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धान की फसल पर 200 रुपए प्रति क्विंटल बोनस न देने पर पराली को सड़कों पर फैंकने की चेतावनी
Updated Wed, 10 Oct 2018 10:00 PM IST
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पराली को सड़कों पर फेंकने की चेतावनी
भाकियू ने धान की फसल पर 200 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मांगा
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। भारतीय किसान यूनियन (लक्खोवाल) ने पंजाब सरकार से धान की फसल पर 200 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मांगा है। साथ ही न देने पर पराली को सड़कों पर फेंकने की चेतावनी दी है।
महासचिव हरिंदर सिंह लक्खोवाल ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों को धान की फसल पर 200 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देना चाहिए। साथ बोनस नहीं दे सकती, तो 5,000 रुपये प्रति एकड़ के दर से उन्हें मुआवजा देना चाहिए। उन्होंने सरकार से गन्ने की बकाया राशि अदा करने संबंधी अपनी पुरानी मांग को दोहराते हुए कहा कि सरकार टालमटोल संबंधी नीति अपना रही है। प्रधान अजमेर सिंह लक्खोवाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने चुनावों से पहले किसानों को स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर फसलों के रेट देने का वादा किया था। सरकार अपने वादे को पूरा करने में असफल रही है। वह हाल ही में हरिद्वार से दिल्ली तक निकाले गए क्रांति मार्च के जरिये सरकार को किसानों की ताकत को दिखा चुके हैं। सरकार ने किसानों पर लाठियां व आंसु गैस के गोले बरसाए, उन्हें बैरिकेड लगाकर राजघाट तक पहुंचने से रोका। किसा अब सरकार केंद्र या पंजाब सरकार के झांसे में नहीं आने वाले हैं।
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भाकियू ने धान की फसल पर 200 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मांगा
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। भारतीय किसान यूनियन (लक्खोवाल) ने पंजाब सरकार से धान की फसल पर 200 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मांगा है। साथ ही न देने पर पराली को सड़कों पर फेंकने की चेतावनी दी है।
महासचिव हरिंदर सिंह लक्खोवाल ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों को धान की फसल पर 200 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देना चाहिए। साथ बोनस नहीं दे सकती, तो 5,000 रुपये प्रति एकड़ के दर से उन्हें मुआवजा देना चाहिए। उन्होंने सरकार से गन्ने की बकाया राशि अदा करने संबंधी अपनी पुरानी मांग को दोहराते हुए कहा कि सरकार टालमटोल संबंधी नीति अपना रही है। प्रधान अजमेर सिंह लक्खोवाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने चुनावों से पहले किसानों को स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर फसलों के रेट देने का वादा किया था। सरकार अपने वादे को पूरा करने में असफल रही है। वह हाल ही में हरिद्वार से दिल्ली तक निकाले गए क्रांति मार्च के जरिये सरकार को किसानों की ताकत को दिखा चुके हैं। सरकार ने किसानों पर लाठियां व आंसु गैस के गोले बरसाए, उन्हें बैरिकेड लगाकर राजघाट तक पहुंचने से रोका। किसा अब सरकार केंद्र या पंजाब सरकार के झांसे में नहीं आने वाले हैं।
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