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लुधियाना ट्रेन हादसा, करीब पौने घंटे तक शव पटरियों पर पड़े रहे

Sun, 04 Sep 2022 10:42 PM IST
Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Sun, 04 Sep 2022 10:42 PM IST
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Ludhiana train accident, dead bodies were lying on the tracks for about a quarter of an hour
लुधियाना रेल हादसे के बाद कार्रवाई करती जीआरपी। - फोटो : LUDHIANA
लुधियाना। लुधियाना के ढोलेवाल पुल के पास रविवार शाम हुए रेल हादसे ने लोगों को अमृतसर के जौड़ा फाटक हादसे की याद दिला दी। जिस तरह जौड़ा फाटक हादसे ने चंद सेकेंड में कई लोगों को मौत की नींद सुला दिया था, ठीक उसी तरह से इस हादसे में तीन लोग मौत के मुंह में समा गए। उनको अपनी जान बचाने का मौका तक नहीं मिला। हादसे के बाद चारों तरफ चीख पुकार मच गई। हड़बड़ी में लोग इधर उधर भागने लगे। जिस समय हादसा हुआ, उस वक्त पटरी के आसपास सैकड़ों लोगों की भीड़ थी। कब ट्रेन आई और कब तीन लोगों को रौंदकर चली गई, किसी को पता ही नहीं चला।
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तीन जिंदा इंसान चंद सेकेंड में लाश बनकर रह गए। वहीं आरपीएफ और जीआरपी का अमानवीय चेहरा भी सामने आया। मृतकों के शव करीब पौने घंटे तक पटरियों पर पड़े रहे और सूचना के बावजूद दोनों में से किसी भी सुरक्षा एजेंसी के मुलाजिम समय रहते मौके पर नहीं आए। हालांकि हादसे के तुरंत बाद ट्रेन के ड्राइवर ने लुधियाना स्टेशन पर मैसेज करके जानकारी दे दी थी। इसके बावजूद आरपीएफ और जीआरपी ने करीब 3 किलोमीटर का सफर तय करने में लगभग पौना घंटा लगा दिया। हालात यह थे कि हादसे के एक घंटे बाद भी जीआरपी लुधियाना के डीएसपी बलराम राणा पूरे घटनाक्रम से अंजान बने हुए थे।
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कोट
वैसे तो मैं ड्यूटी पर हूूं, लेकिन मुझे हादसे की जानकारी नहीं है। मुझे किसी ने बताया ही नहीं है। आप कन्फर्म करें। शायद आपको किसी ने गलत सूचना दी है।
बलराम राणा, डीएसपी, जीआरपी, लुधियाना।
आरपीएफ और जीआरपी की मिलीभगत से सजता था बाजार
लुधियाना शहर में पटरी किनारे बाजार सजना कोई नई बात नहीं है। पटरी किनारे सजने वाला बाजार पिछले कई साल से आरपीएफ और जीआरपी के लिए लाखों रुपये की मंथली का साधन बना हुआ था। यही कारण है कि इनको हटाने के दावे तो होते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। लुधियाना में फिल्लौर से लेकर साहनेवाल तक रेलवे लाइन किनारे कई जगह पर साप्ताहिक और रोजाना बाजार सज रहे हैं। इन जगहों पर रविवार और छुट्टी के दिन भारी भीड़ देखने को मिलती है। धूरी लाइन किनारे तो रोजाना सब्जी मंडी सजती है, जहां पर आए दिन कोई न कोई व्यक्ति ट्रेन की चपेट में आकर जान गंवाता है। फिर भी इन बाजारों को बंद करवाने के लिए उचित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
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