{"_id":"04bb001b6e1e8abdaf563608cd34d25d","slug":"health-minister-complaint-phone-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सेहत मंत्री को शिकायती फोन के बाद सिविल अस्पताल में छापा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सेहत मंत्री को शिकायती फोन के बाद सिविल अस्पताल में छापा
ब्यूरो, अमर उजाला/मंडी गोबिंदगढ़
Updated Thu, 04 Feb 2016 10:09 PM IST
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सेहत मंत्री सुरजीत कुमार ज्याणी को एक व्यक्ति ने बुधवार को फोन करके मंडी गोबिंदगढ़ के सिविल अस्पताल में अनियमितताओं की शिकायत दी। इस पर सेहत मंत्री ज्याणी ने वीरवार सुबह सेहत विभाग के डिप्टी डायरेक्टर राकेश कुमार कश्यप को अस्पताल की मौजूदा स्थिति और वहां की खामियों की रिपोर्ट तैयार करके भेजने को कहा।
इसके बाद वीरवार सुबह डिप्टी डायरेक्टर ने सिविल अस्पताल में छापा मारा। डिप्टी डायरेक्टर ने एक के बाद एक सभी मरीज वार्डों, लैब, आपरेशन थिएटर, ओपीडी, इमरजेंसी, जनरल वार्ड और बाथरूम का दौरा किया उन्होंने सभी स्टाफ कर्मियों से उनको पेश आ रही समस्याओं के बारे में पूछा। उन्होंने कम पड़ रहे उपकरणों, दवाई और डस्टबिन तक चेक किए। इस मौके पर उनके साथ एसएमओ डॉ. भूपिंदर सिंह, डॉ. विनोद गुप्ता, डॉ. एमएस भसीन, महेश जिंदल और बली मोहम्मद मौजूद थे।
यह था मामला
बुधवार को सिविल अस्पताल में अपना ब्लड प्रेशर चेक करवाने गए सरवण कुमार को बताया गया कि इमरजेंसी में लगे बीपी ऑपरेटर काम नहीं कर रहे। अस्पताल में लाइट न होने की वजह से वह अपना ब्लड भी चेक नहीं करवा पाए। लैब अटेडेंट ने उन्हें लाइट आने के बाद ही कोई ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह दी। इस पर सरवण ने सेहत मंत्री को शिकायत दी।
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अस्पताल में मिलीं खामियां
अस्पताल में कई खामियां मिलीं। इनमें पुराने हो चुके बीपी आपरेटर का काम न करना, स्टाफ की कमी, सरकारी फंड की कमी, लैब में हीट एयर ओवन, इनवर्टर, खराब पड़े आरओ, कूलर, एग्जॉस्ट फैन और पानी के नल शामिल हैं। एक्सरे विभाग में तीन कर्मियों की पोस्टिंग है, लेकिन एक ही कर्मी मौजूद था, बाकी खाली पोस्ट हैं।
वहीं अस्पताल में पिछले महीने से शुरू की गई डिस्पेंसरी, जो अस्पताल के पीछे स्थित है, में ओपीडी की पर्ची न पहुंचने पर वहां के डॉ. महेश जिंदल ने डिस्पेंसरी को अस्पताल के बाकी विभागों के साथ ही तबदील करने की मांग की।
डिप्टी डायरेक्टर कश्यप ने माना कि अस्पताल में सरकारी फंड न होने से अनियमितताएं हैं।
उन्होंने एसएमओ भूपिंदर सिंह से लेकर पिछले साल अस्पताल की आईपीडी, ओपीडी, डिलीवरी केस और सिजेरियन यूजर्स चार्ज का सारा रिकार्ड मौके पर ही चेक किया। पिछले साल अस्पताल की ओपीडी में 65 हजार 507 मरीज आए, जिनमें डिलीवरी केस और रेफर केस अलग से हैं। अस्पताल की महीनावार आमदनी 150 लाख रुपये के आसपास है। उन्होंने अस्पताल के बैंक खाते में पड़े करीब 90 हजार रुपयों से अस्पताल के खराब हो चुके बीपी आपरेटर, आरओ, कूलर समेत लैब में इनवर्टर लगाने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि मामले की रिपोर्ट बनाकर डायरेक्टर हेल्थ को सौंप दी जाएगी।
फोटो कैप्शन:04जीबीजी01 से लेकर 04 में है।
फोटो01: एसएमओ दफ्तर पर अस्पताल में पाई गई खामियों की जानकारी लेते डिप्टी डायरेक्टर राकेश कश्यप व मौजूद एसएमओ भूपिंदर सिंह व अन्य डाक्टर।
फोटो02: अस्पताल के वार्डों का जायजा लेते हुए डिप्टी डायरेक्टर।
फोटो03: गौभक्त सरवण कुमार गर्ग।
फोटो04:डिप्टी डायरेक्टर राकेश कुमार कश्यप।
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इसके बाद वीरवार सुबह डिप्टी डायरेक्टर ने सिविल अस्पताल में छापा मारा। डिप्टी डायरेक्टर ने एक के बाद एक सभी मरीज वार्डों, लैब, आपरेशन थिएटर, ओपीडी, इमरजेंसी, जनरल वार्ड और बाथरूम का दौरा किया उन्होंने सभी स्टाफ कर्मियों से उनको पेश आ रही समस्याओं के बारे में पूछा। उन्होंने कम पड़ रहे उपकरणों, दवाई और डस्टबिन तक चेक किए। इस मौके पर उनके साथ एसएमओ डॉ. भूपिंदर सिंह, डॉ. विनोद गुप्ता, डॉ. एमएस भसीन, महेश जिंदल और बली मोहम्मद मौजूद थे।
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यह था मामला
बुधवार को सिविल अस्पताल में अपना ब्लड प्रेशर चेक करवाने गए सरवण कुमार को बताया गया कि इमरजेंसी में लगे बीपी ऑपरेटर काम नहीं कर रहे। अस्पताल में लाइट न होने की वजह से वह अपना ब्लड भी चेक नहीं करवा पाए। लैब अटेडेंट ने उन्हें लाइट आने के बाद ही कोई ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह दी। इस पर सरवण ने सेहत मंत्री को शिकायत दी।
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अस्पताल में मिलीं खामियां
अस्पताल में कई खामियां मिलीं। इनमें पुराने हो चुके बीपी आपरेटर का काम न करना, स्टाफ की कमी, सरकारी फंड की कमी, लैब में हीट एयर ओवन, इनवर्टर, खराब पड़े आरओ, कूलर, एग्जॉस्ट फैन और पानी के नल शामिल हैं। एक्सरे विभाग में तीन कर्मियों की पोस्टिंग है, लेकिन एक ही कर्मी मौजूद था, बाकी खाली पोस्ट हैं।
वहीं अस्पताल में पिछले महीने से शुरू की गई डिस्पेंसरी, जो अस्पताल के पीछे स्थित है, में ओपीडी की पर्ची न पहुंचने पर वहां के डॉ. महेश जिंदल ने डिस्पेंसरी को अस्पताल के बाकी विभागों के साथ ही तबदील करने की मांग की।
डिप्टी डायरेक्टर कश्यप ने माना कि अस्पताल में सरकारी फंड न होने से अनियमितताएं हैं।
उन्होंने एसएमओ भूपिंदर सिंह से लेकर पिछले साल अस्पताल की आईपीडी, ओपीडी, डिलीवरी केस और सिजेरियन यूजर्स चार्ज का सारा रिकार्ड मौके पर ही चेक किया। पिछले साल अस्पताल की ओपीडी में 65 हजार 507 मरीज आए, जिनमें डिलीवरी केस और रेफर केस अलग से हैं। अस्पताल की महीनावार आमदनी 150 लाख रुपये के आसपास है। उन्होंने अस्पताल के बैंक खाते में पड़े करीब 90 हजार रुपयों से अस्पताल के खराब हो चुके बीपी आपरेटर, आरओ, कूलर समेत लैब में इनवर्टर लगाने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि मामले की रिपोर्ट बनाकर डायरेक्टर हेल्थ को सौंप दी जाएगी।
फोटो कैप्शन:04जीबीजी01 से लेकर 04 में है।
फोटो01: एसएमओ दफ्तर पर अस्पताल में पाई गई खामियों की जानकारी लेते डिप्टी डायरेक्टर राकेश कश्यप व मौजूद एसएमओ भूपिंदर सिंह व अन्य डाक्टर।
फोटो02: अस्पताल के वार्डों का जायजा लेते हुए डिप्टी डायरेक्टर।
फोटो03: गौभक्त सरवण कुमार गर्ग।
फोटो04:डिप्टी डायरेक्टर राकेश कुमार कश्यप।