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Ludhiana News: अब तेजी से घूमेगा साइकिल उद्योग का पहिया, भारत को वैश्विक हब बनाने का लक्ष्य
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-वर्ष 2024 में देश का साइकिल मार्केट 1.3 अरब डाॅलर का था, 2030 तक इसे चार गुणा बढ़ा कर 5.21 अरब डाॅलर करने का लक्ष्य
-सीधे तौर पर दस लाख लोगों को रोजगार देता है देश का साइकिल एवं पार्ट्स उद्योग
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राजीव शर्मा
लुधियाना। पंजाब की आर्थिक राजधानी समेत देश में अब साइकिल उद्योग का पहिया तेजी से घूमेगा। उद्योग का मानना है कि यदि सरकार से नीतिगत समर्थन मिले तो भारत को साइकिल एवं इसके पार्ट्स का वैश्विक हब बनाया जा सकता है। वर्ष 2024 में भारतीय साइकिल बाजार का आकार लगभग 1.09 लाख रुपये रहा है। वर्ष 2030 तक इसके आकार काे चार गुणा तक बढ़ा कर 4.35 लाख करोड़ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए उद्योग भी कमर कस रहा है।
उद्यमी मानते हैं कि भारत का साइकिल उद्योग आज सिफ एक परिवहन साधन का कारोबार नहीं बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका, पर्यावरण बचाने की मुहिम और स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है। यही कारण है कि सरकार और उद्योग जगत की साझेदारी से आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र नई उड़ान भरने को तैयार है।
देश का नब्बे फीसदी उत्पादन लुधियाना में
ऑल इंडिया साइकिल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन-एकमा के प्रेसिडेंट आदित्य मुंजाल कहते हैं कि देश हर साल 1.6 करोड़ से लेकर 1.8 करोड़ साइकिलें बनाता है। इसमें लगभग 4000 पुर्जा निर्माता और 2000 से अधिक साइकिल निर्माता व असेंबलर शामिल हैं। उत्पादन का 90 प्रतिशत हिस्सा पंजाब के लुधियाना जिले में होता है जो इसे साइकिल नगरी के रूप में पहचान दिलाता है। इस उद्योग से सीधे तौर पर 10 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों परिवार इससे जुड़कर अपनी आजीविका चलाते हैं।
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निर्यात और वैश्विक पहचान
एकमा के सेक्रेटरी जनरल डाॅ. केबी ठाकुर का तर्क है कि भारत की साइकिलें और उसके पुर्जे आज विश्व के 150 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में निर्यात का आंकड़ा 347.94 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि चीन समेत अन्य 10 देशों से करीब 123.33 करोड़ रुपये का आयात भी हुआ है। डाॅ. केबी ठाकुर मानते हैं कि थोड़े और प्रयासों से भारत साइकिल निर्माण में पूरी दुनिया का मजबूत केंद्र बन सकता है।
साइकिल : सेहत और स्थायित्व का प्रतीक
आज साइकिल चलाना केवल साधारण सफर नहीं बल्कि सेहत और स्थायित्व की पहचान बन गया है। इससे प्रदूषण और ट्रैफिक जाम कम होते हैं। ऊर्जा की बचत होती है और सबसे अहम बात कि लोगों की फिटनेस बढ़ती है। यही वजह है कि साइकिल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) में से 17 में से 11 से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। यह हर वर्ग के लिए किफायती, समावेशी और पर्यावरण अनुकूल साधन है।
अवसर और नई दिशा
एवन साइकिल्स लिमिटेड के सीएमडी पद्मश्री ओंकार सिंह पाहवा कहते हैं कि देश के पास साइकिल उद्योग में वैश्विक नेतृत्व पाने का सुनहरा अवसर है। इसके लिए कुछ अहम कदम उठाने होंगे- जैसे जीएसटी दरों में सुधार और चोरी पर रोक, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना, गुणवत्ता मानकों का अनिवार्य पालन, सुरक्षित साइकिल लेन का निर्माण और केंद्र सरकार के अधीन साइकिल विकास परिषद का पुनर्गठन इत्यादि शामिल हैं। इसके अलावा घरेलू बाजार में भी संभावना तेजी से बढ़ रही हैं। युवाओं में फिटनेस और स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता के कारण प्रीमियम और इलेक्ट्रिक साइकिलों की मांग लगातार बढ़ रही है।
साइकिल उद्योग क्यों है अहम?
-1.6 करोड़ से लेकर-1.8 करोड़ साइकिलें हर साल बनती हैं भारत में।
-90 प्रतिशत उत्पादन लुधियाना (पंजाब) में केंद्रित।
-10 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है।
-150 देशों को निर्यात, कारोबार 34,794 मिलियन रुपये।
-2030 तक चार गुना वृद्धि का लक्ष्य, 5.21 अरब डॉलर का होगा बाजार।
-पर्यावरण हितैषी : प्रदूषण और ट्रैफिक जाम में कमी।
-फिटनेस और सेहत को बढ़ावा, युवाओं में ई-बाइक की बढ़ती मांग।
-आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया से सीधा तालमेल।
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-सीधे तौर पर दस लाख लोगों को रोजगार देता है देश का साइकिल एवं पार्ट्स उद्योग
राजीव शर्मा
लुधियाना। पंजाब की आर्थिक राजधानी समेत देश में अब साइकिल उद्योग का पहिया तेजी से घूमेगा। उद्योग का मानना है कि यदि सरकार से नीतिगत समर्थन मिले तो भारत को साइकिल एवं इसके पार्ट्स का वैश्विक हब बनाया जा सकता है। वर्ष 2024 में भारतीय साइकिल बाजार का आकार लगभग 1.09 लाख रुपये रहा है। वर्ष 2030 तक इसके आकार काे चार गुणा तक बढ़ा कर 4.35 लाख करोड़ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए उद्योग भी कमर कस रहा है।
उद्यमी मानते हैं कि भारत का साइकिल उद्योग आज सिफ एक परिवहन साधन का कारोबार नहीं बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका, पर्यावरण बचाने की मुहिम और स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है। यही कारण है कि सरकार और उद्योग जगत की साझेदारी से आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र नई उड़ान भरने को तैयार है।
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देश का नब्बे फीसदी उत्पादन लुधियाना में
ऑल इंडिया साइकिल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन-एकमा के प्रेसिडेंट आदित्य मुंजाल कहते हैं कि देश हर साल 1.6 करोड़ से लेकर 1.8 करोड़ साइकिलें बनाता है। इसमें लगभग 4000 पुर्जा निर्माता और 2000 से अधिक साइकिल निर्माता व असेंबलर शामिल हैं। उत्पादन का 90 प्रतिशत हिस्सा पंजाब के लुधियाना जिले में होता है जो इसे साइकिल नगरी के रूप में पहचान दिलाता है। इस उद्योग से सीधे तौर पर 10 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों परिवार इससे जुड़कर अपनी आजीविका चलाते हैं।
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निर्यात और वैश्विक पहचान
एकमा के सेक्रेटरी जनरल डाॅ. केबी ठाकुर का तर्क है कि भारत की साइकिलें और उसके पुर्जे आज विश्व के 150 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में निर्यात का आंकड़ा 347.94 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि चीन समेत अन्य 10 देशों से करीब 123.33 करोड़ रुपये का आयात भी हुआ है। डाॅ. केबी ठाकुर मानते हैं कि थोड़े और प्रयासों से भारत साइकिल निर्माण में पूरी दुनिया का मजबूत केंद्र बन सकता है।
साइकिल : सेहत और स्थायित्व का प्रतीक
आज साइकिल चलाना केवल साधारण सफर नहीं बल्कि सेहत और स्थायित्व की पहचान बन गया है। इससे प्रदूषण और ट्रैफिक जाम कम होते हैं। ऊर्जा की बचत होती है और सबसे अहम बात कि लोगों की फिटनेस बढ़ती है। यही वजह है कि साइकिल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) में से 17 में से 11 से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। यह हर वर्ग के लिए किफायती, समावेशी और पर्यावरण अनुकूल साधन है।
अवसर और नई दिशा
एवन साइकिल्स लिमिटेड के सीएमडी पद्मश्री ओंकार सिंह पाहवा कहते हैं कि देश के पास साइकिल उद्योग में वैश्विक नेतृत्व पाने का सुनहरा अवसर है। इसके लिए कुछ अहम कदम उठाने होंगे- जैसे जीएसटी दरों में सुधार और चोरी पर रोक, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना, गुणवत्ता मानकों का अनिवार्य पालन, सुरक्षित साइकिल लेन का निर्माण और केंद्र सरकार के अधीन साइकिल विकास परिषद का पुनर्गठन इत्यादि शामिल हैं। इसके अलावा घरेलू बाजार में भी संभावना तेजी से बढ़ रही हैं। युवाओं में फिटनेस और स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता के कारण प्रीमियम और इलेक्ट्रिक साइकिलों की मांग लगातार बढ़ रही है।
साइकिल उद्योग क्यों है अहम?
-1.6 करोड़ से लेकर-1.8 करोड़ साइकिलें हर साल बनती हैं भारत में।
-90 प्रतिशत उत्पादन लुधियाना (पंजाब) में केंद्रित।
-10 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है।
-150 देशों को निर्यात, कारोबार 34,794 मिलियन रुपये।
-2030 तक चार गुना वृद्धि का लक्ष्य, 5.21 अरब डॉलर का होगा बाजार।
-पर्यावरण हितैषी : प्रदूषण और ट्रैफिक जाम में कमी।
-फिटनेस और सेहत को बढ़ावा, युवाओं में ई-बाइक की बढ़ती मांग।
-आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया से सीधा तालमेल।