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अब आसानी से पैरोल पर नहीं जा सकेंगे कैदी
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Sat, 31 May 2014 10:44 PM IST
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विभिन्न मामलों में सजा भुगत रहे कैदियों को पैरोल पर जाने के लिए अब काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
जेल से छुट्टी लेकर पैरोल पर जाने वाले कैदियों के वापस न आने के कारण नियम सख्त किए जा रहे हैं। अब कैदी को पैरोल पर जाने से पहले हैवी बांड भरना पड़ेगा। जिसके बाद पूरी तरह से जांच करने के बाद ही उसे पैरोल पर छोड़ा जाएगा। वह जितने दिन की छुट्टी पर जाएगा उसे अपने इलाके के थाने में समय-समय पर हाजिरी लगवानी पड़ेगी। अगर उसे कहीं जाना होगा तो बिना बताए शहर छोड़ने की इजाजत नहीं होगी।
आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो पिछले तीन वर्ष में विभिन्न आपराधिक मामलों में सजा भुगत रहे करीब 1500 कैदी छुट्टी लेकर पैरोल पर गए थे। जिसके बाद करीब साठ कैदी वापस नहीं आए। उनकी गिरफ्तारी के लिए विभाग ने एक टीम तैयार की। जिनका काम सिर्फ पैरोल पर गए कैदियों की तलाश करना था। टीम ने पैरोल पर गए दस के करीब कैदियों को गिरफ्तार कर लिया। बाकी कैदियों की तलाश में छापामारी चल रही है। जेल सुपरिंटेंडेंट एसपी खन्ना का कहना है कि अन्य फरार चल रहे कैदियों की गिरफ्तारी के लिए छापामारी चल रही है। उन्हें भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
एक वर्ष के लिए छुट्टी होती है बंद
जेल सुपरिंटेंडेंट सुरिंदर पाल खन्ना ने कहा कि कैदियों को पैरोल पर भेजने के बाद अगर वह वापस नहीं आता तो उसे किसी तरह विभाग द्वारा तैनात की गई टीम गिरफ्तार कर लेती है। इस पर कैदी को अगले एक वर्ष तक छुट्टी नहीं दी जाती। उसके बाद अगर वह पैरोल पर छुट्टी मांगता है तो उसे हैवी बांड और अन्य शर्तें मानने के बाद ही छुट्टी दी जाती है। उसे छुट्टी के लिए अदालत के आदेश लेने पड़ते है। अदालत के आदेश के बाद ही कैदी को पैरोल पर छुट्टी भेजा जाता है।
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शहर छोड़ने से पहले डीसी से लेनी होती है इजाजत
खन्ना ने कहा कि कैदी को जेल से घर तक जाने की ही इजाजत होती है। उसे सप्ताह में एक बार इलाका थाना में हाजिरी लगवानी होती है। पैरोल के दौरान उसे किसी जरूरी काम के लिए या फिर किसी अपील के लिए शहर से बाहर जाना पड़ता है तो उसे डीसी से इजाजत लेनी होती है। अगर डीसी इजाजत दे तो वह बाहर जा सकता है अन्यथा नहीं।
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जेल से छुट्टी लेकर पैरोल पर जाने वाले कैदियों के वापस न आने के कारण नियम सख्त किए जा रहे हैं। अब कैदी को पैरोल पर जाने से पहले हैवी बांड भरना पड़ेगा। जिसके बाद पूरी तरह से जांच करने के बाद ही उसे पैरोल पर छोड़ा जाएगा। वह जितने दिन की छुट्टी पर जाएगा उसे अपने इलाके के थाने में समय-समय पर हाजिरी लगवानी पड़ेगी। अगर उसे कहीं जाना होगा तो बिना बताए शहर छोड़ने की इजाजत नहीं होगी।
आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो पिछले तीन वर्ष में विभिन्न आपराधिक मामलों में सजा भुगत रहे करीब 1500 कैदी छुट्टी लेकर पैरोल पर गए थे। जिसके बाद करीब साठ कैदी वापस नहीं आए। उनकी गिरफ्तारी के लिए विभाग ने एक टीम तैयार की। जिनका काम सिर्फ पैरोल पर गए कैदियों की तलाश करना था। टीम ने पैरोल पर गए दस के करीब कैदियों को गिरफ्तार कर लिया। बाकी कैदियों की तलाश में छापामारी चल रही है। जेल सुपरिंटेंडेंट एसपी खन्ना का कहना है कि अन्य फरार चल रहे कैदियों की गिरफ्तारी के लिए छापामारी चल रही है। उन्हें भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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एक वर्ष के लिए छुट्टी होती है बंद
जेल सुपरिंटेंडेंट सुरिंदर पाल खन्ना ने कहा कि कैदियों को पैरोल पर भेजने के बाद अगर वह वापस नहीं आता तो उसे किसी तरह विभाग द्वारा तैनात की गई टीम गिरफ्तार कर लेती है। इस पर कैदी को अगले एक वर्ष तक छुट्टी नहीं दी जाती। उसके बाद अगर वह पैरोल पर छुट्टी मांगता है तो उसे हैवी बांड और अन्य शर्तें मानने के बाद ही छुट्टी दी जाती है। उसे छुट्टी के लिए अदालत के आदेश लेने पड़ते है। अदालत के आदेश के बाद ही कैदी को पैरोल पर छुट्टी भेजा जाता है।
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शहर छोड़ने से पहले डीसी से लेनी होती है इजाजत
खन्ना ने कहा कि कैदी को जेल से घर तक जाने की ही इजाजत होती है। उसे सप्ताह में एक बार इलाका थाना में हाजिरी लगवानी होती है। पैरोल के दौरान उसे किसी जरूरी काम के लिए या फिर किसी अपील के लिए शहर से बाहर जाना पड़ता है तो उसे डीसी से इजाजत लेनी होती है। अगर डीसी इजाजत दे तो वह बाहर जा सकता है अन्यथा नहीं।