीं किया गया है और सूचना के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
12 साल बाद रिपोर्ट का इंतजार
पठानकोट। रणजीत सागर बांध परियोजना शाहपुरकंडी पर नियमों को दरकिनार कर फर्जी लोगों को नौकरी पर रखने की जांच के लिए पंजाब सरकार और बांध प्रशासन ने पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है, लेकिन 12 साल गुजरने के बाद भी कमेटी की रिपोर्ट नहीं हो सकी है। विजिलेंस के मुताबिक वर्ष 2000 में नौकरी देने में अनियमितता बरतने की शिकायत पर पंजाब सरकार और बांध प्रशासन ने पांच सदस्यीय कमेटी गठित की थी और उसमें 105 लोगों के गलत दस्तावेजों के आधार पर भर्ती होने के आरोप लगाए गए लेकिन जांच के 12 साल गुजरने के बाद भी अभी तक रिपोर्ट का कुछ पता नहीं चल सका है। विजिलेंस के डीएसपी नरेश ठाकुर ने कहा कि बांध प्रशासन की पांच सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट भी मांगी गई है, लेकिन अब तक रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है।