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सही इलाज होता तो मेरी बच्ची 50 साल जीती : इंदरप्रीत

Mon, 08 Feb 2016 10:09 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/अमलोह (फतेहगढ़ साहिब)
ब्यूरो, अमर उजाला/अमलोह (फतेहगढ़ साहिब) Updated Mon, 08 Feb 2016 10:09 PM IST
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harleen, death, case in court
स्टेम सेल डोनर के मुकरने के कारण हुई सात साल की बच्ची हरलीन कौर की मौत के मामले में सोमवार को अमलोह कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट में बयान देने के बाद हरलीन के पिता इंदरप्रीत सिंह ने कहा कि अगर सीएमसी के डॉ. जोसफ जोन उनकी बेटी के इलाज में कोताही न बरतते तो उनकी बेटी 50 साल और जिंदा रह सकती थी।
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उन्होंने कहा कि उनकी बेटी की मौत के जिम्मेदार डॉ. जोसफ, उनका चेन्नई वाला अज्ञात स्टेम सेल डोनर, स्टेम सेल देने वाली चेन्नई की कंपनी की सीईओ जानकी आनंद और कर्मी रघुनाथ गोपाल हैं। इंदरप्रीत सिंह ने कहा कि उन्हें अब तक पता नहीं चल पाया है कि उनकी बेटी को स्टेम सेल देने वाला आदमी कौन था। स्टेम सेल डोनर का प्रबंध चेन्नई की कंपनी ने किया था।
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अपनी बेटी के इलाज पर 32 लाख रुपये खर्च करने वाले इंदरप्रीत सिंह ने बताया कि चार अक्तूबर 2014 में हरलीन की मौत के बाद उन्होंने डॉ. जोसफ, अज्ञात डोनर, स्टेम सेल देने वाली कंपनी की सीईओ और कर्मी रघुनाथ गोपाल के खिलाफ अमलोह कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। सितंबर 2015 में डॉ. जोसफ ने अपनी जमानत करवा ली थी। वहीं डोनर, जानकी आनंद और रघुनाथ कभी कोर्ट में पेश नहीं हुए, जिस पर सोमवार को अमलोह कोर्ट ने तीनों आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए हैं।
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यह था मामला
अमलोह कोर्ट में सहायक सीनियर क्लर्क इंदरप्रीत सिंह की बेटी हरलीन कौर को जन्म से ही थैलेसीमिया (मेजर) की बीमारी थी। इस बीमारी से शरीर में खून बहुत कम हो जाता है और हर महीने नया खून चढ़वाना पड़ता है। मृतका के पिता के अनुसार सात साल की उम्र तक तो वह लुधियाना के डीएमसी अस्पताल में बेटी को खून चढ़वाते रहे। इसके बाद बीमारी के पुख्ता इलाज के लिए सीएमसी अस्पताल गए।

सीएमसी में थैलेसीमिया के स्पेशलिस्ट डॉ. जोसफ जोन ने इंदरपीत सिंह को हरलीन के स्टेम सेल बदलने और इस पर आने वाले करीब 32 से 50 लाख रुपये के खर्च के बारे में बताया। इंदरप्रीत सिंह ने बेटी की जिंदगी बचाने के लिए अपने विभाग से 20 लाख रुपये लोन लेकर बाकी पैसे अपनी जमा पूंजी से लेकर 32 लाख रुपये अस्पताल में जमा करवा दिया। इंदरप्रीत ने बताया कि उसकी बेटी को पांच आपरेशनों से गुजरना था। इसके लिए अस्पताल ने उनसे आठ लाख रुपये यह कहकर जमा करवा लिए कि चेन्नई से उन्होंने स्टेम सेल मंगवाने हैं।


हरलीन का इलाज शुरू हो गया। इस आपरेशन को 15 अक्तूबर 2015 को पूरा होना था। इसी दौरान डॉ. जोसफ ने कहा कि बच्ची को स्टेम सेल देने वाला व्यक्ति मुकर गया है और उनके द्वारा खर्च किए आठ लाख रुपये चेन्नई की कंपनी से वापस लिए जा रहे हैं। इससे पहले हरलीन को आपरेशन के लिए लाखों रुपयों की महंगी दवाएं दी गई थीं, इससे हरलीन की हालत बिगड़ गई। उसके सिर के बाल झड़ गए। दवा का असर इतना तेज था कि उसकी नसें फट गई। करीब 25 दिन तड़पने के बाद हरलीन की मौत हो गई। इसके बाद इंदरप्रीत ने अमलोह कोर्ट में चारों आरोपियों के खिलाफ याचिका दायर कर दी।



फोटो कैप्शन:08जीबीजी05 और 06 में है।
अपने माता-पिता के साथ मृतका हरलीन कौर की फाईल फोटो और हाशिए में मृतका हरलीन कौर।
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