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नगर निगम के मुलाजिमों को दो महीने से नहीं मिली तनख्वाह, कर रहे है इंतजार
Updated Thu, 31 May 2018 10:16 PM IST
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नगर निगम के मुलाजिमों को दो महीने से नहीं मिली तनख्वाह
पंजाब की सबसे बड़ी नगर निगम का खजाना खाली
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। राज्य की सबसे बड़ी नगर निगम और स्मार्ट सिटी लुधियाना की हालत काफी खराब हो चुकी है। बड़े बड़े प्रोजेक्टों का दावा करने वाले नगर निगम लुधियाना के पीपे खाली हो गए है। मुलाजिम दो महीने से अपनी सैलरी को तरस रहे है। नगर निगम मुलाजिमों को पिछले एक साल से इसी तरह दो दो महीने बाद तनख्वाह मिल रही है। जिस कारण उनकी परेशानी ज्यादा बढ़ी हुई है। दूसरी तरफ नगर निगम अधिकारी इसके पीछे का कारण जीएसटी को बता रहे हैं। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक जीएसटी की कीमत हर बार लेट मिल रही है। जिस कारण तनख्वाह बांटने में देरी हो रही है।
नगर निगम में तीन हजार के करीब पक्के मुलाजिम और छह हजार के करीब ठेके पर काम करने वाले मुलाजिम है। जबकि पिछले दो महीनेसे तनख्वाह का इंतजार कर रहे है। मुलाजिमों को अप्रैल महीने में फरवरी की तनख्वाह मिली थी और फिर मार्च महीने की। अब नगर निगम के मुलाजिम अप्रैल और मई महीनेकी तनख्वाह के लिए इंतजार कर रहे है। उन्होंने कहा कि पैसे देने के लिए मुलाजिमों को बाहर कर्जा लेना पड़ रहा है। नगर निगम हर महीने मुलाजिमों को तनख्वाह का 26 करोड़ रुपये देता है। जिनमें कच्चे पक्के मुलाजिमों की तनख्वाह और पेंशन शामिल है। हर बार की तरह इस बार जीएसटी की किस्त नहीं आई। जिस कारण परेशानी हो रही है।
नगर निगम कमिश्नर जसकिरण सिंह का कहना है कि जीएसटी के कुछ पैसे नगर निगम को आए हैं। जिनमें चौथा दर्जा मुलाजिम, लोन की किस्तें और बिजली के बिल दिए गए हैं। सरकार को जीएसटी की अगली किस्त जल्द जारी करने के लिए लिखित चिट्ठी भेजी गई है। ताकि मुलाजिमों को जल्द ही तनख्वाह दे दी जाए।
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पंजाब की सबसे बड़ी नगर निगम का खजाना खाली
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। राज्य की सबसे बड़ी नगर निगम और स्मार्ट सिटी लुधियाना की हालत काफी खराब हो चुकी है। बड़े बड़े प्रोजेक्टों का दावा करने वाले नगर निगम लुधियाना के पीपे खाली हो गए है। मुलाजिम दो महीने से अपनी सैलरी को तरस रहे है। नगर निगम मुलाजिमों को पिछले एक साल से इसी तरह दो दो महीने बाद तनख्वाह मिल रही है। जिस कारण उनकी परेशानी ज्यादा बढ़ी हुई है। दूसरी तरफ नगर निगम अधिकारी इसके पीछे का कारण जीएसटी को बता रहे हैं। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक जीएसटी की कीमत हर बार लेट मिल रही है। जिस कारण तनख्वाह बांटने में देरी हो रही है।
नगर निगम में तीन हजार के करीब पक्के मुलाजिम और छह हजार के करीब ठेके पर काम करने वाले मुलाजिम है। जबकि पिछले दो महीनेसे तनख्वाह का इंतजार कर रहे है। मुलाजिमों को अप्रैल महीने में फरवरी की तनख्वाह मिली थी और फिर मार्च महीने की। अब नगर निगम के मुलाजिम अप्रैल और मई महीनेकी तनख्वाह के लिए इंतजार कर रहे है। उन्होंने कहा कि पैसे देने के लिए मुलाजिमों को बाहर कर्जा लेना पड़ रहा है। नगर निगम हर महीने मुलाजिमों को तनख्वाह का 26 करोड़ रुपये देता है। जिनमें कच्चे पक्के मुलाजिमों की तनख्वाह और पेंशन शामिल है। हर बार की तरह इस बार जीएसटी की किस्त नहीं आई। जिस कारण परेशानी हो रही है।
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नगर निगम कमिश्नर जसकिरण सिंह का कहना है कि जीएसटी के कुछ पैसे नगर निगम को आए हैं। जिनमें चौथा दर्जा मुलाजिम, लोन की किस्तें और बिजली के बिल दिए गए हैं। सरकार को जीएसटी की अगली किस्त जल्द जारी करने के लिए लिखित चिट्ठी भेजी गई है। ताकि मुलाजिमों को जल्द ही तनख्वाह दे दी जाए।
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