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हलवारा एयरपोर्ट पर हवाई सेवा फिर रद्द: छह दिन में तीसरी बार हुई प्रभावित, दिल्ली जाने वाले 102 यात्री परेशान
Sat, 12 Sep 2026 08:29 AM IST
Nivedita
कंवरपाल, संवाद, हलवारा
कंवरपाल, संवाद, हलवारा
Published by: Nivedita
Updated Sat, 12 Sep 2026 08:29 AM IST
सार
छह दिन में तीसरी बार दिल्ली-हलवारा-दिल्ली सेवा बाधित हुई है। इससे पहले 7 सितंबर और 9 सितंबर को भी उड़ान रद्द हो चुकी है।
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हलवारा एयरपोर्ट
- फोटो : संवाद
विस्तार
हलवारा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से हवाई सफर का सपना यात्रियों के लिए सुविधा के बजाय परेशानी बनता जा रहा है।
शनिवार सुबह दिल्ली-हलवारा-दिल्ली हवाई सेवा फिर रद्द हो गई। छह दिन में तीसरी बार उड़ान रद्द होने से एयरपोर्ट पर 102 यात्री घंटों परेशान रहे। इनमें बड़ी संख्या उन यात्रियों की थी, जिन्होंने दिल्ली से आगे विदेश जाने के लिए कनेक्टिंग फ्लाइटें बुक कर रखी थीं। उड़ान रद्द होने से किसी की विदेश यात्रा प्रभावित हुई तो किसी की पढ़ाई और कारोबार से जुड़े जरूरी कार्यक्रमों पर संकट खड़ा हो गया।
शनिवार को दिल्ली से हलवारा आने वाली एयर इंडिया की एआई-481 उड़ान हलवारा फिर नहीं पहुंची। इसी विमान को यहां से यात्रियों को लेकर एआई-482 बनकर दिल्ली वापस जाना था। विमान के नहीं पहुंचने से यह उड़ान रद्द हो गई। नतीजा यह रहा कि सुबह-सुबह बड़ी संख्या में यात्री सामान समेत एयरपोर्ट पहुंचने के बाद खुद को असहाय स्थिति में पाते रहे।
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शनिवार सुबह दिल्ली-हलवारा-दिल्ली हवाई सेवा फिर रद्द हो गई। छह दिन में तीसरी बार उड़ान रद्द होने से एयरपोर्ट पर 102 यात्री घंटों परेशान रहे। इनमें बड़ी संख्या उन यात्रियों की थी, जिन्होंने दिल्ली से आगे विदेश जाने के लिए कनेक्टिंग फ्लाइटें बुक कर रखी थीं। उड़ान रद्द होने से किसी की विदेश यात्रा प्रभावित हुई तो किसी की पढ़ाई और कारोबार से जुड़े जरूरी कार्यक्रमों पर संकट खड़ा हो गया।
शनिवार को दिल्ली से हलवारा आने वाली एयर इंडिया की एआई-481 उड़ान हलवारा फिर नहीं पहुंची। इसी विमान को यहां से यात्रियों को लेकर एआई-482 बनकर दिल्ली वापस जाना था। विमान के नहीं पहुंचने से यह उड़ान रद्द हो गई। नतीजा यह रहा कि सुबह-सुबह बड़ी संख्या में यात्री सामान समेत एयरपोर्ट पहुंचने के बाद खुद को असहाय स्थिति में पाते रहे।
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कनेक्टिंग फ्लाइट के लिए पहुंचे थे, सामान फिर कार में लादकर लौटे
सबसे ज्यादा परेशानी उन 65 यात्रियों को हुई, जिन्हें दिल्ली से आगे विदेशों की फ्लाइट पकड़नी थी और उनके साथ छोटे छोटे बच्चे भी थे। कई परिवार बड़े-बड़े अटैची और कई बैग लेकर हलवारा एयरपोर्ट पहुंचे थे। उड़ान रद्द होने का पता चलने के बाद उन्हें अपना पूरा सामान दोबारा वाहनों में लादना पड़ा और बैरंग लौटना पड़ा।
यात्रियों ने बताया कि उन्हें उड़ान रद्द होने की जानकारी समय पर नहीं मिली। एयर इंडिया की ओर से कहा गया कि रात करीब साढ़े तीन बजे ईमेल भेजकर यात्रियों को सूचना दी गई थी। यात्रियों का सवाल था कि जब उड़ान सुबह होनी थी तो दो घंटे पहले भेजी गई ईमेल का क्या फायदा, उस समय यात्री एयरपोर्ट पहुंचने की तैयारी करें या मोबाइल पर ईमेल देखते रहें।
किसी ने दोपहर की उड़ान पकड़ी, किसी ने बदली यात्रा की तारीख
उड़ान रद्द होने के बाद यात्रियों के सामने विकल्प बेहद सीमित रह गए। कुछ यात्रियों ने दोपहर की एआई-484 उड़ान में सीट पाने की कोशिश की और सीट मिलने पर वेटिंग हॉल में बैठकर अगली उड़ान का इंतजार किया। कुछ यात्रियों ने अपनी यात्रा की तारीख बदल दी, जबकि जरूरी काम से दिल्ली जाने वाले कई यात्री मजबूरी में सड़क मार्ग से रवाना हुए।
लेकिन जिन यात्रियों की दिल्ली से आगे कनेक्टिंग इंटरनेशनल फ्लाइट थी, उनके लिए मामला केवल दिल्ली पहुंचने तक सीमित नहीं था। एक उड़ान रद्द होने का असर उनकी पूरी यात्रा पर पड़ने का खतरा पैदा हो गया।
सबसे ज्यादा परेशानी उन 65 यात्रियों को हुई, जिन्हें दिल्ली से आगे विदेशों की फ्लाइट पकड़नी थी और उनके साथ छोटे छोटे बच्चे भी थे। कई परिवार बड़े-बड़े अटैची और कई बैग लेकर हलवारा एयरपोर्ट पहुंचे थे। उड़ान रद्द होने का पता चलने के बाद उन्हें अपना पूरा सामान दोबारा वाहनों में लादना पड़ा और बैरंग लौटना पड़ा।
यात्रियों ने बताया कि उन्हें उड़ान रद्द होने की जानकारी समय पर नहीं मिली। एयर इंडिया की ओर से कहा गया कि रात करीब साढ़े तीन बजे ईमेल भेजकर यात्रियों को सूचना दी गई थी। यात्रियों का सवाल था कि जब उड़ान सुबह होनी थी तो दो घंटे पहले भेजी गई ईमेल का क्या फायदा, उस समय यात्री एयरपोर्ट पहुंचने की तैयारी करें या मोबाइल पर ईमेल देखते रहें।
किसी ने दोपहर की उड़ान पकड़ी, किसी ने बदली यात्रा की तारीख
उड़ान रद्द होने के बाद यात्रियों के सामने विकल्प बेहद सीमित रह गए। कुछ यात्रियों ने दोपहर की एआई-484 उड़ान में सीट पाने की कोशिश की और सीट मिलने पर वेटिंग हॉल में बैठकर अगली उड़ान का इंतजार किया। कुछ यात्रियों ने अपनी यात्रा की तारीख बदल दी, जबकि जरूरी काम से दिल्ली जाने वाले कई यात्री मजबूरी में सड़क मार्ग से रवाना हुए।
लेकिन जिन यात्रियों की दिल्ली से आगे कनेक्टिंग इंटरनेशनल फ्लाइट थी, उनके लिए मामला केवल दिल्ली पहुंचने तक सीमित नहीं था। एक उड़ान रद्द होने का असर उनकी पूरी यात्रा पर पड़ने का खतरा पैदा हो गया।
10-12 हजार तक टैक्सी किराया, हवाई सफर से ज्यादा सड़क का खर्च
उड़ान रद्द होने के बाद दिल्ली पहुंचने के लिए यात्रियों को महंगी टैक्सियों का सहारा लेना पड़ा। यात्रियों के अनुसार, हलवारा और सुधार बाजार से दिल्ली जाने के लिए टैक्सी का किराया कई मामलों में 10 से 12 हजार रुपये तक पहुंच गया। वन-वे टैक्सी के लिए भी करीब 5,000 से 5,500 रुपये तक मांगे जाने की बात यात्रियों ने कही।
यात्रियों का कहना है कि जब हवाई टिकट का खर्च पहले ही किया जा चुका हो, ऐसे में अचानक हजारों रुपये का अतिरिक्त सड़क परिवहन खर्च आम परिवार के बजट पर भारी पड़ता है। कई यात्रियों ने आरोप लगाया कि मजबूरी का फायदा उठाकर टैक्सी संचालक भी मनमाना किराया वसूल रहे हैं।
एक ही विमान के भरोसे पूरी सेवा, विमान नहीं आया तो दोनों उड़ानें बंद
हलवारा-दिल्ली हवाई सेवा की सबसे बड़ी कमजोरी अब यात्रियों के सामने खुलकर आने लगी है। इस रूट की दोनों दिशाओं की उड़ानें एक ही विमान के रोटेशन पर निर्भर हैं। दिल्ली से आने वाला विमान ही हलवारा से यात्रियों को लेकर वापस दिल्ली जाता है।
ऐसे में दिल्ली से विमान हलवारा नहीं पहुंचा तो यहां से दिल्ली जाने वाली उड़ान के पास भी कोई विकल्प नहीं बचता। शनिवार को भी यही हुआ। एआई-481 नहीं आई तो एआई-482 भी उड़ान नहीं भर सकी।
यात्रियों का सवाल है कि यदि एक विमान की तकनीकी या संचालन संबंधी समस्या से पूरा रूट ठप हो सकता है, तो एयरलाइन और एयरपोर्ट प्रबंधन ने वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं बनाई?
सात और नौ सितंबर को भी रद्द हुई थी उड़ान
यह छह दिन में तीसरी बार है जब दिल्ली-हलवारा-दिल्ली सेवा बाधित हुई है। इससे पहले 7 सितंबर और 9 सितंबर को भी उड़ान रद्द हो चुकी है। इससे पहले तकनीकी कारणों से उड़ान में देरी के चलते यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा था।
सुविधा देने वाला एयरपोर्ट कहीं नई परेशानी का कारण न बन जाए
हलवारा एयरपोर्ट से उड़ान शुरू होने के बाद यात्रियों को उम्मीद थी कि लुधियाना और आसपास के लोगों को दिल्ली जाने के लिए सड़क मार्ग की लंबी यात्रा से राहत मिलेगी। लेकिन यदि सप्ताह में कई बार उड़ानें रद्द होती रहीं और यात्रियों को आखिरी समय पर टैक्सी या सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ा, तो हवाई सेवा का मूल उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाएगा।
उड़ान रद्द होने के बाद दिल्ली पहुंचने के लिए यात्रियों को महंगी टैक्सियों का सहारा लेना पड़ा। यात्रियों के अनुसार, हलवारा और सुधार बाजार से दिल्ली जाने के लिए टैक्सी का किराया कई मामलों में 10 से 12 हजार रुपये तक पहुंच गया। वन-वे टैक्सी के लिए भी करीब 5,000 से 5,500 रुपये तक मांगे जाने की बात यात्रियों ने कही।
यात्रियों का कहना है कि जब हवाई टिकट का खर्च पहले ही किया जा चुका हो, ऐसे में अचानक हजारों रुपये का अतिरिक्त सड़क परिवहन खर्च आम परिवार के बजट पर भारी पड़ता है। कई यात्रियों ने आरोप लगाया कि मजबूरी का फायदा उठाकर टैक्सी संचालक भी मनमाना किराया वसूल रहे हैं।
एक ही विमान के भरोसे पूरी सेवा, विमान नहीं आया तो दोनों उड़ानें बंद
हलवारा-दिल्ली हवाई सेवा की सबसे बड़ी कमजोरी अब यात्रियों के सामने खुलकर आने लगी है। इस रूट की दोनों दिशाओं की उड़ानें एक ही विमान के रोटेशन पर निर्भर हैं। दिल्ली से आने वाला विमान ही हलवारा से यात्रियों को लेकर वापस दिल्ली जाता है।
ऐसे में दिल्ली से विमान हलवारा नहीं पहुंचा तो यहां से दिल्ली जाने वाली उड़ान के पास भी कोई विकल्प नहीं बचता। शनिवार को भी यही हुआ। एआई-481 नहीं आई तो एआई-482 भी उड़ान नहीं भर सकी।
यात्रियों का सवाल है कि यदि एक विमान की तकनीकी या संचालन संबंधी समस्या से पूरा रूट ठप हो सकता है, तो एयरलाइन और एयरपोर्ट प्रबंधन ने वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं बनाई?
सात और नौ सितंबर को भी रद्द हुई थी उड़ान
यह छह दिन में तीसरी बार है जब दिल्ली-हलवारा-दिल्ली सेवा बाधित हुई है। इससे पहले 7 सितंबर और 9 सितंबर को भी उड़ान रद्द हो चुकी है। इससे पहले तकनीकी कारणों से उड़ान में देरी के चलते यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा था।
सुविधा देने वाला एयरपोर्ट कहीं नई परेशानी का कारण न बन जाए
हलवारा एयरपोर्ट से उड़ान शुरू होने के बाद यात्रियों को उम्मीद थी कि लुधियाना और आसपास के लोगों को दिल्ली जाने के लिए सड़क मार्ग की लंबी यात्रा से राहत मिलेगी। लेकिन यदि सप्ताह में कई बार उड़ानें रद्द होती रहीं और यात्रियों को आखिरी समय पर टैक्सी या सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ा, तो हवाई सेवा का मूल उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाएगा।