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Ludhiana News: ससराली में जमीन का कटाव जारी, प्रशासन ने मांगी सेना की मदद

Wed, 24 Sep 2025 10:37 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना Updated Wed, 24 Sep 2025 10:37 PM IST
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Land erosion continues in Sasrali, administration seeks army's help
संवाद न्यूज एजेंसी
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लुधियाना। गांव ससराली कॉलोनी में सतलुज दरिया का प्रकोप लगातार जारी है। पानी का तेज बहाव से जमीन में कटाव हो रहा है। इससे गांव के लोगों के साथ-साथ प्रशासन की चिंता भी बढ़ी हुई है। प्रशासन ने अब सरकार को पत्र लिख कर सेना की मदद मांगी है। प्रशासन ने तर्क दिया है कि सेना की मदद से पानी से हो रहे कटाव को रोका जा सकता है। इसके अलावा प्रशासन अपने तौर पर भी लगातार काम कर रहा है। प्रशासन ने तीन ठेकेदारों को काम दिया है। अब ससराली के धुस्सी बांध पर 24 घंटे काम हो रहा है ताकि जमीन में हो रहे कटाव को रोका जा सके।
ससराली में तेज बहाव के कारण बांध की हालत नाजुक हो चुकी है। प्रशासन द्वारा बनाए अस्थाई बांध तक पानी पहुंचने की आशंका है। सतलुज ने अपना रास्ता बदल लिया है जिससे किसानों के खेतों में लगातार कटाव हो रहा है। डीसी के आदेश पर एसडीएम जसलीन कौर ने सरकार को पत्र लिख कर सेना की मदद मांगी है ताकि बांधों को सही किया जा सके। जसलीन कौर ने बांध को सुरक्षित करने के लिए इंजीनियरिंग सहायता की मांग की है। उन्होंने लिखा है कि सतलुज में पानी के निरंतर प्रवाह के कारण मत्तेवाड़ा क्षेत्र में धुस्सी बांध के बाहर कृषि भूमि का लगातार कटाव हो रहा है। किसान अपनी कीमती जमीन खो रहे हैं। प्रशासन सभी मौजूदा संसाधनों का उपयोग कर रहा है लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना से तत्काल सहायता और इंजीनियरिंग विंग की तकनीकी टीम भेजने का अनुरोध किया गया है। बता दें कि बाढ़ का खतरा टलने के बाद एनजीओ व मददगार भी लौट चुके हैं लेकिन अब लाचार किसान रोज अपनी जमीनों को सतलुज में समाते हुए देख रहे हैं।
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कई पहलुओं पर किया जा रहा विचार
ससराली के धुस्सी बांध पर जमीन में हो रहे कटाव के चलते लगातार बैठकें की जा रही हैं। कार्य के कई पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। इनमें जालंधर की ओर पानी को विपरीत तट की ओर मोड़ने के लिए क्यूनेट और नदी के अंदर द्वीप के किनारे ड्रेजिंग करके पानी को लुधियाना के किनारे से दूर मोड़ना। प्रशासन ने ससराली साइट पर तीन प्रमुख ठेकेदारों को स्थानांतरित कर दिया गया है। उन्हें तीन अलग-अलग बिंदुओं पर काम करने के लिए कहा है। साइट पर 24 घंटे काम चल रहा है। स्थानीय लोग अब तकनीकी गतिविधियों के लिए साइट पर विभाग का सहयोग कर रहे हैं। इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान जालंधर की ओर से बड़े पैमाने पर गाद निकालना है।
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