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...बड़ी अड़चनें हैं स्मार्ट सिटी की राह में
ब्यूरो, अमर उजाला/लुधियाना
Updated Thu, 28 Jan 2016 09:57 PM IST
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केंद्र सरकार द्वारा जारी पहले चरण की बीस स्मार्ट सिटी में लुधियाना को भी जगह मिल गई है, लेकिन शहर को स्मार्ट बनाना इतना आसान नहीं है। औद्योगिक नगरी को स्मार्ट बनाने के लिए नगर निगम को दिक्कतों के पहाड़ हटाने होंगे। शहर में प्रदूषण, कमजोर कचरा प्रबंधन, ट्रैफिक, बुड्ढा नाला, पानी, सीवरेज, बरसाती पानी की निकासी के इंतजाम की कमी, खस्ताहाल सड़क और अवैध कब्जे जैसी दिक्कतों का समाधान करना होगा। इसके लिए सटीक रणनीति बनाने की जरूरत है।
प्रदूषण से मुक्ति
लुधियाना को प्रदूषण मुक्त बनाना बड़ी चुनौती होगा। स्मार्ट सिटी बनाने के लिए लोगों से ली गई राय में 85 फीसदी लोगों ने प्रदूषण को लेकर सबसे ज्यादा चिंता जताई थी। लोगों के सुझावों के तहत शहर में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की वकालत की गई। इसके अलावा लोगों ने शहर में साइकिलिंग और ई रिक्शा को बढ़ावा देने की राय दी। साथ ही पर्यावरण फ्रेंडली ट्रांसपोर्ट को आगे लाने की मांग की गई।
बुड्ढा नाला - सबसे बड़ा चैलेंज
लुधियाना के 14 किलोमीटर इलाके से गुजर रहे बुड्ढे नाले को साफ करना सबसे बड़ी चुनौती होगा। अब तक बुड्ढे नाले की दशा सुधारने के लिए केंद्र, राज्य सरकार और निगम ने करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, लेकिन नाले की स्थिति जस की तस बनी हुई है। नाले के आसपास लाखों की संख्या में लोग बसते हैं, उनकी सेहत पर भी इसका बुरा असर हो रहा है।
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कचरा प्रबंधन
लुधियाना में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नाम पर निगम ने निजी कंपनी को कूड़े की लिफ्टिंग का काम दे रखा है। शहर से रोजाना करीब 1200 टन कूड़ा निकलता है, लेकिन कंपनी एक हजार टन की ही लिफ्टिंग कर पाती है। 200 टन कचरा सड़कों पर ही बिखरा रहता है। अब तक शहर में सॉलिड वेस्ट की ट्रीटमेंट का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया जा सका है।
पानी और सीवरेज की उपलब्धता
स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर के सभी लोगों को शुद्ध पानी और सीवरेज मुहैया कराना बड़ी चुनौती होगा। इस वक्त निगम 700 से अधिक ट्यूूबवेल के मार्फत पानी की आपूर्ति कर रहा है। शहर के बड़े हिस्से में पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। यही हाल सीवरेज का भी है। बरसाती पानी की निकासी के लिए भी शहर में पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में बरसात का पानी सड़कों पर जमा हो जाता है। इसके अलावा टूटी सड़कें और ट्रैफिक को सुचारू करना भी बड़ी चुनौती होगा।
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प्रदूषण से मुक्ति
लुधियाना को प्रदूषण मुक्त बनाना बड़ी चुनौती होगा। स्मार्ट सिटी बनाने के लिए लोगों से ली गई राय में 85 फीसदी लोगों ने प्रदूषण को लेकर सबसे ज्यादा चिंता जताई थी। लोगों के सुझावों के तहत शहर में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की वकालत की गई। इसके अलावा लोगों ने शहर में साइकिलिंग और ई रिक्शा को बढ़ावा देने की राय दी। साथ ही पर्यावरण फ्रेंडली ट्रांसपोर्ट को आगे लाने की मांग की गई।
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बुड्ढा नाला - सबसे बड़ा चैलेंज
लुधियाना के 14 किलोमीटर इलाके से गुजर रहे बुड्ढे नाले को साफ करना सबसे बड़ी चुनौती होगा। अब तक बुड्ढे नाले की दशा सुधारने के लिए केंद्र, राज्य सरकार और निगम ने करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, लेकिन नाले की स्थिति जस की तस बनी हुई है। नाले के आसपास लाखों की संख्या में लोग बसते हैं, उनकी सेहत पर भी इसका बुरा असर हो रहा है।
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कचरा प्रबंधन
लुधियाना में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नाम पर निगम ने निजी कंपनी को कूड़े की लिफ्टिंग का काम दे रखा है। शहर से रोजाना करीब 1200 टन कूड़ा निकलता है, लेकिन कंपनी एक हजार टन की ही लिफ्टिंग कर पाती है। 200 टन कचरा सड़कों पर ही बिखरा रहता है। अब तक शहर में सॉलिड वेस्ट की ट्रीटमेंट का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया जा सका है।
पानी और सीवरेज की उपलब्धता
स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर के सभी लोगों को शुद्ध पानी और सीवरेज मुहैया कराना बड़ी चुनौती होगा। इस वक्त निगम 700 से अधिक ट्यूूबवेल के मार्फत पानी की आपूर्ति कर रहा है। शहर के बड़े हिस्से में पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। यही हाल सीवरेज का भी है। बरसाती पानी की निकासी के लिए भी शहर में पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में बरसात का पानी सड़कों पर जमा हो जाता है। इसके अलावा टूटी सड़कें और ट्रैफिक को सुचारू करना भी बड़ी चुनौती होगा।