फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Jalandhar News ›   sunil jakhar, agriculture department, white fly, farmers, cotton, ferozepur, jalandhar, punjab

कृषि विभाग की निष्क्रियता फिर हुई जग जाहिर : सुनील जाखड़

Mon, 11 Jul 2016 09:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर Updated Mon, 11 Jul 2016 09:38 PM IST
विज्ञापन
sunil jakhar, agriculture department, white fly, farmers, cotton, ferozepur, jalandhar, punjab
सुनील जाखड़। - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान-राजस्थान बॉर्डर पर स्थित गांवों में नरमा-कपास की फसल पर सफेद मक्खी के हमले ने एक बार फिर किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। यदि प्रदेश सरकार ने समय रहते कदम उठाए होते तो किसानों को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। यह बात प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष व मुख्य प्रवक्ता सुनील जाखड़ ने प्रभावित गांवों का दौरा करने के बाद कही।
विज्ञापन


जाखड़ ने कहा कि बीते वर्ष सफेद मक्खी के हमले और सब्सिडी पर उपलब्ध करवाए गए गुणवत्ताहीन कीटनाशकों के कारण प्रदेश को लगभग 65 प्रतिशत कपास उत्पादन से हाथ धोना पड़ा। यही कारण है कि प्रदेश के किसानों ने इसबार पौने पांच लाख हेक्टेयर की बजाय केवल दो लाख 56 हजार हेक्टेयर रकबे पर ही कपास की बिजाई की।
विज्ञापन


अबोहर क्षेत्र की बात करें तो बीते वर्ष अबोहर ब्लॉक में 42 हजार 744 हेक्टेयर भूमि पर नरमा-कपास की बिजाई की गई थी लेकिन इस बार यह रकबा घटकर 20 हजार 22 हेक्टेयर रह गया है। खुइयां सरवर में पिछले वर्ष के 35 हजार 613 हेक्टेयर की बजाय यह रकबा 11 हजार 755 हेक्टेयर पर सिमट कर रह गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जाखड़ ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों की सिफारिशों के अनुसार प्रदेश सरकार ने किसानों को विश्वास दिलाया था कि निर्धारित समय 15 अप्रैल से 15 मई तक नरमा-कपास की बिजाई के लिए नहरी पानी बिना रुकावट के उपलब्ध करवाया जाएगा। इस अवधि से पूर्व लंबी माइनर के पुनर्निर्माण का कार्य पूरा नहीं किया गया जबकि खुइयां सरवर उप तहसील क्षेत्र की उपनहरों की सफाई समय पर ना किए जाने से टेल के गांवों तक पानी नहीं पहुंचा। सैकड़ों किसान बिजाई से वंचित रह गए।


कृषि विभाग पर निष्क्रियता दोहराने का आरोप लगाते हुए जाखड़ ने कहा कि सफेद मक्खी के लक्षण बीते माह ही दिखाई देने लगे थे लेकिन विभागीय अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। गांवों में जागरूकता शिविर लगाकर किसानों को इसके प्रति सचेत करने का रत्ती भर भी प्रयास नहीं किया गया। इस माह भी किसानों को यह पता नहीं चला कि सर्वेक्षण करने के लिए कब अधिकारी आए और बिना कोई सार्थक कदम उठाए चले गए। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed