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बैंकों के सिस्टम खिलाफ भाकियू ने खोला मोरचा
Updated Mon, 28 May 2018 10:12 PM IST
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बैंकों के सिस्टम के खिलाफ भाकियू ने खोला मोर्चा
संगरूर में रोष प्रदर्शन, जमकर की गई नारेबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
संगरूर। बैंकों के सिस्टम के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां ने मोर्चा खोलते हुए जोरदार प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की।
अनाज मंडी में यूनियन के जिलाध्यक्ष अमरीक सिंह गंढूआं के नेतृत्व में लगाए धरने को संबोधित करते हुए यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उग्राहां ने कहा कि बैंकों की तरफ से किसानों की जमीनों की कुर्की निशानी लगाई जा रही है। अधिकांश बैंक और सूदखोर आढ़ती किसानों से खाली चेक ले लेते हैं और इन चेकों पर दस्तखत/अंगूठे लगवाकर बाद में अपनी मनमर्जी से चेक पर अपनी रकम भर लेते हैं। किसानों के खाते में पैसे न होने के कारण किसान के चेक बाउंस हो जाते हैं।फिर यह बैंक व सूदखोर किसानों को जेल भेजने में सफल हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि हाउसफेड की ओर से जो कर्ज दिया जाता है उसपर ब्याज तकरीबन दो प्रतिशत पड़ जाता है। इस कारण किसान व मजदूर हर रोज खुदकुशी कर रहे हैं। कैप्टन सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही है। सत्ता में आने से पहले कैप्टन सरकार ने किसानों व मजदूरों से वादा किया था कि सरकार बनने पर उनका सारा कर्ज माफ किया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि किसानों से खाली चेक व सूदखोरों द्वारा भरे जाने वाले प्रनोट व इस्टांपों की मान्यता रद्द की जाए। किसी भी किसान को बैंक के लोन बदले जेल नहीं जाने दिया जाएगा। इसके साथ ही यूनियन ने एलान किया कि धान की बिजाई दस जून से शुरू की जाएगी। इसके लिए दस घंटे निर्विघ्न बिजली सप्लाई दी जाए।
मौके पर यूनियन नेता सोमा सिंह, दिलबाग सिंह छाजला, बहादरसिंह भुटाल, श्याम दास कांझली, जसवंत सिंह, बलजिंदर सिंह, दर्शन सिंह, गोबिंदर सिंह, मनजीत सिंह, लाभ सिंह, कृपाल सिंह, बलदेव सिंह उपस्थित थे।
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फोटो:28एसजीआरपी03:संगरूर में रोष प्रदर्शन करते हुए किसान।
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संगरूर में रोष प्रदर्शन, जमकर की गई नारेबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
संगरूर। बैंकों के सिस्टम के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां ने मोर्चा खोलते हुए जोरदार प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की।
अनाज मंडी में यूनियन के जिलाध्यक्ष अमरीक सिंह गंढूआं के नेतृत्व में लगाए धरने को संबोधित करते हुए यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उग्राहां ने कहा कि बैंकों की तरफ से किसानों की जमीनों की कुर्की निशानी लगाई जा रही है। अधिकांश बैंक और सूदखोर आढ़ती किसानों से खाली चेक ले लेते हैं और इन चेकों पर दस्तखत/अंगूठे लगवाकर बाद में अपनी मनमर्जी से चेक पर अपनी रकम भर लेते हैं। किसानों के खाते में पैसे न होने के कारण किसान के चेक बाउंस हो जाते हैं।फिर यह बैंक व सूदखोर किसानों को जेल भेजने में सफल हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि हाउसफेड की ओर से जो कर्ज दिया जाता है उसपर ब्याज तकरीबन दो प्रतिशत पड़ जाता है। इस कारण किसान व मजदूर हर रोज खुदकुशी कर रहे हैं। कैप्टन सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही है। सत्ता में आने से पहले कैप्टन सरकार ने किसानों व मजदूरों से वादा किया था कि सरकार बनने पर उनका सारा कर्ज माफ किया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि किसानों से खाली चेक व सूदखोरों द्वारा भरे जाने वाले प्रनोट व इस्टांपों की मान्यता रद्द की जाए। किसी भी किसान को बैंक के लोन बदले जेल नहीं जाने दिया जाएगा। इसके साथ ही यूनियन ने एलान किया कि धान की बिजाई दस जून से शुरू की जाएगी। इसके लिए दस घंटे निर्विघ्न बिजली सप्लाई दी जाए।
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मौके पर यूनियन नेता सोमा सिंह, दिलबाग सिंह छाजला, बहादरसिंह भुटाल, श्याम दास कांझली, जसवंत सिंह, बलजिंदर सिंह, दर्शन सिंह, गोबिंदर सिंह, मनजीत सिंह, लाभ सिंह, कृपाल सिंह, बलदेव सिंह उपस्थित थे।
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फोटो:28एसजीआरपी03:संगरूर में रोष प्रदर्शन करते हुए किसान।