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20 करोड़ का भुगतान नहीं होने पर होलसेल दवा विक्रेताओं ने सीएमसी के खिलाफ लगाया धरना
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होलसेल केमिस्ट एसोसिएशन पिंडी स्ट्रीट पदाधिकारियों ने मंगलवार को सीएमसी अस्पताल के बाहर धरना दिया। एसोसिएशन पदाधिकारियों का कहना है कि 20 करोड़ रुपये का भुगतान अस्पताल की तरफ से नहीं किया जा रहा है। इसलिए मजबूरन उन्हें धरना देना पड़ा है। आखिरकार सीएमसी अस्पताल प्रबंधकों ने एसोसिएशन पदाधिकारियों से बातचीत कर आश्वासन दिया कि 6 सितंबर तक उनकी पेमेंट का भुगतान हो जाएगा। इसके बाद एसोसिएशन ने अपना धरना समाप्त कर दिया।
एसोसिएशन प्रधान जीएस चावला ने बताया कि पिंडी स्ट्रीट स्थित होलसेल मार्केट की तरफ से सीएमसी अस्पताल को दवाएं सप्लाई की जाती है। लंबे समय से बिलों का भुगतान नहीं हो रहा था। इसलिए 30 अप्रैल 2018 को उनकी सीएमसी प्रबंधकों के साथ बैठक हुई, इस बैठक में विभिन्न दवा विक्रेताओं का लगभग 33 करोड़ रुपये पेंडिंग निकला था। उस समय प्रबंधकों ने आश्वासन दिया कि वह हर माह पुरानी पेमेंट का एक करोड़ भुगतान करेंगे। हर माह खरीद होने वाली दवाइयों का भुगतान अलग से 21 दिन में होता रहेगा।
प्रबंधकों ने एसोसिएशन को 12 करोड़ के चेक जारी किए थे, जोकि मई 2019 में पूरे हो चुके है। फरवरी 2019 से उनकी रूटीन पेमेंट में भी देरी होना शुरू हो गई। अब लगभग 20 करोड़ का बकाया सीएमसी की तरफ है। पेमेंट को लेने के लिए वह कई बार प्रबंधकों से मिल चुके है, यहां तक मेल पर उन्हें रिमाइंडर भी जारी किए गए। कोई हल नहीं निकला। आखिरकार मंगलवार को उनके सब्र का प्याला छलक गया और मजबूरन धरना देना पड़ा है। अब प्रबंधकों ने आश्वासन दिया है कि 6 सितंबर तक बकाया राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। इसके बाद भी अगर ऐसा नहीं हुआ, तो एसोसिएशन कोई भी कड़ा उठा सकती है। इसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधकों और सरकार की होगी।
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बैंकों का ब्याज देने पर मजबूर दवा विक्रेता
चावला के अनुसार पिंडी स्ट्रीट के लगभग 15 होलसेल दवा विक्रेताओं का पैसा फंसा है। बैंकों का दबाव उन पर बढ़ता जा रहा है, क्योंकि वह भुगतान नहीं कर पा रहे है। ऐसे में बैंकों के ब्याज का बोझ दवा विक्रेताओं पर बढ़ता जा रहा है। बैंक का पैसा वापस नहीं किया, तो उनके खिलाफ बैंक कोई भी कार्रवाई कर सकते है। होलसेल दवा विक्रेता इस मझधार में फंस गए हैं।
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एसोसिएशन प्रधान जीएस चावला ने बताया कि पिंडी स्ट्रीट स्थित होलसेल मार्केट की तरफ से सीएमसी अस्पताल को दवाएं सप्लाई की जाती है। लंबे समय से बिलों का भुगतान नहीं हो रहा था। इसलिए 30 अप्रैल 2018 को उनकी सीएमसी प्रबंधकों के साथ बैठक हुई, इस बैठक में विभिन्न दवा विक्रेताओं का लगभग 33 करोड़ रुपये पेंडिंग निकला था। उस समय प्रबंधकों ने आश्वासन दिया कि वह हर माह पुरानी पेमेंट का एक करोड़ भुगतान करेंगे। हर माह खरीद होने वाली दवाइयों का भुगतान अलग से 21 दिन में होता रहेगा।
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प्रबंधकों ने एसोसिएशन को 12 करोड़ के चेक जारी किए थे, जोकि मई 2019 में पूरे हो चुके है। फरवरी 2019 से उनकी रूटीन पेमेंट में भी देरी होना शुरू हो गई। अब लगभग 20 करोड़ का बकाया सीएमसी की तरफ है। पेमेंट को लेने के लिए वह कई बार प्रबंधकों से मिल चुके है, यहां तक मेल पर उन्हें रिमाइंडर भी जारी किए गए। कोई हल नहीं निकला। आखिरकार मंगलवार को उनके सब्र का प्याला छलक गया और मजबूरन धरना देना पड़ा है। अब प्रबंधकों ने आश्वासन दिया है कि 6 सितंबर तक बकाया राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। इसके बाद भी अगर ऐसा नहीं हुआ, तो एसोसिएशन कोई भी कड़ा उठा सकती है। इसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधकों और सरकार की होगी।
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बैंकों का ब्याज देने पर मजबूर दवा विक्रेता
चावला के अनुसार पिंडी स्ट्रीट के लगभग 15 होलसेल दवा विक्रेताओं का पैसा फंसा है। बैंकों का दबाव उन पर बढ़ता जा रहा है, क्योंकि वह भुगतान नहीं कर पा रहे है। ऐसे में बैंकों के ब्याज का बोझ दवा विक्रेताओं पर बढ़ता जा रहा है। बैंक का पैसा वापस नहीं किया, तो उनके खिलाफ बैंक कोई भी कार्रवाई कर सकते है। होलसेल दवा विक्रेता इस मझधार में फंस गए हैं।