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लुधियाना में बीते डेढ़ से स्कूल वैन चालक बेरोजगार, कोई प्याज तो फास्ड फूड रहा है बेच

Thu, 20 May 2021 10:58 PM IST
Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Thu, 20 May 2021 10:58 PM IST
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School van driver unemployed in Ludhiana for the past one and a half years some onion has been selling fried food
लुधियाना। कोरोना महामारी का प्रभाव कारोबार के हर क्षेत्र पर पड़ा है, लेकिन सबसे बड़ी मार स्कूल वैन चालकों पर पड़ी है। बीते डेढ़ साल से स्कूल बंद होने के कारण घर पर बैठे हैं। वहीं जो वाहन स्कूल के साथ जुड़े हैं, उन्हें कुछ पैसा जरूर मिल रहा है, लेकिन जो वैन चालक अपने स्तर पर स्कूलों के साथ जुड़े थे। उनकी हालत सबसे दयनीय हो चुकी है, कोई स्कूल वैन में प्याज और सब्जी बेचने के लिए मजबूर है तो कोई फास्ट फूड की रेहड़ी लगाकर अपना परिवार पाल रहा है।
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हैरानी की बात तो यह है कि स्कूल वैन चालकों की सरकार की तरफ से कोई सार नहीं ली गई है। कई वैन चालकों ने बैंक से कर्ज लेकर स्कूल वैन ली थी, अब किश्ते टूटने के कारण बैंक की परेशानी झेल रहे हैं। महानगर निवासी सुखपाल सिंह बताते है कि उनके पास खुद की दो स्कूल वैन है, बीते डेढ़ साल से स्कूल खुल नहीं रहे हैं। परिवार को पालने के लिए कोई सहारा नहीं है। ऐसे में उन्होंने स्कूल वैन में सब्जी और प्याज बेचने का काम शुरू किया था। किसी तरह घर का खर्च चल रहा था, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के चलते लॉकडाउन फिर से लग गया है। अब उनका कारोबार बिलकुल ठप हो गया है।
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चंडीगढ़ रोड निवासी जसविंदर सिंह बताते हैं कि बीते 20 साल से स्कूल वैन चलाने का काम करते आ रहे हैं। अभी उनके पास पांच स्कूल वैन हैं। कोरोना महामारी के शुरू होने के बाद से उनका काम पूरी तरह ठप हो गया है। अब हालात यह बन गए है कि बच्चों की स्कूल फीस देने तक के लिए पैसे नहीं है। जीवनयापन करने के लिए उन्होंने फास्ट फूड का काम शुरू किया, लेकिन अब दोबारा कर्फ्यू और लॉक डाउन के चलते कारोबार फिर से ठप हो गया। कर्फ्यू में सिर्फ सुबह से दोपहर 12 बजे तक काम करने का समय है। जबकि फास्ट फूड की बिक्री ही शाम से शुरू होती है। अब उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करें और अपने परिवार को कैसे पाले।
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वैन चालक रविंदर सिंह बताते है कि उन्होंने स्कूल वैन लेने के लिए बैंक से लगभग छह लाख रुपये कर्ज लिया था। अब बैंक की किश्त चुकाना भारी पड़ रहा है। यही नहीं घर बनाने के लिए अलग से बैंक से कर्ज लिया था। लॉकडाउन के कारण अब हालत ऐसी हो गई है कि बच्चों की पिछले छह माह की फीस भी नहीं जमा कर पाए हैं। आखिरकार किसी तरह उन्होंने दुकान किराए पर लेकर किताबों का काम शुरू किया था। वहीं, अब लॉकडाउन के कारण यह व्यापार भी चौपट हो गया है।
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