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आठ साल में बीस पदक, नौकरी फिर भी नहीं
ब्यूरो, अमर उजाला/लुधियाना
Updated Sun, 20 Dec 2015 09:46 PM IST
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गुरदासपुर के गुरबाज सिंह साइकिलिंग में अब तक बीस पदक जीत चुके हैं, लेकिन आज तक नौकरी नहीं मिली। उनके अनुसार खेल ही कमाई का जरिया है। प्रतियोगिताओं में जो इनाम राशि मिलती है उसी के दम पर घर का गुजारा चल रहा है। नौकरी के लिए कई बार आवेदन किए लेकिन सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिला।
गुरबाज ने 2007 में साइकिलिंग शुरू की थी और अब तक वह करीब बीस पदक हासिल कर चुका है। यह होनहार खिलाड़ी 2011 से नौकरी के लिए वित्तमंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा से गुहार लगा रहा है। पीएयू में चल रही 68वीं नेशनल ट्रैक साइकिलिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेने पहुंचे गुरबाज के मुताबिक लगातार मेडल हासिल करने के बाद भी अगर सरकार की ओर से नौकरी न दी जाए तो हौसला टूट जाता है। सरकार को चाहिए कि वह खिलाड़ियों को नौकरियां दे ताकि वह खेलों की ओर बढ़े। 2011 में नौकरी के लिए कहा गया। ढींढसा से भी कई बार मिले, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं दिया गया।
गुरबाज सिंह ने बताया कि वह अमृतसर में कोच राजेश से ट्रेनिंग ले रहे हैं और अमृतसर में अपने मामा के पास रहते हैं। पिता सविंदर सिंह गुरदासपुर में खेती करते हैं। गरीब परिवार से संबंधित गुरबाज ने बताया कि वह 2007 से साइकिलिंग में नेशनल स्तर पर मेडल हासिल करता आ रहा है। 2013 में मणिपुर में हुए नेशनल गेम्स में एक किलोमीटर टाइम ट्रायल में 1.93 सेकेंड और केरल में 2014 में हुए नेशनल गेम्स में एक किलोमीटर टीम स्प्रीट रेस 1.6 सेकेंड में पूरी कर रिकार्ड कायम किया है, जो अब भी बरकरार है।
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गुरबाज ने 2007 में साइकिलिंग शुरू की थी और अब तक वह करीब बीस पदक हासिल कर चुका है। यह होनहार खिलाड़ी 2011 से नौकरी के लिए वित्तमंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा से गुहार लगा रहा है। पीएयू में चल रही 68वीं नेशनल ट्रैक साइकिलिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेने पहुंचे गुरबाज के मुताबिक लगातार मेडल हासिल करने के बाद भी अगर सरकार की ओर से नौकरी न दी जाए तो हौसला टूट जाता है। सरकार को चाहिए कि वह खिलाड़ियों को नौकरियां दे ताकि वह खेलों की ओर बढ़े। 2011 में नौकरी के लिए कहा गया। ढींढसा से भी कई बार मिले, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं दिया गया।
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गुरबाज सिंह ने बताया कि वह अमृतसर में कोच राजेश से ट्रेनिंग ले रहे हैं और अमृतसर में अपने मामा के पास रहते हैं। पिता सविंदर सिंह गुरदासपुर में खेती करते हैं। गरीब परिवार से संबंधित गुरबाज ने बताया कि वह 2007 से साइकिलिंग में नेशनल स्तर पर मेडल हासिल करता आ रहा है। 2013 में मणिपुर में हुए नेशनल गेम्स में एक किलोमीटर टाइम ट्रायल में 1.93 सेकेंड और केरल में 2014 में हुए नेशनल गेम्स में एक किलोमीटर टीम स्प्रीट रेस 1.6 सेकेंड में पूरी कर रिकार्ड कायम किया है, जो अब भी बरकरार है।
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