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समुद्र किनारे दौड़ेगी हाई-बर्ड साइकिल
Ludhiana
Updated Mon, 25 Feb 2013 05:31 AM IST
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लुधियाना। अब समुद्र किनारे सन-बाथ के साथ साथ लोग साइकिलिंग का भी मजा ले सकेंगे। साइकिलिंग की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए हाई-बर्ड साइकिल के निर्माता सफारी ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज ने बीच क्रूजर साइकिल लांच की है। लड़कियों के सरकारी कालेज में चल रहे इंडिया इंटरनेशनल साइकिल एक्सपो में यह साइकिल युवाओं के आकर्षण का केंद्र बनी है। इस साइकिल की रेंज 4500 से पांच हजार रुपये के बीच है। देश के समुद्री तटीय इलाकों में इस साइकिल की मार्केटिंग के लिए कंपनी ने खास योजना तैयार की है।
हाई-बर्ड के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर आरडी शर्मा का कहना है कि कंपनी ने देश के समुद्री तटीय इलाकों में सर्वे से यह पाया कि समुद्र के किनारों पर भी युवाओं में साइकिलिंग करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन उपयुक्त साइकिलों की कमी है। इसके बाद यह जिम्मा कंपनी की रिसर्च टीम को दिया गया। रिसर्च टीम ने कड़ी मेहनत के बाद ही बीच-क्रूजर को बाजार में पेश किया है। इस साइकिल के अधिकतर पुर्जे एल्युमिनियम से तैयार किए गए हैं, ताकि गीले रेत में चलने से इनमें जंग न लगे। इसके अलावा इसका हैंडिल चौड़ा और टायर सामान्य से मोटे लगाए गए हैं। इसका वजन भी सामान्य साइकिल से कम है। नतीजतन यह रेत और गीले में आसानी से चल सकती है। इस साइकिल के मडगार्ड और बिना मडगार्ड केदो मॉडल हैं। इसमें कोस्टर ब्रेक का इस्तेमाल किया गया है। कोस्टर ब्रेक के जरिए पैडल पीछे घुमाने से साइकिल ब्रेक लग कर रूक जाता है। इसमें आम साइकिलों की तरह ब्रेक नहीं हैं। कोस्टर ब्रेक पोलैंड, जर्मनी, रूस, चेकोस्लवाकिया, हंगरी, नीदरलैंड, थाईलैंड इत्यादि देशों मेें इस्तेमाल किए जाते हैं। वहां पर पेडल रोक देने से ही साइकिल रूक जाती है।
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हाई-बर्ड के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर आरडी शर्मा का कहना है कि कंपनी ने देश के समुद्री तटीय इलाकों में सर्वे से यह पाया कि समुद्र के किनारों पर भी युवाओं में साइकिलिंग करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन उपयुक्त साइकिलों की कमी है। इसके बाद यह जिम्मा कंपनी की रिसर्च टीम को दिया गया। रिसर्च टीम ने कड़ी मेहनत के बाद ही बीच-क्रूजर को बाजार में पेश किया है। इस साइकिल के अधिकतर पुर्जे एल्युमिनियम से तैयार किए गए हैं, ताकि गीले रेत में चलने से इनमें जंग न लगे। इसके अलावा इसका हैंडिल चौड़ा और टायर सामान्य से मोटे लगाए गए हैं। इसका वजन भी सामान्य साइकिल से कम है। नतीजतन यह रेत और गीले में आसानी से चल सकती है। इस साइकिल के मडगार्ड और बिना मडगार्ड केदो मॉडल हैं। इसमें कोस्टर ब्रेक का इस्तेमाल किया गया है। कोस्टर ब्रेक के जरिए पैडल पीछे घुमाने से साइकिल ब्रेक लग कर रूक जाता है। इसमें आम साइकिलों की तरह ब्रेक नहीं हैं। कोस्टर ब्रेक पोलैंड, जर्मनी, रूस, चेकोस्लवाकिया, हंगरी, नीदरलैंड, थाईलैंड इत्यादि देशों मेें इस्तेमाल किए जाते हैं। वहां पर पेडल रोक देने से ही साइकिल रूक जाती है।
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