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पता नहीं था 24 अप्रैल का सत्संग आखिरी होगा
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Fri, 13 May 2016 09:32 PM IST
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बाबा हरदेव के निधन के बाद गमगीन संगत।
- फोटो : अमर उजाला
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कनाडा में सड़क हादसे में निरंकारी मिशन के प्रमुख बाबा हरदेव सिंह की मौत के बाद संगतों का रो रो कर बुरा हाल है। भारत नगर चौक और गांव संगोवाल में बने संत निरंकारी भवन में बड़ी संख्या में संगत पहुंची।
पिछले महीने 24 अप्रैल को दिल्ली में बाबा हरदेव सिंह का सत्संग सुन कर आए लोग उनके आखिरी शब्दों को याद कर के रो रहे हैं। सत्संग सुन कर आई संगत का कहना था कि उन्हें नहीं पता था कि 24 अप्रैल का सत्संग बाबा जी का आखिरी सत्संग होगा।
लुधियाना के संत निरंकारी सत्संग भवन के जोनल इंचार्ज एचएस चावला, एपीआरओ हंसराज, जसजीत जस्सी, वकील सुरिंदर शर्मा शाह, तिलक राज, सुरिंदर सिंह, सलविंदर सिंह और अजीत राम जी गिल सुबह से ही संगतों को समझाने में लगे हैं।
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हंसराज ने कहा कि सुबह जैसे ही यह दुखद सूचना पहुंची तो संगत भवन में आनी शुरू हो गई। सभी को समझा कर घर भेजा जा रहा है कि वह घर जाकर बाबा जी के लिए सिमरन करें। दोपहर तक संगतों को यही कहा जा रहा था कि बाबा जी वेंटीलेटर पर हैं। देर दोपहर उनके शरीर छोड़ने की खबर संगतों को दी गई।
सुरिंदर सिंह ने कहा कि वह बाबा जी के साथ उन्हें छोड़ने के लिए एयरपोर्ट तक गए थे। बाबा जी ने जाते हुए संगतों को हंसते-हंसते हाथ जोड़े थे। वही बाबा जी के आखिरी दर्शन साबित हुए।
बाबा हरदेव सिंह ने बाबा गुरबचन सिंह जी की शहादत के बाद निरंकारी समाज की गुरु गद्दी 1980 में संभाली थी। लुधियाना में एपीआरओ हंसराज ने कहा कि बाबा जी की धर्मपत्नी माता सुरिंदर कौर हैं और उनकी चार बेटियां थीं।
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पिछले महीने 24 अप्रैल को दिल्ली में बाबा हरदेव सिंह का सत्संग सुन कर आए लोग उनके आखिरी शब्दों को याद कर के रो रहे हैं। सत्संग सुन कर आई संगत का कहना था कि उन्हें नहीं पता था कि 24 अप्रैल का सत्संग बाबा जी का आखिरी सत्संग होगा।
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लुधियाना के संत निरंकारी सत्संग भवन के जोनल इंचार्ज एचएस चावला, एपीआरओ हंसराज, जसजीत जस्सी, वकील सुरिंदर शर्मा शाह, तिलक राज, सुरिंदर सिंह, सलविंदर सिंह और अजीत राम जी गिल सुबह से ही संगतों को समझाने में लगे हैं।
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हंसराज ने कहा कि सुबह जैसे ही यह दुखद सूचना पहुंची तो संगत भवन में आनी शुरू हो गई। सभी को समझा कर घर भेजा जा रहा है कि वह घर जाकर बाबा जी के लिए सिमरन करें। दोपहर तक संगतों को यही कहा जा रहा था कि बाबा जी वेंटीलेटर पर हैं। देर दोपहर उनके शरीर छोड़ने की खबर संगतों को दी गई।
सुरिंदर सिंह ने कहा कि वह बाबा जी के साथ उन्हें छोड़ने के लिए एयरपोर्ट तक गए थे। बाबा जी ने जाते हुए संगतों को हंसते-हंसते हाथ जोड़े थे। वही बाबा जी के आखिरी दर्शन साबित हुए।
बाबा हरदेव सिंह ने बाबा गुरबचन सिंह जी की शहादत के बाद निरंकारी समाज की गुरु गद्दी 1980 में संभाली थी। लुधियाना में एपीआरओ हंसराज ने कहा कि बाबा जी की धर्मपत्नी माता सुरिंदर कौर हैं और उनकी चार बेटियां थीं।