फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Jalandhar News ›   Students of Jalandhar returned from Ukraine are not happy with government 

नाराजगी: यूक्रेन से लौटे जतिन का आरोप...सरकार व दूतावास ने हमें मरने के लिए छोड़ दिया, संघर्ष कर पहुंचे बॉर्डर तक 

Wed, 09 Mar 2022 01:07 PM IST
निवेदिता वर्मा मनमोहन सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)
मनमोहन सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 09 Mar 2022 01:07 PM IST
सार

जतिन ने बताया कि पिसोचिन में दूतावास का कोई भी अधिकारी नहीं मिला। हमने दो ब्रेड खाकर दिन गुजारा। हमें कहा गया कि पिसोचिन में सुरक्षित हो वहीं रुकना, लेकिन हमारी इमारत पर मिसाइल गिरी, इससे कुछ छात्रों को चोटें भी लगीं।

विज्ञापन
Students of Jalandhar returned from Ukraine are not happy with government 
यूक्रेन से लौटे जालंधर के छात्र। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।

विस्तार

रूस-यूक्रेन की जंग में अपनों को निकालने की वाहवाही लूटने में जुटी सरकार और दूतावास ने जो किया वो मदद नहीं है बल्कि हमें मरने के लिए वहां छोड़ दिया था। मंगलवार सुबह 4 बजे दिल्ली पहुंचे जालंधर के जतिन सहगल जब परिवार से मिले तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिजनों से मिल नम आंखों से उन्होंने अपनी दास्तां बयां की तो वह भी भावुक हो उठे। जतिन सहगल से सरकार के प्रयासों व घर वापसी से जुड़े सवाल-जबाव हुए तो उनकी आंखों में सरकार के प्रति रोष दिखा। 

विज्ञापन


उन्होंने कहा सरकार इसे मदद कहती है, हम वहां पल-पल मर रहे थे, बंकरों के आसपास जब मिसाइल गिरती थी तो सब कुछ हिल जाता था। हमने कई बार दूतावास से संपर्क करने की कोशिश की, फोन व ई-मेल किए, कोई जवाब नहीं मिला। 3 मार्च को 2 बजे अचानक एडवाइजरी जारी कर कह रहे 6 बजे तक खारकीव छोड़ दो। हम बंकरों में भूखे-प्यासे जैसे तैसे करके पिसोचिन पहुंचे, रास्ते में 2 किलोमीटर लंबी लाइन में सैकड़ों छात्र चल रहे थे तभी हमारे ऊपर से मिसाइल गुजरी और 1 किलोमीटर की दूरी पर गिरी, मतलब मौत और हम में सिर्फ 100 मीटर का फासला रह गया। 
विज्ञापन


जतिन ने बताया कि पिसोचिन में दूतावास का कोई भी अधिकारी नहीं मिला। हमने दो ब्रेड खाकर दिन गुजारा। हमें कहा गया कि पिसोचिन में सुरक्षित हो वहीं रुकना, लेकिन हमारी इमारत पर मिसाइल गिरी, इससे कुछ छात्रों को चोटें भी लगीं। हम पिसोचिन में बंकरों में छुपे रहे, सरकार के नुमाइंदों से बात हुई तो उन्होंने बॉर्डर तक आने के लिए कहा। जैसे ही हम निकले, वहां एजेंटों की मदद से बस करवाई और 42 घंटे का सफर कर रोमानिया बॉर्डर पहुंचे।

विज्ञापन
विज्ञापन

हम डर गए थे कि कैसे निकल पाएंगे : स्नेहा गुप्ता

दिल्ली पहुंची सेना अधिकारी के बेटी स्नेहा गुप्ता ने कहा कि दूतावास के लोगों ने यहां तक कह दिया था कि हम नहीं कर रहे हैं यूक्रेन छोड़ो आपकी मर्जी है। कुछ भी घट सकता था जब हमें निकालने के बजाय दूतावास के अधिकारी ऐसा बोल रहे थे तो हम सभी डर गए थे कि अब कैसे निकल पाएंगे। 

वो काली रातें... बंकर हो या बस, जागते-जागते कटीं, घर पहुंचकर सुकून है पर अब दिल दहला देते हैं वो मंजर: अनिकेत

जंग के ये 13 दिन, खारकीव के बंकरों में गुजरे वो 7 दिन जो माइनस 5 डिग्री में एक वक्त का खाना खाकर गुजारने पड़े, कभी नहीं भूलेंगे। धमाकों ने सोने नहीं दिया, बंकर हो या यूक्रेन का अंतिम सफर बनी 48 घंटे के लिए बस... वो काली रातें जाग कर काटनी पड़ी। हमारी बस को रास्ते में किसी ने रोका तो नहीं लेकिन धमाकों से रास्ते जरूर बदलने पड़े। 16 घंटे फ्लाइट से सफर कर जब घर पहुंचा तो सुकून जरूर मिला, लेकिन चैन की नींद नहीं सो पा रहे, अब भी वो दिल दहला देने वाले मंजर आंखों में घूमते हैं। एक समय लग रहा था कि हम सब घर पहुंचेंगे या नहीं लेकिन परिस्थितियों से जूझते हुए एक-दूसरे का साहस बने और अभिभावकों की प्रार्थनाओं के फल से हम घर पहुंचे हैं। ट्रेन में न चढ़ने देने का वो वाकया छोड़ दें तो हमारी यूक्रेन फौज ने पूरी सहायता की।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed