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प्रधानमंत्री के मंच से पंजाब की बात करूंगा : सुखदेव ढींडसा
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हलवारा। संयुक्त अकाली दल के राष्ट्रीय प्रधान सुखदेव सिंह ढींडसा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फिरोजपुर रैली में शामिल होने की अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वो रैली में शामिल भी होंगे और प्रधानमंत्री के मंच से पंजाब की बात भी करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ स्टेज साझा करने के लिए जरूरी विशेष कोरोना टेस्ट भी मंगलवार को ही करवाया है। मंगलवार को दाखा के सीनियर अकाली नेता जत्थेदार बलबीर सिंह जांगपुर के घर परिवार से मिलने पहुंचे ढींडसा ने कहा कि प्रधानमंत्री के मंच से पूरी दृढ़ता के साथ के साथ पंथ और पंजाब के मुद्दे उठाएंगे।
उन्होंने कहा कि पंजाब और पंथ के मुद्दे सर्व प्रथम हैं और इन मुद्दों पर कोई समझौता नहीं। उन्हें पंजाब की कीमत पर सत्ता नहीं चाहिए, बंदी सिंहों की रिहाई, बेअदबी मामले और पंजाब को नशे की गहरी खाई मे धकेलने वालों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और मिसाली कार्यवाही के लिए प्रधानमंत्री से मांग की जाएगी। इसके अलावा किसानों की पूर्ण कर्जा माफी और पंजाब की अन्य ज्वलंत मांगों को पूरा करने की मांग भी पीएम के सामने रखी जाएगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा 1984 मे दिए जख्म अभी तक हरे हैं और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भी बेअदबी मामले मे अपनी मर्जी की एसआईटी बनाकर जांच मे रोड़ा अटकाया था। इसी वजह से उन्होंने बादल दल से अलग होना उचित समझा। तीन कृषि कानून के खिलाफ उन्होंने अपना पदम विभूषण अवार्ड केंद्र सरकार को वापिस कर दिया था जबकि बादल परिवार इन तीनों कानून की पैरवी कर रहा था। ढींडसा के साथ जिला प्रधान सुखदेव सिंह चक्क, यूथ प्रधान मनप्रीत सिंह तलवंडी और सतनाम सिंह चीमा मौजूद थे।
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उन्होंने कहा कि पंजाब और पंथ के मुद्दे सर्व प्रथम हैं और इन मुद्दों पर कोई समझौता नहीं। उन्हें पंजाब की कीमत पर सत्ता नहीं चाहिए, बंदी सिंहों की रिहाई, बेअदबी मामले और पंजाब को नशे की गहरी खाई मे धकेलने वालों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और मिसाली कार्यवाही के लिए प्रधानमंत्री से मांग की जाएगी। इसके अलावा किसानों की पूर्ण कर्जा माफी और पंजाब की अन्य ज्वलंत मांगों को पूरा करने की मांग भी पीएम के सामने रखी जाएगी।
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उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा 1984 मे दिए जख्म अभी तक हरे हैं और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भी बेअदबी मामले मे अपनी मर्जी की एसआईटी बनाकर जांच मे रोड़ा अटकाया था। इसी वजह से उन्होंने बादल दल से अलग होना उचित समझा। तीन कृषि कानून के खिलाफ उन्होंने अपना पदम विभूषण अवार्ड केंद्र सरकार को वापिस कर दिया था जबकि बादल परिवार इन तीनों कानून की पैरवी कर रहा था। ढींडसा के साथ जिला प्रधान सुखदेव सिंह चक्क, यूथ प्रधान मनप्रीत सिंह तलवंडी और सतनाम सिंह चीमा मौजूद थे।
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