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शहीदी सभा पर बंद हों शाही लंगर, एसजीपीसी लगाए रोक
Updated Sun, 09 Dec 2018 10:36 PM IST
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‘शहीदी सभा पर बंद हों शाही लंगर, एसजीपीसी लगाए रोक’
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी गोबिंदगढ़। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेह सिंही और माता गुजरी की अतुल्य शहादत को समर्पित हर साल फतेहगढ़ साहिब में 26 से 28 दिसंबर तक होने वाली शहीदी सभा में आने वाली संगत के लिए लगाए जाते 36 प्रकार के शाही लंगरों पर एसजीपीसी को तुरंत रोक लगानी चाहिए। संगतों के लिए केवल सादे लंगर लगाए जाने चाहिए।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब चेरिटेबल सोसाइटी फतेहगढ़ साहिब के उप-चेयरमैन फोरमैन बलवीर सिंह सिद्धू ने कहा कि इन शाही लंगरों पर रोक लगाने के लिए गुरुद्वारा साहिब का प्रबंधन देख रही एसजीपीसी को पहल करनी होगी। जिस तरह श्रद्धालु अनेकों प्रकार के लंगर लगाते हैं उससे शोकाकुल संगत के मन को भारी ठेस पहुंचती है।
खासकर गजरेला, ब्रेड- पकौड़े, खोये की पिन्नी, खीर, साग, मटर-पनीर समेत कई प्रकार के लंगर परोसे जा रहे हैं। बस यही नहीं हर बार प्रशासन और एजसीपीसी शहीदी सभा में जगह-जगह बैठे भांग रगड़ने वाले लोगों को अनदेखा करती आ रही है। उन्होंने लंगर कमेटियों से भी अपील की कि वो संगत की सेवा गुरुघर की मर्यादा अनुसार ही करें न कि दिखावा करें।
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अमर उजाला ब्यूरो
मंडी गोबिंदगढ़। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेह सिंही और माता गुजरी की अतुल्य शहादत को समर्पित हर साल फतेहगढ़ साहिब में 26 से 28 दिसंबर तक होने वाली शहीदी सभा में आने वाली संगत के लिए लगाए जाते 36 प्रकार के शाही लंगरों पर एसजीपीसी को तुरंत रोक लगानी चाहिए। संगतों के लिए केवल सादे लंगर लगाए जाने चाहिए।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब चेरिटेबल सोसाइटी फतेहगढ़ साहिब के उप-चेयरमैन फोरमैन बलवीर सिंह सिद्धू ने कहा कि इन शाही लंगरों पर रोक लगाने के लिए गुरुद्वारा साहिब का प्रबंधन देख रही एसजीपीसी को पहल करनी होगी। जिस तरह श्रद्धालु अनेकों प्रकार के लंगर लगाते हैं उससे शोकाकुल संगत के मन को भारी ठेस पहुंचती है।
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खासकर गजरेला, ब्रेड- पकौड़े, खोये की पिन्नी, खीर, साग, मटर-पनीर समेत कई प्रकार के लंगर परोसे जा रहे हैं। बस यही नहीं हर बार प्रशासन और एजसीपीसी शहीदी सभा में जगह-जगह बैठे भांग रगड़ने वाले लोगों को अनदेखा करती आ रही है। उन्होंने लंगर कमेटियों से भी अपील की कि वो संगत की सेवा गुरुघर की मर्यादा अनुसार ही करें न कि दिखावा करें।
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