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लुधियाना सेंट्रल सीट: इस बार आसान नहीं आप की राह, दावेदारों की लंबी फेहरिस्त; विकास की धीमी रफ्तार पर सवाल
Tue, 08 Sep 2026 01:33 PM IST
Nivedita
विकास मल्होत्रा, संवाद, लुधियाना
विकास मल्होत्रा, संवाद, लुधियाना
Published by: Nivedita
Updated Tue, 08 Sep 2026 01:33 PM IST
सार
लुधियाना सेंट्रल सीट वर्ष 2012 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह हल्का पूर्वी क्षेत्र का हिस्सा था। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुरिंदर कुमार डावर ने 2012 और 2017 में लगातार दो बार यहां से जीत दर्ज की थी।
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लुधियाना सेंट्रल सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लुधियाना सेंट्रल विधानसभा सीट, जिसे कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता था, अब एक बहुकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ रही है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी के अशोक पराशर ने इस सीट पर जीत हासिल की।
उन्होंने कांग्रेस के लंबे समय से चले आ रहे एकछत्र राज को समाप्त किया। आगामी चुनाव में यह सीट फिर से दिलचस्प और कड़े संघर्ष का गवाह बन सकती है।
चुनावी इतिहास
लुधियाना सेंट्रल सीट वर्ष 2012 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह हल्का पूर्वी क्षेत्र का हिस्सा था। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुरिंदर कुमार डावर ने 2012 और 2017 में लगातार दो बार यहां से जीत दर्ज की थी। उन्होंने 2012 में 7,196 मतों के अंतर से और 2017 में 25,480 मतों की रिकॉर्ड जीत हासिल की थी। हालांकि, 2022 के चुनावों में राज्य के बदले राजनीतिक मिजाज ने सीट का इतिहास पलट दिया। आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अशोक पराशर (पप्पी) ने 32,789 वोट हासिल किए। उन्होंने पहली बार जीत का परचम लहराया।
भाजपा के गुरदेव शर्मा देबी 27,985 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। वहीं, सुरिंदर कुमार डावर 26,972 वोट पाकर तीसरे स्थान पर खिसक गए। पराशर एक कट्टर कांग्रेसी परिवार से आते हैं। उन्हें कांग्रेस से टिकट नहीं मिला था, जिसके बाद वे 2022 चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे।
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विकास के वादे और जमीनी हकीकत
लुधियाना सेंट्रल हल्का एक पुराना शहरी क्षेत्र है, जहां तंग गलियां और प्रमुख बाजार हैं, जिससे रोजाना नई चुनौतियां सामने आती हैं। आम आदमी पार्टी ने चुनाव से पहले हलके के विकास के कई वादे किए थे। सत्ता परिवर्तन के बाद कुछ बुनियादी जन-सुविधाओं पर काम शुरू हुआ, जिसमें 300 यूनिट मुफ्त बिजली योजना और आम आदमी क्लीनिक शामिल हैं।
मानसून के दौरान जलभराव से प्रभावित धोका मोहल्ला और रंजीत पार्क में पानी निकासी के प्रयास किए गए। सत्तापक्ष की बात की जाए तो दावा किया जाता है कि इलाके में काफी विकास हुआ है और इलाके की नुहार बदली गई है। वहीं कांग्रेसी पार्षद अरुण शर्मा ने कहा, पांच साल में ढोका मोहल्ले से बरसाती पानी की निकासी का हल नहीं हुआ।
व्यापारियों की समस्याएं
होजरी, टेक्सटाइल और रिटेल व्यापार के विश्व प्रसिद्ध केंद्र लुधियाना सेंट्रल की मुख्य समस्याएं बनी हुई हैं। चौड़ा बाजार और फील्ड गंज जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में पार्किंग की कमी है, जिससे निरंतर यातायात जाम लगता है। यह स्थानीय कारोबार की रफ्तार रोक रहा है। औद्योगिक तबका अब भी जटिल कर प्रक्रियाओं और प्रशासनिक ढील से निजात पाने का इंतजार कर रहा है। शहर के बीचों-बीच गुजरने वाले बुड्ढा नाले से असहनीय दुर्गंध उठती है। पुरानी सीवरेज लाइनें लगातार जाम रहती हैं। व्यापारिक इलाके में छीना-झपटी और चोरी की बढ़ती घटनाएं भी लोगों के लिए चिंता का विषय हैं।
आगामी चुनाव में दावेदार
विधायक अशोक पराशर की सक्रियता ने सत्ताधारी दल के कार्यकर्ता में नई जान फूंकी है, पर विपक्षी दल विकास कार्यों की सुस्त रफ्तार को लेकर हमलावर हैं। पराशर ने सौ प्रतिशत वादे पूरे नहीं किए हैं, फिर भी वह आम आदमी पार्टी के प्रमुख दावेदारों में से एक हैं।
हालांकि, लोकसभा और नगर निगम चुनावों में उनके प्रदर्शन के कारण पार्टी उम्मीदवार बदलने पर विचार कर सकती है। सेंट्रल सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है। कांग्रेस की तरफ से सुरिंदर कुमार डावर, पार्षद अरुण शर्मा और श्याम सुंदर मल्होत्रा दावेदार हैं। भाजपा की तरफ से गुरदेव शर्मा देबी, प्रवीण बांसल और पार्षद गौरवजीत सिंह गोरा प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। इस विधानसभा क्षेत्र ने कभी किसी महिला विधायक को नहीं चुना है, और आगामी मुकाबला बेहद दिलचस्प होने के आसार हैं।
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उन्होंने कांग्रेस के लंबे समय से चले आ रहे एकछत्र राज को समाप्त किया। आगामी चुनाव में यह सीट फिर से दिलचस्प और कड़े संघर्ष का गवाह बन सकती है।
चुनावी इतिहास
लुधियाना सेंट्रल सीट वर्ष 2012 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह हल्का पूर्वी क्षेत्र का हिस्सा था। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुरिंदर कुमार डावर ने 2012 और 2017 में लगातार दो बार यहां से जीत दर्ज की थी। उन्होंने 2012 में 7,196 मतों के अंतर से और 2017 में 25,480 मतों की रिकॉर्ड जीत हासिल की थी। हालांकि, 2022 के चुनावों में राज्य के बदले राजनीतिक मिजाज ने सीट का इतिहास पलट दिया। आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अशोक पराशर (पप्पी) ने 32,789 वोट हासिल किए। उन्होंने पहली बार जीत का परचम लहराया।
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भाजपा के गुरदेव शर्मा देबी 27,985 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। वहीं, सुरिंदर कुमार डावर 26,972 वोट पाकर तीसरे स्थान पर खिसक गए। पराशर एक कट्टर कांग्रेसी परिवार से आते हैं। उन्हें कांग्रेस से टिकट नहीं मिला था, जिसके बाद वे 2022 चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे।
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विकास के वादे और जमीनी हकीकत
लुधियाना सेंट्रल हल्का एक पुराना शहरी क्षेत्र है, जहां तंग गलियां और प्रमुख बाजार हैं, जिससे रोजाना नई चुनौतियां सामने आती हैं। आम आदमी पार्टी ने चुनाव से पहले हलके के विकास के कई वादे किए थे। सत्ता परिवर्तन के बाद कुछ बुनियादी जन-सुविधाओं पर काम शुरू हुआ, जिसमें 300 यूनिट मुफ्त बिजली योजना और आम आदमी क्लीनिक शामिल हैं।
मानसून के दौरान जलभराव से प्रभावित धोका मोहल्ला और रंजीत पार्क में पानी निकासी के प्रयास किए गए। सत्तापक्ष की बात की जाए तो दावा किया जाता है कि इलाके में काफी विकास हुआ है और इलाके की नुहार बदली गई है। वहीं कांग्रेसी पार्षद अरुण शर्मा ने कहा, पांच साल में ढोका मोहल्ले से बरसाती पानी की निकासी का हल नहीं हुआ।
व्यापारियों की समस्याएं
होजरी, टेक्सटाइल और रिटेल व्यापार के विश्व प्रसिद्ध केंद्र लुधियाना सेंट्रल की मुख्य समस्याएं बनी हुई हैं। चौड़ा बाजार और फील्ड गंज जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में पार्किंग की कमी है, जिससे निरंतर यातायात जाम लगता है। यह स्थानीय कारोबार की रफ्तार रोक रहा है। औद्योगिक तबका अब भी जटिल कर प्रक्रियाओं और प्रशासनिक ढील से निजात पाने का इंतजार कर रहा है। शहर के बीचों-बीच गुजरने वाले बुड्ढा नाले से असहनीय दुर्गंध उठती है। पुरानी सीवरेज लाइनें लगातार जाम रहती हैं। व्यापारिक इलाके में छीना-झपटी और चोरी की बढ़ती घटनाएं भी लोगों के लिए चिंता का विषय हैं।
आगामी चुनाव में दावेदार
विधायक अशोक पराशर की सक्रियता ने सत्ताधारी दल के कार्यकर्ता में नई जान फूंकी है, पर विपक्षी दल विकास कार्यों की सुस्त रफ्तार को लेकर हमलावर हैं। पराशर ने सौ प्रतिशत वादे पूरे नहीं किए हैं, फिर भी वह आम आदमी पार्टी के प्रमुख दावेदारों में से एक हैं।
हालांकि, लोकसभा और नगर निगम चुनावों में उनके प्रदर्शन के कारण पार्टी उम्मीदवार बदलने पर विचार कर सकती है। सेंट्रल सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है। कांग्रेस की तरफ से सुरिंदर कुमार डावर, पार्षद अरुण शर्मा और श्याम सुंदर मल्होत्रा दावेदार हैं। भाजपा की तरफ से गुरदेव शर्मा देबी, प्रवीण बांसल और पार्षद गौरवजीत सिंह गोरा प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। इस विधानसभा क्षेत्र ने कभी किसी महिला विधायक को नहीं चुना है, और आगामी मुकाबला बेहद दिलचस्प होने के आसार हैं।