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प्रधानमंत्री मोदी जी! बस एक ये बात मान जाइए, एक साल में जीडीपी 5 ट्रिलियन हो जाएगी
Thu, 18 Jun 2020 12:09 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, लुधियाना
अमर उजाला, लुधियाना
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jun 2020 12:09 PM IST
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ऑल इंडस्ट्री एंड ट्रेड फोरम चेयरमैन बदीश जिंदल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर जीएसटी के नाम पर रोज हो रही अरबों की लूट का खुलासा किया है। साथ ही सुझाव दिया है कि अगर इस लूट को बंद करना है तो प्रत्येक राज्य में एक सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति की जाए और भ्रष्ट अधिकारियों से सुझाव की जगह कारोबारियों से राय ली जाए। अगर केंद्र सरकार दोनों बातें मानती है तो जीडीपी को पांच
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ट्रिलियन डॉलर करने में एक साल ही लगेगा। जीएसटी भी एक साल में 12 लाख करोड़ से 24 लाख करोड़ हो जाएगा।
बदीश जिंदल ने बताया कि अधिकतर राज्यों में पेट्रोल डीजल और गाड़ियों को छोड़कर तीस फीसदी बिलिंग भी नहीं होती है। राज्य व अंतरराज्य स्तर पर पासर सक्रिय है, जोकि बिना बिल के माल को किसी भी जगह भेजते है। ज्यादातर राज्यों में भ्रष्ट अफसर बतौर पासर भूमिका अदा कर रहे है। जोकि दस हजार से लेकर पचास रुपये लेकर ट्रक को कही भी भेज सकते है। अगर कोई इन पासर के खिलाफ कोई आवाज उठाता है, तो उसे जेल भेज दिया जाता है या फिर मरवा ही दिया जाता है।
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जीएसटी इनपुट में हर रोज अरबों रुपये का खेल हो रहा है। जिस वस्तु का बिल बच जाए इन बिलों को कुछ फीसदी लेकर बेच दिया जाता है। इस बिल को खरीदने वाला सरकार से पूरा रिफंड वसूल करता है। यही काम आयात और निर्यात में भी हो रहा है। उदाहरण के तौर पर 12 फीसदी वाले साइकिल के पुर्जे 28 फीसदी ऑटो पार्ट में दिखाकर सरकार से पूरा जीएसटी रिफंड लिया जाता है। कुछ भ्रष्ट ट्रांसपोर्ट ने हर राज्य में अपने जाली जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवा रखा है, इसके आधार पर दो नंबर का माल कहीं भी भेजा रहा है।
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इन घपलों को रोकने के लिए जीएसटी काउंसिल कई बार बदलाव कर चुकी है। इसमें शामिल ज्यादातर लोग राजनीतिक है, जिन्हें यह पता नहीं संशोधन की जगह भ्रष्ट अफसरों के चरित्र में बदलाव करना होगा। जीएसटी की चोरी पकड़ा कोई मुश्किल काम नहीं है, लेकिन अफसोस की बात है जीएसटी काउंसिल बुरी तरह से नाकाम साबित हुई है। सकल घरेलू उत्पाद 2.30 लाख बिलियन से ऊपर है, अंतरराष्ट्रीय कारोबार 59 लाख करोड़ से भी ज्यादा है। इसमें 35 लाख करोड़ का निर्यात होता है। इसके बावजूद देश की कुल कर आय 12 लाख करोड़ से कम होना संदेहास्पद है।