{"_id":"102-29691","slug":"Ludhiana-29691-102","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘साईं बाबा सिरडी के शहंशाह’ सुन श्रद्धालु भाव-विभोर ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘साईं बाबा सिरडी के शहंशाह’ सुन श्रद्धालु भाव-विभोर
Ludhiana
Updated Mon, 05 Nov 2012 12:00 PM IST
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मुक्तसर। ‘साईं बाबा सिरडी के शहंशाह, हमको तेरा ही आसरा...’, ‘इक्क फकीर आया सिरडी धाम से...’ और ‘साईं नाथ तेरे हजारों हाथ...’ भजन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। आसमान साईं बाबा के जयकारों से गूंज उठा। मौका था शनिवार की रात को टिब्बी साहिब रोड स्थित मातू राम स्ट्रीट में श्री साईंनाथ मंदिर सेवा सोसाइटी द्वारा बनाए गए श्री साईं नाथ मंदिर के प्रथम स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित साईं संध्या का। कार्यक्रम में साईं दूत अवार्ड से सम्मानित डा.अनिल दत्ता अंबाला (दिव्य चैनल) वाले ने देर रात तक साईं बाबा का गुणगान कर भक्तों को झूमने पर विवश कर दिया। साईं बाबा का दरबार श्रद्धालुओं के आर्कषण का केंद्र बना हुआ था। वहीं पूरी गली को जगमगाती लाइटों तथा फूलों से सजाया गया था, जो श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खिंच रहा था। जागरण में ज्योति प्रज्जवलित करने की रस्म समूह साईं परिवार द्वारा अदा की गई। जबकि पूजन करवाने की रस्म पं.श्याम शास्त्री और सूरज पंडित द्वारा अदा की गई। शिअद के हल्का इंचार्ज कंवरजीत सिंह रोजी बरकंदी ने विशेष तौर पर पहुंचकर साईं बाबा के दरबार में हाजरी लगवाई। उन्होंने मंदिर कमेटी को 11 हजार रुपये की नकद राशि प्रदान की। इस दौरान कार्यक्रम में सहयोग देने वाले सहयोगियों को मुख्य मेहमान के हाथों सम्मानित करवाया गया। श्री रघुनाथ मंदिर कमेटी की तरफ से खीर, चावल व छोलों और जय बाबा खेतरपाल सेवा सोसाइटी द्वारा टिक्कियों का अटूट लंगर लगाया गया। कार्यक्रम में पीपीपी के जिला अध्यक्ष जगजीत सिंह हनी फत्तणवाला, मंदिर क मेटी के अध्यक्ष कमलदीप गगनेजा, श्री रघुनाथ मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अशोक तेरिया, नगर काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष कृष्ण कुमार शम्मी तेरिया, बाबा खेतरपाल सेवा सोसाइटी के अध्यक्ष नरेश कोचा, श्री राम दशहरा कमेटी के अध्यक्ष अशोक चुघ, विमलदीप गगनेजा, दर्शन कुमार बांसल, साहिल सिडाना, अशोक वर्मा, काली खुंगर, अमित खुंगर, नरेश सेतिया, गुलशन पामर, तरसेम सदियोड़ा, हैप्पी मक्कड़, लक्की झांब, द्वारिका दास, पप्पी गुंबर, सुभाष ग्रोवर, सुभाष चगती, टीटू बिरला, बलजिंदर शर्मा, जंगीर सिंह जेई समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने साईं बाबा के दरबार में हाजरी लगवाई।
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फोटो फाइल : 04एमकेआर1एम
कैप्शन : साईं दरबार : मुक्तसर में आयोजित साईं संध्या कार्यक्रम में साईं बाबा के दरबार में भजन पेश कर हाजरी लगवाते हुए डा.अनिल दत्ता अंबाला वाले तथा अन्य।
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-- इनसैट --
समर्पण मांगती है भक्ति : रमन जैन
श्रीराम भवन में कार्तिक महोत्सव जारी
भक्ति में नहीं होना चाहिए छल-कपट
अमर उजाला ब्यूरो
मुक्तसर। भक्ति में छल-कपट नहीं होना चाहिए। भक्ति निष्काम भाव से करनी चाहिए। जब तक आत्मा रुपी दर्पण पर कपट का पर्दा छाया रहेगा तब तक अपने आत्म स्वरुप के दर्शन नहीं हो सकते। इसलिए आत्मरूपी दर्पण से कपट का पर्दा हटाना जरूरी है। भक्ति समर्पण मांगती है। यह विचार श्री कल्याण कमल आश्रम हरिद्वार के महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद महाराज के शिष्य कथावाचक रमन जैन ने व्यक्त किए। वह श्रीराम भवन में आयोजित कार्तिक महोत्सव के दौरान रविवार को श्रद्धालुओं को प्रवचनों की अमृतवर्षा में स्नान करवा रहे थे। श्रद्धा और विश्वास में अंतर समझाते हुए उन्होंने कहा कि यह दो अलग-अलग शब्द हैं। विश्वास तो ऐसे है जैसे बाजार से खरीदे गए नकली फूल। यह फूल बाजार में ही मिलेंगे। मगर श्रद्धा का फूल अपने भीतर के गमले में ही उगाना पड़ता है। विश्वास सुंदर मस्तिक है तो श्रद्धा सुंदर हृदय की देन है। विश्वास में दो और दो चार होते हैं मगर श्रद्धा में यह 22 भी हो सकते हैं। यह जरूरी नहीं कि हजारों पुष्पों से की गई पूजा-अर्चना सार्थक हो। पूजा तो तभी सार्थक होगी अगर मन में सच्ची श्रद्धा होगी। श्रद्धा और विश्वास का अंतर उस तरह है जैसे बच्चे को जन्म देने और उसे गोद लेने में होता है। बच्चे को जन्म देने से मां कहलाया जाता है। मगर उसे सिर्फ गोद में लेने से ही मातृत्व भाव नहीं उमड़ता। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
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करनी का फल भोगना पड़ता है : सुखदेवानंद
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान में सत्संग कार्यक्रम
अमर उजाला ब्यूरो
मलोट (मुक्तसर)। मनुष्य को कभी भी दीन-दुखियों और असहायों का दिल नहीं दुखाना चाहिए। जो भी दीन-दुखी या सताए हुए को और सताता है भगवान उसे उसकी करनी का फल अवश्य देते हैं। इसलिए हमेशा दीन-दुखियों की मदद करो और दिल खोलकर दान दो। यह विचार दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के डबवाली मलकोकी स्थित आश्रम में रविवार को आयोजित सत्संग कार्यक्रम के दौरान प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए संस्थान के प्रचारक स्वामी सुखदेवानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं के विशाल जनसमूह के समक्ष व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जो सदा दीन-दुखियों और असहायों की मदद करता है भगवान भी उसकी मदद करतें हैं और उसे दोगुणा फल प्रदान करते हैं। दान करने से व्यक्ति का धन कम नहीं होता बल्कि और ज्यादा बढ़ता है। भगवान दान करने वाले को दो गुना फल देते हैं। उसकी कमाई में बरकत होती है। सुखदेवानंद जी ने फरमाया कि मनुष्य सोचता है कि बुरे कर्म करते समय उसे कोई नहीं देख रहा, मगर यह उसकी सबसे बड़ी भूल है। भगवान सब कुछ देख रहे हैं। वह किसी दुखी को सताने वाले को उसकी करनी का फल अवश्य देते हैं। इसलिए किसी को दु:ख पहुंचाने से गुरेज करना चाहिए। आखिर में संस्थान के प्रचारक अविनाश जी महाराज ने पहुंचे हुए श्रद्धालुओं का आभार जताया। कार्यक्रम के उपरांत भंडारे का आयोजन भी हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
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फोटो फाइल : 04एमकेआर1एम
कैप्शन : साईं दरबार : मुक्तसर में आयोजित साईं संध्या कार्यक्रम में साईं बाबा के दरबार में भजन पेश कर हाजरी लगवाते हुए डा.अनिल दत्ता अंबाला वाले तथा अन्य।
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भक्ति में नहीं होना चाहिए छल-कपट
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मुक्तसर। भक्ति में छल-कपट नहीं होना चाहिए। भक्ति निष्काम भाव से करनी चाहिए। जब तक आत्मा रुपी दर्पण पर कपट का पर्दा छाया रहेगा तब तक अपने आत्म स्वरुप के दर्शन नहीं हो सकते। इसलिए आत्मरूपी दर्पण से कपट का पर्दा हटाना जरूरी है। भक्ति समर्पण मांगती है। यह विचार श्री कल्याण कमल आश्रम हरिद्वार के महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद महाराज के शिष्य कथावाचक रमन जैन ने व्यक्त किए। वह श्रीराम भवन में आयोजित कार्तिक महोत्सव के दौरान रविवार को श्रद्धालुओं को प्रवचनों की अमृतवर्षा में स्नान करवा रहे थे। श्रद्धा और विश्वास में अंतर समझाते हुए उन्होंने कहा कि यह दो अलग-अलग शब्द हैं। विश्वास तो ऐसे है जैसे बाजार से खरीदे गए नकली फूल। यह फूल बाजार में ही मिलेंगे। मगर श्रद्धा का फूल अपने भीतर के गमले में ही उगाना पड़ता है। विश्वास सुंदर मस्तिक है तो श्रद्धा सुंदर हृदय की देन है। विश्वास में दो और दो चार होते हैं मगर श्रद्धा में यह 22 भी हो सकते हैं। यह जरूरी नहीं कि हजारों पुष्पों से की गई पूजा-अर्चना सार्थक हो। पूजा तो तभी सार्थक होगी अगर मन में सच्ची श्रद्धा होगी। श्रद्धा और विश्वास का अंतर उस तरह है जैसे बच्चे को जन्म देने और उसे गोद लेने में होता है। बच्चे को जन्म देने से मां कहलाया जाता है। मगर उसे सिर्फ गोद में लेने से ही मातृत्व भाव नहीं उमड़ता। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
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करनी का फल भोगना पड़ता है : सुखदेवानंद
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान में सत्संग कार्यक्रम
अमर उजाला ब्यूरो
मलोट (मुक्तसर)। मनुष्य को कभी भी दीन-दुखियों और असहायों का दिल नहीं दुखाना चाहिए। जो भी दीन-दुखी या सताए हुए को और सताता है भगवान उसे उसकी करनी का फल अवश्य देते हैं। इसलिए हमेशा दीन-दुखियों की मदद करो और दिल खोलकर दान दो। यह विचार दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के डबवाली मलकोकी स्थित आश्रम में रविवार को आयोजित सत्संग कार्यक्रम के दौरान प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए संस्थान के प्रचारक स्वामी सुखदेवानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं के विशाल जनसमूह के समक्ष व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जो सदा दीन-दुखियों और असहायों की मदद करता है भगवान भी उसकी मदद करतें हैं और उसे दोगुणा फल प्रदान करते हैं। दान करने से व्यक्ति का धन कम नहीं होता बल्कि और ज्यादा बढ़ता है। भगवान दान करने वाले को दो गुना फल देते हैं। उसकी कमाई में बरकत होती है। सुखदेवानंद जी ने फरमाया कि मनुष्य सोचता है कि बुरे कर्म करते समय उसे कोई नहीं देख रहा, मगर यह उसकी सबसे बड़ी भूल है। भगवान सब कुछ देख रहे हैं। वह किसी दुखी को सताने वाले को उसकी करनी का फल अवश्य देते हैं। इसलिए किसी को दु:ख पहुंचाने से गुरेज करना चाहिए। आखिर में संस्थान के प्रचारक अविनाश जी महाराज ने पहुंचे हुए श्रद्धालुओं का आभार जताया। कार्यक्रम के उपरांत भंडारे का आयोजन भी हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।