पंजाब : मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद आढ़तियों की हड़ताल खत्म, मंडियों में पहुंचने लगा गेहूं, कई जगह खरीद भी शुरू
- पंजाब में अपनी मांगों को लेकर आढ़तियों ने की थी हड़ताल की घोषणा
- किसानों के खाते में सीधे भुगतान से थे नाराज, और भी थी कई मांगें
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के आश्वासन के बाद आढ़तियों ने हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया है। शनिवार को बचत भवन में आढ़तियों के साथ वर्चुअल बैठक में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आश्वासन दिया कि खरीद प्रक्रिया में आढ़ती को साथ रखा जाएगा। 131 करोड़ की बकाया राशि की एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) से अदायगी होने का इंतजार किए बिना तुरंत पंजाब सरकार पैसा जारी करेगी। वहीं, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने खरीद संबंधी सॉफ्टवेयर में संशोधन कर दिया है। इससे किसानों को फसल की अदायगी जारी करने की प्रक्रिया में आढ़ती भी शामिल रहेंगे। किसानों को 48 घंटे में उनके बैंक खातों में अदायगी मिल जाएगी।
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि आढ़तियों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से बाहर रखने संबंधी केंद्र सरकार के निर्देश के बावजूद वह खरीद प्रक्रिया के साथ हमेशा जुड़े रहेंगे। उन्होंने कहा जब तक मैं यहां हूं, आप व्यवस्था का हिस्सा बने रहोगे और आपकी भूमिका हमेशा कायम रहेगी। सीएम ने आढ़तियों को यकीन दिलाया कि एपीएमसी एक्ट के तहत आढ़ती कमीशन और अन्य लागतें जारी रहेंगी।
केंद्र सरकार की ओर से राज्य सरकार की अपील ठुकराने पर सीएम ने कहा कि उन्होंने सीधी अदायगी की प्रणाली को लागू न करने की सूरत में पंजाब से खरीद न करने की धमकी भी दी। मुख्यमंत्री ने आढ़तियों को भरोसा दिया कि उनकी सरकार एफसीआई की ओर से लेबर की अदायगी में 30 प्रतिशत की कटौती का मुद्दा केंद्र सरकार के समक्ष उठाएगी। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने फेडरेशन ऑफ आढ़तिया एसोसिएशन ऑफ पंजाब के प्रधान विजय कालड़ा के उनकी सरकार द्वारा संभावित हड़ताल वापस लेने संबंधी की गई अपील को मानने व अनाज की लिफ्टिंग करने के लिए धन्यवाद किया।
केंद्र सरकार को मुख्यमंत्री ने रखा निशाने पर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि केंद्र सरकार उनके (आढ़तियों) और किसानों के साथ ऐसा बुरा सलूक क्यों कर रही है। आढ़ती प्रणाली तब भी चलती थी जब वह छोटे थे और अपने दादा जी के साथ मंडियों में जाते थे। यह बात समझ से बाहर है कि केंद्र सरकार इस प्रणाली को बर्बाद करने पर क्यों तुली हुई है क्योंकि आढ़ती कोई बिचौलिया नहीं हैं। निजी क्षेत्र का कामकाज मौजूदा प्रणाली के साथ चल सकता है, इसलिए मौजूदा प्रणाली को बदले जाने की कोई जरूरत नहीं है।
कोविड के चलते इस साल भी लागू रहेगी पास की व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष भी बीते वर्ष की तरह किसानों को पास जारी किए जाएंगे, ताकि कोविड महामारी की स्थिति को देखते हुए मंडियों में भीड़ घटाई जा सके। किसानों को पास जिला स्तर पर आढ़तियों से विचार-विमर्श के बाद जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आढ़तियों को यह अच्छी तरह पता है कि किस किसान ने अपनी फसल की कटाई कर ली है और वह मंडी में आने के लिए तैयार है।
मुक्तसर मंडी में पसरा रहा सन्नाटा
उधर, सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है लेकिन मुक्तसर की अनाज मंडी में सन्नाटा पसरा रहा। किसान आंदोलन व बारिश के कारण जहां इस बार मंडी में फसल पहुंचने में देरी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ आढ़ती एसोसिएशन भी हड़ताल पर है। इससे मंडी में फसल पहुंचने व बेचने में देरी सामने आ रही है। एक-दो किसान ही फसल लेकर मंडी पहुंचे भी थे लेकिन उनकी फसल में नमी की मात्रा ज्यादा थी। आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष तेजिंदर कुमार बब्बू बांसल ने बताया कि आढ़ती सीधी अदायगी मामले में हड़ताल पर चल रहे हैं। इसके बावजूद मंडी में एक-दो किसान अपनी फसल लेकर पहुंचे थे।
खन्ना में नहीं शुरू हुई सरकारी खरीद
एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडी खन्ना में मजदूरों और आढ़तियों की हड़ताल के कारण सरकारी खरीद नहीं शुरू हो पाई। मार्केट कमेटी के सचिव हरमिंदर पाल सिंह ने बताया कि मार्केट कमेटी यानी मंडीकरण बोर्ड ने मंडियों में पुख्ता इंतजाम किए हैं। खन्ना मंडी के अधीन पड़ती राहोण मंडी में अब तक 1500 क्विंटल फसल आई है। मार्केट कमेटी खन्ना के सचिव हरमिंदरपाल का कहना है कि जब तक फसल की सफाई या पंखा नहीं लगाया जाएगा तब तक खरीद नहीं हो सकती। सरकारी एजेंसियां फसल खरीदने के लिए तैयार बैठी हैं लेकिन जब तक मजदूरों की हड़ताल खत्म नहीं होगी, खरीद शुरू नहीं होगी। सोमवार को मंत्री भारत भूषण आशु गेहूं खरीद की शुरुआत करवाएंगे।
मंत्री आशु ने राजपुरा से शुरू करवाई गेहूं खरीद
उधर, कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु ने शनिवार को गेहूं की सरकारी खरीद राजपुरा की दाना मंडी से करवाई। उन्होंने गांव नीलपुर के किसान दिलीप कुमार की गेहूं की बोली करवाई। उन्होंने कहा कि आढ़तियों के साथ सारे विवाद खत्म करके बीच का रास्ता अपनाकर आढ़तियों की भूमिका को इस खरीद प्रक्रिया में पहले की तरह ही बनाकर रखा गया है। इससे जहां किसानों की फसल की पूरी व वाजिब अदायगी होगी, वहीं आढ़तियों का कमिशन व मजदूरों की मजदूरी और ट्रांसपोर्टरों की अदायगी उनके खातों में सीधी जाएगी। वहीं पटियाला के भादसों में शनिवार को कैबिनेट मंत्री साधु सिंह धर्मसोत ने गेहूं की सरकारी खरीद की शुरुआत कराई। उन्होंने आढ़तियों के हड़ताल वापस लेने के फैसले का स्वागत किया।
पटियाला पहुंचा 12623 मीट्रिक टन गेहूं
पटियाला में खरीद के पहले दिन 84 मंडियों में 12623 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई है। डीसी कुमार अमित ने बताया कि शनिवार को आएं गेहूं में से 525 मीट्रिक टन की खरीद की गई। इसमें से पनग्रेन की ओर से 398 मीट्रिक टन, मार्कफेड की ओर से 57, पनसप की ओर से 30, वेयर हाउस की ओर से 30 और एफसीआई की ओर से 10 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई है।
मंडियों में पहुंचा 260 मीट्रिक टन गेहूं, खरीद नहीं
जालंधर में भी गेहूं मंडी में आना शुरू हो गया है। शनिवार को जिले की मंडियों में 260 मीट्रिक टन गेहूं पहुंचा लेकिन खरीद एजेंसियों ने बारदाना नहीं भेजा। इस कारण गेहूं की खरीद नहीं हो सकी। दूसरी तरफ आढ़तियों की हड़ताल का भी असर खरीद पर पड़ा। शनिवार से मंडियों में गेहूं की खरीद शुरू होनी थी।
किसान फसल लेकर अनाज मंडी पहुंच गए लेकिन पता चला कि आढ़ती हड़ताल पर चले गए हैं। इस कारण किसान दिन भर परेशान व मायूस होकर मंडी में ही बैठे रहे। गेहूं न बिकने की वजह से अब किसानों को रात भी मंडियों में ही बितानी पड़ेगी। शाम तक जालंधर में 260 मीट्रिक टन गेहूं मंडियों में आ चुका था।
शाहकोट के किसान बलवंत सिंह ने कहा कि वो सुबह गेहूं लेकर आए तो पता चला की आढ़ती हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र भी किसानों को उतना ही पेमेंट सीधे अकाउंट में देगी, जितना उन्हें आढ़ती के जरिए मिलता है। ऐसे में इस फैसले का कोई फायदा नहीं। हमारी परेशानी यह है कि पहले आढ़ती हमें जरूरत के वक्त पैसे दे देता था लेकिन अब नहीं देगा।