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कोरोना का कहर : श्मशानघाट से लेकर अस्पताल तक में वेटिंग

Sat, 01 May 2021 10:46 PM IST
Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Sat, 01 May 2021 10:46 PM IST
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Corona's havoc: waiting from hospital to cremation land
कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने पंजाब के औद्योगिक शहर के हालात को बदतर बना दिया है। हालात इस कदर बेकाबू हो रहे हैं कि लोगों को अस्पताल में बेड के लिए और शमशानघाट में अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। जिला लुधियाना में कोरोना संक्रमित लेवल टू (जिन्हें आक्सीजन बेड) के लिए कुल 1474 बेड बनाए गए है, एक मई की दोपहर तक इसमें 1183 बेड फुल हो चुके हैं। अब महज 291 बेड ही खाली बचे हैं।
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अगर लेवल थ्री (वेंटिलेटर बेड) की बात करें तो जिला भर में कुल 485 बेड की सुविधा है, एक मई दोपहर तक इसमें 482 बेड भर चुके हैं केवल तीन बेड ही खाली बचे हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले दिनों में हालात कितने बदतर हो सकते हैं।
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यह हाल तो अस्पताल का है, शमशान घाट के हालात भी कुछ इसी तरह के हैं, सुबह से लेकर रात तक चिताएं जल रही हैं, लोगों को अंतिम संस्कार के लिए भी इंतजार करना पड़ रहा है।
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गौरतलब है मेडिकल में कोरोना संक्रमण को तीन चरणों में रखा गया है। इसमें पहले चरण को एल वन इसमें संक्रमण के मामूली केसों को रखा जाता है, जिन्हें घर बैठकर दवाओं से ठीक किया जा सकता है। दूसरी एल टू श्रेणी में जिन मरीजों को गंभीर संक्रमण के चलते आक्सीजन की जरूरत पड़ती है। सबसे आखिरी श्रेणी है एल थ्री, इसमें मरीज को आईसीयू के साथ वेंटिलेंटर पर रखा जाता है। कोरोना महामारी में एल टू और एल थ्री श्रेणी के लिए जिला भर में कुल 1959 बेड की सुविधा है। इसमें 1665 बेड इस समय फुल हैं। सबसे गंभीर बात है कि एल थ्री के सिर्फ तीन बेड ही बचे हैं। लुधियाना में पूरे पंजाब, हिमाचल, जम्मू कश्मीर और हरियाणा से भी मरीज पहुंच रहे हैं।
अस्पताल में क्षमता से ज्यादा भर्ती एल थ्री मरीज
महानगर के कई अस्पताल में हालात इस कदर बन चुके हैं कि क्षमता से ज्यादा मरीजों को भर्ती किया गया है। अगर डीएमसी लुधियाना की बात करें तो यहां पर एल थ्री के 140 बेड है, लेकिन किसी तरह अस्पताल ने अपनी क्षमता का विस्तार कर 151 मरीजों को भर्ती किया है। एसपीएस अस्पताल में 22 की क्षमता है लेकिन यहां पर भी 37 मरीज भर्ती हैं। अरोड़ा न्यूरो में 10 की क्षमता होने के बावजूद 14 मरीज हैं, सिद्धू अस्पताल में 12 की जगह पर 30 मरीज, पंचम अस्पताल में 15 की जगह है जबकि उपचार 20 का चल रहा है। जीटीबी अस्पताल में 16 की जगह 17 मरीज हैं, मेडिवेज में भी 14 बेड की क्षमता है, यहां पर 15 मरीज भर्ती हैं। माहल मल्टी स्पेशिलिटी में 17 एल थ्री मरीज भर्ती हैं, यहां पर क्षमता सात की थी।
कई अस्पताल में एल टू के मरीज बेड से ज्यादा
कोरोना महामारी के दौरान ज्यादातर लोग सरकारी जगह निजी अस्पताल में जाने को पहल दे रहे हैं, क्योंकि सरकारी अस्पताल में सुविधाएं सही से नहीं मिलती है। यही कारण है कि निजी अस्पताल में एल टू बेड से ज्यादा मरीज भर्ती हो रहे हैं। मोहन देई अस्पताल में एल टू मरीजों के लिए 56 बेड हैं, लेकिन इस समय यहां पर 92 लोगों का उपचार चल रहा है। मरीजों की संख्या को देखते किसी तरह इन्होंने अपने बेड की संख्या को बढ़ाया है। इसी तरह रघुनाथ अस्पताल में 45 की जगह 56, वर्मा मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल में 25 की जगह 35, एआईएमसी बस्सी में 24 की जगह 26, प्रोफाइल अस्पताल में 15 की जगह 23 लोगों का उपचार चल रहा है। कई अस्पताल ऐसे भी हैं जहां पर बेड खत्म हो चुके हैं।

कोट्स
कोरोना संक्रमण की बढ़ती संख्या के कारण एल टू और एल थ्री के मरीजों केे लिए बेड की संख्या कम होती जा रही है। इस बात को ध्यान में रखते हम बेड की संख्या बढ़ाने में जुट गए हैं। जगरांव, खन्ना में बेड की संख्या में इजाफा किया गया है। जबकि जवद्दी स्थित सेंटर को भी शुरू कर दिया गया है। जहां तक एल थ्री बेड की बात है तो उसके लिए निजी अस्पताल से लगातार संपर्क चल रहा है। वहां पर इनकी संख्या को बढ़ाया जाएगा।
डॉ. किरण आहलूवालिया, सिविल सर्जन लुधियाना
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