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‘देश में रोजाना 4500 लोगों को होता स्ट्रोक’
ब्यूरो,अमर उजाला /लुधियाना
Updated Thu, 29 Oct 2015 10:26 PM IST
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डीएमसी में न्यूरोलॉजी विभाग के हेड डॉ. गगनदीप सिंह का कहना है कि विश्व
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में स्ट्रोक (अधरंग) मौत और अपंगता का सबसे बड़ा कारण है।
एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2030 तक विश्व में सालाना 7.8 मिलियन लोग इससे मौत का शिकार होंगे। डॉ. गगनदीप वीरवार को डीएमसी अस्पताल में विश्व स्ट्रोक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने बताया कि भारत में रोजाना लगभग 4500 लोग स्ट्रोक का शिकार होते हैं। देश के हर जिले में रोजाना आठ लोगों को स्ट्रोक होता है और हर माह एक जिले में 240 लोग इसकी चपेट में आते हैं, उनमें से केवल पांच लोग ही वक्त पर अस्पताल पहुंच कर अपना इलाज करा पाते हैं। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक का अटैक आने के चार घंटे तक मरीज को अस्पताल पहुंचा कर इलाज कराने से उसे सुरक्षित रखा जा सकता है।
डीएमसी के प्रिंसिपल डा. संदीप पुरी ने कहा कि डीएमसी की इमरजेंसी में हर नर्स, वार्ड के स्टाफ यहां तक की ट्राली मैन को भी स्ट्रोक के दौरे से प्रभावित मरीज को बेहतर तरीके से हैंडल करने की बाकायदा ट्रेनिंग दी गई है। डॉ. मोनिका सिंगला ने कहा कि महिलाओं और 40 साल से कम उम्र के युवाओं में भी स्ट्रोक के केस बढ़ रहे हैं। इसका मुख्य कारण काम का दबाव, तनाव इत्यादि है। इस अवसर पर डॉ. राजू सिंह छीना, डॉ. बरिंदर सिंह, डॉ. संदीप शर्मा मौजूद रहे।
एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2030 तक विश्व में सालाना 7.8 मिलियन लोग इससे मौत का शिकार होंगे। डॉ. गगनदीप वीरवार को डीएमसी अस्पताल में विश्व स्ट्रोक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने बताया कि भारत में रोजाना लगभग 4500 लोग स्ट्रोक का शिकार होते हैं। देश के हर जिले में रोजाना आठ लोगों को स्ट्रोक होता है और हर माह एक जिले में 240 लोग इसकी चपेट में आते हैं, उनमें से केवल पांच लोग ही वक्त पर अस्पताल पहुंच कर अपना इलाज करा पाते हैं। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक का अटैक आने के चार घंटे तक मरीज को अस्पताल पहुंचा कर इलाज कराने से उसे सुरक्षित रखा जा सकता है।
डीएमसी के प्रिंसिपल डा. संदीप पुरी ने कहा कि डीएमसी की इमरजेंसी में हर नर्स, वार्ड के स्टाफ यहां तक की ट्राली मैन को भी स्ट्रोक के दौरे से प्रभावित मरीज को बेहतर तरीके से हैंडल करने की बाकायदा ट्रेनिंग दी गई है। डॉ. मोनिका सिंगला ने कहा कि महिलाओं और 40 साल से कम उम्र के युवाओं में भी स्ट्रोक के केस बढ़ रहे हैं। इसका मुख्य कारण काम का दबाव, तनाव इत्यादि है। इस अवसर पर डॉ. राजू सिंह छीना, डॉ. बरिंदर सिंह, डॉ. संदीप शर्मा मौजूद रहे।