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बिगड़ती साख बचाने को सरकार ने लाखों लोगों को किया परेशान : जाखड़
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर
Updated Wed, 05 Oct 2016 07:39 PM IST
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सुनील जाखड़।
- फोटो : अमर उजाला
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सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक केके शर्मा के उस बयान से पंजाब सरकार की राजनीति पर आधारित चालों की पोल खुल गई है जिसमें बीएसएफ ने स्पष्ट किया है कि उनकी ओर से सीमावर्ती गांवों को खाली करवाने के कोई निर्देश जारी नहीं किए गए।
यह विचार व्यक्त करते हुए पंजाब कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुनील जाखड़ ने कहा कि बिना किसी तनाव या सैनिक हलचल के पंजाब सरकार ने अपनी बिगड़ी हुई साख बचाने के लिए 6 सीमावर्ती जिलों के लाखों निवासियों को पलायन करने का आदेश जारी कर दिया। न तो उन्हें परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाई गई और न ही पलायन से पूर्व राहत शिविर स्थापित किए गए।
हजारों विद्यार्थी एक सप्ताह तक पढ़ाई से वंचित हो गए और अब उन्हें कहा जा रहा है कि वापस अपने-अपने स्कूलों में शिक्षा गृहण करने के लिए जाएं। बेघर हुए लोगों के आवास की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। कई के पास तो वाहन जुटाने के लिए भी आर्थिक साधन न तो पलायन के समय उपलब्ध थे और न ही अब लोटने के लिए।
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जाखड़ ने कहा कि पहले तो सीमावर्ती किसानों को तनाव का हवाला देकर धान की कटाई करने की सलाह दी गई जब वह धान से लदी ट्रालियां लेकर अनाज मंडियों में पहुंचे तो नमी का बहाना बना कर उन्हें बेरंग लोटाया जा रहा है। सरकार ने एक अक्तूबर से धान की खरीद शुरू करने का जो दावा किया था वह पिछले सालों की तरह इस बार भी खोखला सिद्ध हुआ।
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यह विचार व्यक्त करते हुए पंजाब कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुनील जाखड़ ने कहा कि बिना किसी तनाव या सैनिक हलचल के पंजाब सरकार ने अपनी बिगड़ी हुई साख बचाने के लिए 6 सीमावर्ती जिलों के लाखों निवासियों को पलायन करने का आदेश जारी कर दिया। न तो उन्हें परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाई गई और न ही पलायन से पूर्व राहत शिविर स्थापित किए गए।
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हजारों विद्यार्थी एक सप्ताह तक पढ़ाई से वंचित हो गए और अब उन्हें कहा जा रहा है कि वापस अपने-अपने स्कूलों में शिक्षा गृहण करने के लिए जाएं। बेघर हुए लोगों के आवास की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। कई के पास तो वाहन जुटाने के लिए भी आर्थिक साधन न तो पलायन के समय उपलब्ध थे और न ही अब लोटने के लिए।
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जाखड़ ने कहा कि पहले तो सीमावर्ती किसानों को तनाव का हवाला देकर धान की कटाई करने की सलाह दी गई जब वह धान से लदी ट्रालियां लेकर अनाज मंडियों में पहुंचे तो नमी का बहाना बना कर उन्हें बेरंग लोटाया जा रहा है। सरकार ने एक अक्तूबर से धान की खरीद शुरू करने का जो दावा किया था वह पिछले सालों की तरह इस बार भी खोखला सिद्ध हुआ।