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मांगे पूरी न होने पर बीएसएनएल इंप्लाइज यूनियन नेताओं ने की भूख हड़ताल
Updated Thu, 13 Jul 2017 10:47 PM IST
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यूनियन नेताओं ने की भूख हड़ताल
बीएसएनएल इंप्लाइज यूनियन ने मांगें पूरी करने की आवाज उठाई
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना।
बीएसएनएल इंप्लाइज यूनियन के नेताओं ने भारत नगर चौक स्थित बीएसएनएल आफिस के बाहर मांगो संबंधी भूख हड़ताल की। यूनियन के नेताओं ने मोदी सरकार, वित्त मंत्री, गृह मंत्री के खिलाफ नारे लगाए।
यूनियन के राष्ट्रीय प्रधान कामरेड बलबीर सिंह और नॉर्थ जोन के सचिव जसवीर सिंह ने बताया कि सरकार व मैनेजमेंट की विभाग विरोधी नीतियों के चलते बीएसएनएल पिछले 7 वर्षो से लगातार घाटे में चल रहा है। इस घाटे के लिए बीएसएनएल के मुलाजिम किसी भी स्तर पर जिम्मेवार नहीं है। बीएसएनएल को मोबाइल सेवा प्रदान करने का लाइसेंस सात वर्षों के बाद दिया गया। उन्होंने बताया कि 2006 में बीएसएनएल देश की नंबर एक कंपनी बन गई थी। सरकार व मैनेजमेंट ने एक साजिश के तहत बीएसएनएल को घाटे की तरफ धकेल दिया। वर्ष 2007 में दूर संचार मंत्री ऐ राजा ने 4.5 करोड़ मोबाइल लाइनों के उपकरण खरीदने के टेंडर को रद्द कर दिया। यहीं पर बात खत्म नहीं हुई जब प्राईवेट कंपनियां ग्राहकों को 4 जी सेवाएं प्रदान कर रहीं है, तब बीएसएनएल को इस सर्विस का साजो सामान नहीं दिलाया गया। उन्होंने मांग की मुलाजिमों की तनखाह में बढ़ोत्तरी की जाए। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानीं गईं तो 27 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दीं जाएगी और इससे निकलने वालें नतीजों के लिए सीधे तौर पर सरकार व बीएसएनएल मैनेजमेंट जिम्मेदार होगा।
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बीएसएनएल इंप्लाइज यूनियन ने मांगें पूरी करने की आवाज उठाई
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना।
बीएसएनएल इंप्लाइज यूनियन के नेताओं ने भारत नगर चौक स्थित बीएसएनएल आफिस के बाहर मांगो संबंधी भूख हड़ताल की। यूनियन के नेताओं ने मोदी सरकार, वित्त मंत्री, गृह मंत्री के खिलाफ नारे लगाए।
यूनियन के राष्ट्रीय प्रधान कामरेड बलबीर सिंह और नॉर्थ जोन के सचिव जसवीर सिंह ने बताया कि सरकार व मैनेजमेंट की विभाग विरोधी नीतियों के चलते बीएसएनएल पिछले 7 वर्षो से लगातार घाटे में चल रहा है। इस घाटे के लिए बीएसएनएल के मुलाजिम किसी भी स्तर पर जिम्मेवार नहीं है। बीएसएनएल को मोबाइल सेवा प्रदान करने का लाइसेंस सात वर्षों के बाद दिया गया। उन्होंने बताया कि 2006 में बीएसएनएल देश की नंबर एक कंपनी बन गई थी। सरकार व मैनेजमेंट ने एक साजिश के तहत बीएसएनएल को घाटे की तरफ धकेल दिया। वर्ष 2007 में दूर संचार मंत्री ऐ राजा ने 4.5 करोड़ मोबाइल लाइनों के उपकरण खरीदने के टेंडर को रद्द कर दिया। यहीं पर बात खत्म नहीं हुई जब प्राईवेट कंपनियां ग्राहकों को 4 जी सेवाएं प्रदान कर रहीं है, तब बीएसएनएल को इस सर्विस का साजो सामान नहीं दिलाया गया। उन्होंने मांग की मुलाजिमों की तनखाह में बढ़ोत्तरी की जाए। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानीं गईं तो 27 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दीं जाएगी और इससे निकलने वालें नतीजों के लिए सीधे तौर पर सरकार व बीएसएनएल मैनेजमेंट जिम्मेदार होगा।
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