{"_id":"6aa508f1c9d902003c0efcc4","slug":"rain-in-jalandhar-ludhiana-punjab-records-40-less-rainfall-than-normal-this-season-2026-09-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"जालंधर-लुधियाना में तेज बरसात: पंजाब में इस बार सामान्य से 40 फीसदी कम बारिश, पांच जिले सूखे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जालंधर-लुधियाना में तेज बरसात: पंजाब में इस बार सामान्य से 40 फीसदी कम बारिश, पांच जिले सूखे
Sat, 12 Sep 2026 01:43 PM IST
Nivedita
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर/लुधियाना
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर/लुधियाना
Published by: Nivedita
Updated Sat, 12 Sep 2026 01:43 PM IST
सार
सितंबर में पंजाब में अब तक सामान्य 34.5 एमएम के मुकाबले केवल 12.9 एमएम बारिश हुई है। जुलाई में 26 और अगस्त में 35 फीसदी कम बारिश हुई थी।
विज्ञापन
लुधियाना में तेज बरसात
- फोटो : संवाद
विस्तार
पंजाब में इस बार मानसून की बारिश सामान्य से 40 फीसदी कम हुई है। वहीं शनिवार को जालंधर और लुधियाना में तेज बरसात से लोगों को राहत मिली।
विज्ञापन
उत्तर-पश्चिम भारत के सभी राज्यों में पंजाब में सबसे ज्यादा कमी दर्ज की गई है। राज्य में सामान्य 402.9 एमएम के मुकाबले 243.5 एमएम बारिश हुई है। वहीं उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से केवल नौ फीसदी कम बारिश हुई है।
विज्ञापन
सितंबर में पंजाब में अब तक सामान्य 34.5 एमएम के मुकाबले केवल 12.9 एमएम बारिश हुई है। 13 जिलों में 60 से 99 फीसदी तक कमी दर्ज की गई। अमृतसर 92, बरनाला 89, बठिंडा 81, फरीदकोट 97, फतेहगढ़ साहिब 74, फिरोजपुर 96, जालंधर 84, लुधियाना 82, मुक्तसर 83, पटियाला 70, मोहाली 72, एसबीएस नगर 64 और संगरूर में 62 फीसदी कम बारिश हुई। मोगा, फाजिल्का, मानसा, तरनतारन और कपूरथला में सितंबर में अब तक बारिश नहीं हुई। जुलाई में 26 और अगस्त में 35 फीसदी कम बारिश हुई थी।
विज्ञापन
फसलों की पैदावार घटने का खतरा
पीएयू की जलवायु परिवर्तन एवं कृषि मौसम विज्ञान विभाग की डॉ. पवनीत कौर किंगरा ने कहा कि अल नीनो के प्रभाव से मानसून कमजोर रहा। ग्लोबल वार्मिंग से मौसम में बदलाव बढ़ रहे हैं। इससे फसलों की पैदावार घटने और किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होने का खतरा है। उन्होंने सितंबर के मध्य तक मानसून की विदाई की संभावना जताई।
बारिश की कमी से धान के लिए ट्यूबवेल पर निर्भरता बढ़ी है। इससे भूजल दोहन बढ़ा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बारिश कम होने से फसलों का झाड़ प्रभावित हो सकता है। उमस और गर्मी बढ़ने से बिजली की मांग भी बढ़ी है।