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कारोबारियों का 5 रुपये यूनिट रेट फिक्स, इसमें बढ़ौतरी नहीं हो
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कारोबारियों का 5 रुपये यूनिट रेट फिक्स, इसमें बढ़ोतरी न हो
पंजाब बिजली बोर्ड निर्धारित से ज्यादा खर्च पर लगाए अंकुश
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। सूबे में मार्च महीने से बिजली के दाम बढ़ाने को लेकर पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन की चेयरपर्सन कुसमजीत सिद्धू कारोबारियों की राय जानने के लिए लुधियाना पहुंची। यहां पर विभिन्न कारोबारी एसोसिएशन ने बिजली रेट बढ़ाने को लेकर अपने विचार चेयरपर्सन को दिए। इस दौरान शिरोमणि अकाली दल यूथ विंग नेता मीतपाल दुगरी और गुरदीप गोशा अपने साथियों के साथ विरोध करने वहां पहुंच गए। उन्होंने बिजली दाम बढ़ाने के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर मौजूद पुलिस मुलाजिमों ने कुछ समय बाद उन्हें वहां से बाहर कर दिया।
फेडरेशन ऑफ पंजाब स्माल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन प्रधान बदीश जिंदल ने पक्ष रखते कहा कि कारोबारियों के लिए पंजाब सरकार ने 5 रुपये प्रति यूनिट रेट फिक्स कर रखा है। इसलिए उनके फिक्स रेट में कोई बढ़ोतरी न की जाए। देखने में आया है कि बिजली बोर्ड को हर साल खर्च करने को पैसा निर्धारित किया जाता है, लेकिन उनका खर्च सीमा से बाहर होता है। बिजली बोर्ड इस खर्च को उठाने के लिए लोन लेता है, इसका बोझ फिर उपभोक्ताओं पर पड़ता है। वही कमीशन बिजली के रेट जून महीने तक फाइनल करता है। ऐसे में रेट को अप्रैल महीने से लागू किए जाते है। बिजली विभाग उन्हें पुराने पैसे चुकाने के लिए कहता है। इस बार जो भी टैरिफ फिक्स करना है, उसे मार्च माह तक कर दिया जाए।
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पंजाब बिजली बोर्ड निर्धारित से ज्यादा खर्च पर लगाए अंकुश
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। सूबे में मार्च महीने से बिजली के दाम बढ़ाने को लेकर पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन की चेयरपर्सन कुसमजीत सिद्धू कारोबारियों की राय जानने के लिए लुधियाना पहुंची। यहां पर विभिन्न कारोबारी एसोसिएशन ने बिजली रेट बढ़ाने को लेकर अपने विचार चेयरपर्सन को दिए। इस दौरान शिरोमणि अकाली दल यूथ विंग नेता मीतपाल दुगरी और गुरदीप गोशा अपने साथियों के साथ विरोध करने वहां पहुंच गए। उन्होंने बिजली दाम बढ़ाने के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर मौजूद पुलिस मुलाजिमों ने कुछ समय बाद उन्हें वहां से बाहर कर दिया।
फेडरेशन ऑफ पंजाब स्माल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन प्रधान बदीश जिंदल ने पक्ष रखते कहा कि कारोबारियों के लिए पंजाब सरकार ने 5 रुपये प्रति यूनिट रेट फिक्स कर रखा है। इसलिए उनके फिक्स रेट में कोई बढ़ोतरी न की जाए। देखने में आया है कि बिजली बोर्ड को हर साल खर्च करने को पैसा निर्धारित किया जाता है, लेकिन उनका खर्च सीमा से बाहर होता है। बिजली बोर्ड इस खर्च को उठाने के लिए लोन लेता है, इसका बोझ फिर उपभोक्ताओं पर पड़ता है। वही कमीशन बिजली के रेट जून महीने तक फाइनल करता है। ऐसे में रेट को अप्रैल महीने से लागू किए जाते है। बिजली विभाग उन्हें पुराने पैसे चुकाने के लिए कहता है। इस बार जो भी टैरिफ फिक्स करना है, उसे मार्च माह तक कर दिया जाए।
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