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चिट्टे की ओवरडोज से नौजवान की मौत
Updated Fri, 27 Jul 2018 10:29 PM IST
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चिट्टे की ओवरडोज से नौजवान की मौत
25 दिन चला बठिंडा और फरीदकोट अस्पतालों में इलाज
5 लाख खर्च करके भी नहीं बची जान
अमर उजाला ब्यूरो
मानसा। शहर के वार्ड नंबर 2 में एक नौजवान की चिट्टे की ओवरडोज से मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक 25 वर्षीय नौजवान सुनील कुमार ने सवा महीना पहले खुद नशे की टीका लगाया जिसके बाद वह बीमार हो गया। सुनील कुमार की पत्नी सरबजीत कौर ने बताया कि चार महीने से वह नशे की लत का शिकार हो गया था। उसके कुछ समय बाद नशीली गोलियों के मामले में मानसा की अदालत ने उसे 10 साल की कैद की सजा सुनाई और इसके बाद जब वह जमानत पर आया तो इसी रास्ते पर चल पड़ा। उन्होंने बताया कि उसका एक हरियाणा का कोई साथी यह काम करता था और पुलिस सुनील पर दवाब बना रही थी कि या तो उसे पकड़वा दे अथवा वह दस हजार रुपये प्रति महीना पर चिट्टा बेचे। इसके लिए पुलिस उसे पैसे दिया करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी पुलिस उसके पति को पकड़ लेती और कभी उसे छोड़ देती थी। नशे का टीका लगाने के बाद सुनील बीमार पड़ गया और उसे बठिंडा व फरीदकोट के अस्पतालों में इलाज कराया, जिसपर पांच लाख रुपये खर्च हुआ किंतु वह बच नहीं पाया। शुक्रवार बाद दोपहर सुनील कुमार का मानसा के रामबाग में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
उधर, डीएसपी सिमरजीत सिंह ने कहा कि इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं हो सकती और न ही इसके कोई तथ्य हैं। पुलिस द्वारा नशा बिकवाने के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।
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फोटो:27एसजीआरपी03:सुनील कुमार की फाइल फोटो।
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जगतार धंजल
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25 दिन चला बठिंडा और फरीदकोट अस्पतालों में इलाज
5 लाख खर्च करके भी नहीं बची जान
अमर उजाला ब्यूरो
मानसा। शहर के वार्ड नंबर 2 में एक नौजवान की चिट्टे की ओवरडोज से मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक 25 वर्षीय नौजवान सुनील कुमार ने सवा महीना पहले खुद नशे की टीका लगाया जिसके बाद वह बीमार हो गया। सुनील कुमार की पत्नी सरबजीत कौर ने बताया कि चार महीने से वह नशे की लत का शिकार हो गया था। उसके कुछ समय बाद नशीली गोलियों के मामले में मानसा की अदालत ने उसे 10 साल की कैद की सजा सुनाई और इसके बाद जब वह जमानत पर आया तो इसी रास्ते पर चल पड़ा। उन्होंने बताया कि उसका एक हरियाणा का कोई साथी यह काम करता था और पुलिस सुनील पर दवाब बना रही थी कि या तो उसे पकड़वा दे अथवा वह दस हजार रुपये प्रति महीना पर चिट्टा बेचे। इसके लिए पुलिस उसे पैसे दिया करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी पुलिस उसके पति को पकड़ लेती और कभी उसे छोड़ देती थी। नशे का टीका लगाने के बाद सुनील बीमार पड़ गया और उसे बठिंडा व फरीदकोट के अस्पतालों में इलाज कराया, जिसपर पांच लाख रुपये खर्च हुआ किंतु वह बच नहीं पाया। शुक्रवार बाद दोपहर सुनील कुमार का मानसा के रामबाग में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
उधर, डीएसपी सिमरजीत सिंह ने कहा कि इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं हो सकती और न ही इसके कोई तथ्य हैं। पुलिस द्वारा नशा बिकवाने के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।
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फोटो:27एसजीआरपी03:सुनील कुमार की फाइल फोटो।
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जगतार धंजल