{"_id":"e744101cecb995252777085bda6b0d87","slug":"land-of-village-will-not-acquire-forcibly-tiwari","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं करने देंगे जमीन का जबरन अधिग्रहण : तिवारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं करने देंगे जमीन का जबरन अधिग्रहण : तिवारी
अमर उजाला,लुधियाना
Updated Mon, 25 Nov 2013 03:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लुधियाना। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने इंडस्ट्रियल पार्क व टाऊनशिप के नाम पर जमीन का जबरन अधिग्रहण न करने की पंजाब सरकार को सख्त चेतावनी दी है। ये जमीन सिधवां नहर, उत्तरी बाईपास के साथ लगते नौ गांवों की है।
तिवारी ने इंडस्ट्रियल पार्क बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण करने के संबंध में दिए जा रहे तर्क पर कहा है कि वर्तमान इंडस्ट्रियल एरिया व इंडस्ट्रियल फोकल प्वाइंट अपनी बुरी हालत पर रो रहे हैं और इंडस्ट्री पलायन कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार के लिए जमीन अधिग्रहण करना जरूरी है, तो फिर जमीन को कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार द्वारा संसद के बीते सत्र में पास किए नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत क्यों नहीं अधिग्रहण किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने उजागर सिंह गिल के नेतृत्व वाले 9 गांवों के शिष्टमंडल को भरोसा दिया कि वह राज्य सरकार को उनकी जमीनों का जबरदस्ती अधिग्रहण नहीं करने देंगे। सभी जमीनों को स्थानीय लोगों की रजामंदी व नए भूमि अधिग्रहण कानून के नियमों के तहत ही प्राप्त करना होगा। केंद्रीय मंत्री ने खुलासा किया कि इन 9 गांवों के किसानों को पुराने 1894 में पास किए गए कानून के तहत भूमि अधिग्रहण के नोटिस भेजे गए हैं, जबकि नया किसान हितैषी कानून पहले ही पास किया जा चुका है।
विज्ञापन
जिससे स्पष्ट होता है कि किसानों को नए कानून का फायदा नहीं लेने दिया जा रहा है। तिवारी ने हैरानी जाहिर की है कि कैसे खुद को किसानों की हितैषी कहने वाली एक सरकार उनको नए कानून के तहत मिलने वाले फायदों से अलग कर रही है? नए कानून के तहत सरकार ग्रामीण क्षेत्र में पड़ने वाली जमीन का किसानों को मार्केट रेट का चार गुणा मुआवजा देने के लिए वचनबद्ध है। (शहरी इलाकों के लिए यह मुआवजा मार्केट रेट का दोगुना है) इसके अलावा, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने से पहले इन जमीनों के 80 फीसदी मालिकों की रजामंदी लेनी जरूरी है।
विज्ञापन
तिवारी ने इंडस्ट्रियल पार्क बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण करने के संबंध में दिए जा रहे तर्क पर कहा है कि वर्तमान इंडस्ट्रियल एरिया व इंडस्ट्रियल फोकल प्वाइंट अपनी बुरी हालत पर रो रहे हैं और इंडस्ट्री पलायन कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार के लिए जमीन अधिग्रहण करना जरूरी है, तो फिर जमीन को कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार द्वारा संसद के बीते सत्र में पास किए नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत क्यों नहीं अधिग्रहण किया जा रहा है।
विज्ञापन
केंद्रीय मंत्री ने उजागर सिंह गिल के नेतृत्व वाले 9 गांवों के शिष्टमंडल को भरोसा दिया कि वह राज्य सरकार को उनकी जमीनों का जबरदस्ती अधिग्रहण नहीं करने देंगे। सभी जमीनों को स्थानीय लोगों की रजामंदी व नए भूमि अधिग्रहण कानून के नियमों के तहत ही प्राप्त करना होगा। केंद्रीय मंत्री ने खुलासा किया कि इन 9 गांवों के किसानों को पुराने 1894 में पास किए गए कानून के तहत भूमि अधिग्रहण के नोटिस भेजे गए हैं, जबकि नया किसान हितैषी कानून पहले ही पास किया जा चुका है।
विज्ञापन
जिससे स्पष्ट होता है कि किसानों को नए कानून का फायदा नहीं लेने दिया जा रहा है। तिवारी ने हैरानी जाहिर की है कि कैसे खुद को किसानों की हितैषी कहने वाली एक सरकार उनको नए कानून के तहत मिलने वाले फायदों से अलग कर रही है? नए कानून के तहत सरकार ग्रामीण क्षेत्र में पड़ने वाली जमीन का किसानों को मार्केट रेट का चार गुणा मुआवजा देने के लिए वचनबद्ध है। (शहरी इलाकों के लिए यह मुआवजा मार्केट रेट का दोगुना है) इसके अलावा, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने से पहले इन जमीनों के 80 फीसदी मालिकों की रजामंदी लेनी जरूरी है।