{"_id":"613236e88ebc3e1375339148","slug":"punjab-chief-minister-and-his-son-s-petition-dismissed-in-income-tax-case-ludhiana-news-pkl4255504142","type":"story","status":"publish","title_hn":"आयकर मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री और उनके बेटे की याचिका खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आयकर मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री और उनके बेटे की याचिका खारिज
विज्ञापन
लुधियाना। अतिरिक्त सेशन जज राजकुमार गर्ग की अदालत ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रणइंद्र सिंह की ओर से ईडी को आयकर मामलों की फाइलों का निरीक्षण करने की इजाजत देने संबंधी फैसले को चैलेंज करने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं। ईडी ने फेमा के तहत उनके पास लंबित एक जांच के संबंध में स्थानीय अदालत में लंबित फाइलों का निरीक्षण करने के लिए अर्जियां दायर की थीं।
तत्कालीन ड्यूटी मजिस्ट्रेट जसवीर सिंह की अदालत ने इन याचिकाओं को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री और उनके बेटे के खिलाफ लंबित आयकर से संबंधित फाइलों का निरीक्षण करने की इजाजत दी थी। 28 सितंबर 2020 को ईडी के अधिकारी इन फाइलों के निरीक्षण के लिए अदालत गए थे, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा था। मुख्यमंत्री और उनके बेटे ने निचली अदालत के फैसले को सेशन कोर्ट में चैलेंज किया था।
अतिरिक्त सेशन जज अतुल कसाना की अदालत ने उन्हें स्टे दे दिया था। मुख्यमंत्री ने याचिका में दावा किया था कि ईडी के पास इस मामले की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है। आयकर चोरी के कथित आरोपों के साथ आयकर विभाग की फौजदारी शिकायतें स्थानीय अदालत के समक्ष लंबित हैं। याचिका में दावा किया था कि उनका पक्ष जाने बिना आदेश पारित किया गया। इस तरह के आदेश को पारित किया जाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ था।
विज्ञापन
अदालत में बहस के दौरान ईडी के विशेष सरकारी वकील लोकेश नारंग व आयकर विभाग के विशेष सरकारी वकील राकेश गुप्ता ने मुख्यमंत्री व उनके बेटे की ओर से दायर की गई याचिकाओं को कानून का दुरुपयोग बताते हुए इन्हें खारिज करने की मांग की थी। उनका कहना था कि जो आदेश निचली अदालत ने पास किया है वह सही है। इससे छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश नहीं है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने मुख्यमंत्री और उनके बेटे की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। ईडी को इसमें राहत मिली है।
विज्ञापन
तत्कालीन ड्यूटी मजिस्ट्रेट जसवीर सिंह की अदालत ने इन याचिकाओं को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री और उनके बेटे के खिलाफ लंबित आयकर से संबंधित फाइलों का निरीक्षण करने की इजाजत दी थी। 28 सितंबर 2020 को ईडी के अधिकारी इन फाइलों के निरीक्षण के लिए अदालत गए थे, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा था। मुख्यमंत्री और उनके बेटे ने निचली अदालत के फैसले को सेशन कोर्ट में चैलेंज किया था।
विज्ञापन
अतिरिक्त सेशन जज अतुल कसाना की अदालत ने उन्हें स्टे दे दिया था। मुख्यमंत्री ने याचिका में दावा किया था कि ईडी के पास इस मामले की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है। आयकर चोरी के कथित आरोपों के साथ आयकर विभाग की फौजदारी शिकायतें स्थानीय अदालत के समक्ष लंबित हैं। याचिका में दावा किया था कि उनका पक्ष जाने बिना आदेश पारित किया गया। इस तरह के आदेश को पारित किया जाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ था।
विज्ञापन
अदालत में बहस के दौरान ईडी के विशेष सरकारी वकील लोकेश नारंग व आयकर विभाग के विशेष सरकारी वकील राकेश गुप्ता ने मुख्यमंत्री व उनके बेटे की ओर से दायर की गई याचिकाओं को कानून का दुरुपयोग बताते हुए इन्हें खारिज करने की मांग की थी। उनका कहना था कि जो आदेश निचली अदालत ने पास किया है वह सही है। इससे छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश नहीं है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने मुख्यमंत्री और उनके बेटे की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। ईडी को इसमें राहत मिली है।