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भाई से विवाद था, खुद को गोली मार ली
ब्यूरो, अमर उजाला/हलवारा (लुधियाना)
Updated Thu, 24 Dec 2015 10:14 PM IST
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चचेरे भाई के साथ चल रहे जमीन विवाद से परेशान राजोआणा कलां के किसान जसवंत सिंह उर्फ हरदम सिंह (52) ने वीरवार सुबह अपनी लाइसेंसी बंदूक से सिर में गोली मारकर आत्महत्या कर ली। सूचना मिलने के बाद थाना सुधार की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मृतक के कब्जे से एक सुसाइड नोट बरामद किया है, जिसमें उसने अपनी मौत का जिम्मेदार अपने चचेरे भाई जगराज सिंह, भतीजे सुखवीर सिंह, गुरवीर सिंह और प्रापर्टी डीलर हरविंदर सिंह को बताया है। मृतक का आरोपियों के साथ जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। आरोपी उसे परेशान कर रहे थे। थाना सुधार की पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज कर लिया है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।
जसवंत सिंह के बेटे सुरिंदरपाल सिंह ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा कि उसके दादा जरनैल सिंह और चाचा जगराज के पिता निरवैर सिंह ने अपनी सहमति से 12 एकड़ जमीन का बंटवारा कर लिया था। टिब्बे वाली सात एकड़ जमीन उनके दादा जरनैल सिंह और दूसरी जो बढ़िया पांच एकड़ जमीन थी वह निरवैर सिंह ने रख ली थी। उसके चाचा जगराज सिंह ने अपनी पांच एकड़ जमीन धीरे धीरे बेच दी। बाट कानूनी तौर पर नहीं की गई थी। इसलिए मुस्तुरका खाता होने के कारण बाकी बची उनकी सात एकड़ जमीन में भी चाचा जगराज सिंह का नाम बोल रहा था। इसी का नाजायज फायदा उठाते हुए चाचा जगराज सिंह ने उनकी सात एकड़ जमीन पर लिमिट बनवाकर लोन ले लिया। अब जगराज सिंह उनकी सात एकड़ जमीन को बेचने के लिए प्रापर्टी डीलर हरविंदर सिंह के जरिए ग्राहक ढूंढ रहा था। उसके पिता जसवंत सिंह ने जगराज सिंह को दो लाख रुपये की मदद भी की, लेकिन इसके बावजूद जगराज उनकी जमीन को बेचने पर उतारू था। इसी कारण उसके पिता परेशान थे। वीरवार सुबह उसके पिता जसवंत सिंह ने खुद के सिर में गोली मार ली। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। थाना सुधार के प्रभारी विक्रमजीत सिंह घुम्मण ने मौके पर पहुंच कर जसवंत सिंह का शव कब्जे में लेकर सुधार के सरकारी अस्पताल में पोस्टमार्टम करने के बाद वारिसों के हवाले कर दिया है। उन्होंने कहा कि चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।
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जसवंत सिंह के बेटे सुरिंदरपाल सिंह ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा कि उसके दादा जरनैल सिंह और चाचा जगराज के पिता निरवैर सिंह ने अपनी सहमति से 12 एकड़ जमीन का बंटवारा कर लिया था। टिब्बे वाली सात एकड़ जमीन उनके दादा जरनैल सिंह और दूसरी जो बढ़िया पांच एकड़ जमीन थी वह निरवैर सिंह ने रख ली थी। उसके चाचा जगराज सिंह ने अपनी पांच एकड़ जमीन धीरे धीरे बेच दी। बाट कानूनी तौर पर नहीं की गई थी। इसलिए मुस्तुरका खाता होने के कारण बाकी बची उनकी सात एकड़ जमीन में भी चाचा जगराज सिंह का नाम बोल रहा था। इसी का नाजायज फायदा उठाते हुए चाचा जगराज सिंह ने उनकी सात एकड़ जमीन पर लिमिट बनवाकर लोन ले लिया। अब जगराज सिंह उनकी सात एकड़ जमीन को बेचने के लिए प्रापर्टी डीलर हरविंदर सिंह के जरिए ग्राहक ढूंढ रहा था। उसके पिता जसवंत सिंह ने जगराज सिंह को दो लाख रुपये की मदद भी की, लेकिन इसके बावजूद जगराज उनकी जमीन को बेचने पर उतारू था। इसी कारण उसके पिता परेशान थे। वीरवार सुबह उसके पिता जसवंत सिंह ने खुद के सिर में गोली मार ली। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। थाना सुधार के प्रभारी विक्रमजीत सिंह घुम्मण ने मौके पर पहुंच कर जसवंत सिंह का शव कब्जे में लेकर सुधार के सरकारी अस्पताल में पोस्टमार्टम करने के बाद वारिसों के हवाले कर दिया है। उन्होंने कहा कि चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।
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