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Ludhiana News: ऊधम सिंह ने ब्रिटिश अदालत में बयां किया था किसानों का दर्द

Mon, 28 Jul 2025 08:02 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 28 Jul 2025 08:02 PM IST
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Udham Singh had expressed the pain of the farmers in the British court
-कहा था- भारतीय किसान के लिए ब्रिटिश सरकार बेहद जुल्मी व घातक है
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-मेहनतकशों के कठोर परिश्रम को लूट ठाठ भरी जिंदगी जी रहे हैं अंग्रेज
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सुशील कुमार
सुनाम। ऊधम सिंह ने ब्रिटिश अदालत में खुद को एक भारतीय और किसान बताया था। माइकल ओ ड्वायर को मारने के बाद ब्रिटिश अदालत में मुकदमा झेल रहे महान शहीद ऊधम सिंह को अपनी फांसी की नहीं बल्कि देश के किसानों, मजदूरों, महिलाओं, बच्चों की चिंता थी।
भले ही आज के दौर में किसान व मजदूर के नाम पर सियासत हो रही हो और किसान अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन करने को विवश हैं लेकिन ऊधम सिंह फांसी का फंदा चूमने से कुछ पल पहले भी मेहनतकश लोगों के भविष्य को लेकर चिंतित रहे। आजादी के अलावा हरेक क्षेत्र में देश की हो रही दुर्दशा के प्रति उधम सिंह बेहद गंभीर और चिंतित थे। लंदन में मुकदमा झेल रहे ऊधम सिंह 5 जून, 1940 को अपने साथ अदालत में लाए आठ पन्नों को पढ़कर करीब 25 मिनट बोलते रहे। इसमें उन्होंने खुद को अंग्रेजों के खिलाफ नहीं बल्कि अंग्रेजी साम्राज्यावाद के खिलाफ होने का दावा किया था। इंजीनियर राकेश कुमार की पुस्तक आजादी दी शमा दा परवाना में इसका ज़िक्र है। आक्रोशित ऊधम सिंह ने ब्रिटिश हुकूमत के प्रति रोष व्यक्त करते हुए इन कागजों को फाड़कर फेंक दिया था लेकिन अदालत के मुलाजिमों ने इन्हें इकट्ठे कर जोड़ लिया था। अदालत ने उस वक्त ऊधम सिंह के इन बयानों व कागजों को मीडिया में प्रकाशित करने पर पाबंदी लगा दी थी।
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कठोर परिश्रम की लूट करके अंग्रेज ठाठ भरी जिंदगी जी रहे
ब्रिटिश अदालत में भारतीयों का दर्द बयां करते ऊधम सिंह ने कहा कि मैं एक भारतीय व किसान होने के नाते ब्रिटिश सरकार को ऐसे देखता हूं जो बेहद जुल्मी और भारतीयों के लिए घातक है। मेरे देश की पैदावार पर कब्जा करके मेहनतकश लोगों को जीने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। मेहनतकश लोगों की जमीन का आनंद अंग्रेज उठा रहे हैं। मेरे देश के लोगों के लिए यह नफरत करने के योग्य है। मेहनतकश लोगों के कठोर परिश्रम की लूट करके अंग्रेज ठाठ भरी जिंदगी जी रहे हैं।
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सरकारों को मेहनतकशों की कोई चिंता नहीं:
उगराहां
ऊधम सिंह की इस चिंता पर भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि ऊधम सिंह, भगत सिंह, करतार सिंह सराभा एक ही विचारधारा के योद्धा रहे हैं। उन्हें मालूम था कि भारत को अंग्रेजों से आजादी मिल जाएगी लेकिन उसके बाद भी मेहनतकशों का शोषण थमने वाला नहीं है। महान शहीदों ने पहले ही इस सत्य को लिख दिया था। सरकारों को मेहनतकशों की कोई चिंता नहीं है। बड़े पूंजीपतियों के हक में फैसले हो रहे हैं। 31 जुलाई को नेता इस महान शहीद को श्रद्धांजलि तो जरूर देंगे लेकिन शहीद की विचारधारा से कोसों दूर हैं। किसान, मजदूर तो संघर्ष से अपने हक बचाएंगे।
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