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Ground Report: पाला बदलने वाले प्रत्याशियों ने दिलचस्प बनाया मुकाबला... सियासी गुणा-भाग में उलझे सभी दल

Fri, 31 May 2024 10:37 AM IST
शाहरुख खान प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, जालंधर
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, जालंधर Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 31 May 2024 10:37 AM IST
सार

इस सीट पर पाला बदलने वाले प्रत्याशियों ने मुकाबला दिलचस्प बना दिया है। कांग्रेस से पूर्व सीएम चन्नी, भाजपा से सुशील सिंह रिंकू, आप से पवन टीनू, शिअद से मोहिंदर और बसपा से बलविंदर मैदान में हैं।

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Punjab Lok Sabha Election 2024 Jalandhar Constituency Political Equation Bjp Congress SP News in Hindi
punjab lok sabha election - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वैसे तो जालंधर खेल के सामान के लिए देशभर में मशहूर है, लेकिन इस लोकसभा चुनाव में राजनीति के माहिर खिलाड़ियों का पाला-बदल खेल यहां ज्यादा चर्चा में है। इसी की बदौलत प्रतिद्वंद्वी दलों ने एक दूसरे के सामने चुनौती पेश कर सियासी गुणा-भाग को उलझा दिया है। 
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दावे भले हों, पर किसी को अपनी जीत पक्की नहीं लग रही। यही वजह है कि कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल के दिग्गज नेताओं से लेकर पीएम नरेंद्र मोदी तक को जालंधर के मैदान में उतरना पड़ा है। सभी दलों के थिंक टैंक महीनों से यहां डेरा डाले हैं। भाजपा ने तो गुजरात के माहिरों की पूरी टीम यहां उतार दी है।
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यहां चारों दलों की प्रतिष्ठा दांव पर है। दरअसल, वर्ष 1999 से 2019 तक यह सीट कांग्रेस के पास रही है। वर्ष 2014 और 2019 के विजेता कांग्रेसी सांसद संतोख चौधरी के निधन के बाद वर्ष 2023 में उप चुनाव हुए तो आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस नेता सुशील रिंकू को अपने पाले में कर कांग्रेस के खिलाफ ही खड़ा कर दिया। 
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आप का यह दांव सही पड़ा। रिंकू ने संतोख चौधरी की पत्नी करमजीत कौर को हराकर कांग्रेसी किला ध्वस्त कर दिया। 2024 के चुनाव में भी आप ने रिंकू पर भरोसा जताया और टिकट की घोषणा कर दी। इसी बीच भाजपा ने उन्हें तोड़कर अपना प्रत्याशी बना दिया। 

आप के लिए यह बड़ा झटका था। संभलने के लिए उसने शिअद के दो बार के विधायक पवन टीनू को तोड़कर मैदान में उतार दिया। टीनू के जाने से अकाली दल का गणित उलझ गया। उसने कांग्रेस को झटका देकर जालंधर से दो बार के सांसद और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे कद्दावर नेता मोहिंदर सिंह केपी को टिकट दे दिया है। 

 

इस तरह से यह संभवत: देश की इकलौती ऐसी सीट होगी, जहां तीन बड़े सियासी दलों के प्रत्याशी ऐन मौके पर निष्ठा बदलकर दूसरे दल के टिकट पर मैदान में उतरे हैं। इधर, जालंधर में 20 साल से चली आ रही बादशाहत को बरकरार रखने और गढ़ में वापसी के लिए कांग्रेस ने पंजाब के सीएम रहे चरणजीत सिंह चन्नी पर दांव खेला है। 

 

चन्नी यहां के सभी प्रत्याशियों में सबसे बड़ा चेहरा हैं। पंचकोणीय मुकाबले में उनकी और पार्टी दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर है। बसपा से उनके मिशनरी नेता बलविंदर कुमार मैदान में हैं। बलविंदर ने 2019 में दो लाख से अधिक वोट हासिल कर सबको चौंका दिया था। ये समीकरण बता रहे हैं कि जालंधर में इस बार पंचकोणीय मुकाबले में कांटे की टक्कर होने वाली है।

यहां समधी आमने-सामने
फिरोजपुर में पिता-पुत्र आमने सामने हैं तो जालंधर में समधी। कांग्रेस छोड़कर शिअद से मोर्चा संभाले मोहिंदर सिंह केपी और कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व सीएम चरणजीत सिंह समधी हैं। कुछ समय पहले तक केपी, चन्नी के पक्ष में प्रचार कर रहे थे। अचानक वे कांग्रेस और चन्नी के विरोधी हो गए। 
  • चन्नी के भाई ने शिअद में शामिल होने से पहले केपी को मनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने एक न सुनी। केपी बीते छह दशक से कांग्रेस का दलित चेहरा रहे हैं। कांग्रेस के लिए ये भी कम बड़ा झटका नहीं है।

सैनिकों पर सियासत, किसान आंदोलन बनाम सिख विरोधी दंगे 
कांग्रेस प्रत्याशी चन्नी ने तीन जवानों के आतंकी हमले में शहीद होने की घटना को पुलवामा से जोड़ते हुए हाल ही में कहा कि चुनाव के समय ही ये हमले इसलिए होते हैं, ताकि इसे पाकिस्तान व मुसलमान से जोड़ा जा सके। इस पर पीएम मोदी ने पलटवार करते हुए कहा था कि सैनिकों को धोखा देने का इतिहास कांग्रेस का है। कांग्रेस किसान आंदोलन के नाम पर भी भाजपा को घेर रही है। जवाब में भाजपा सिख विरोधी दंगों का मुद्दा उठा रही व रैलियों में कह रही कि कांग्रेस ने ही सिखों पर अत्याचार कराए।

 

जुबानी जंग के आगे मुद्दे गायब
होशियारपुर रोड पर जंडू सिंघा कस्बे में खिलौना दुकानदार हरजोत कहते हैं, मुद्दे गायब हैं। बस जुबानी जंग चल रही है। नेता एक दूसरे को नीचा दिखा रहे हैं। जालंधर दुर्दशा का शिकार है। सड़कों से कूड़ा नहीं उठता। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर बैठे बुजुर्ग कीरत ने बताया, बेटे को लेकर अस्पताल आए हैं। रात में उसने नशे की डोज ज्यादा ले ली है।

बीते पांच साल से उसका इलाज करा रहे हैं। कहते हैं, नशे के सबसे बड़े सौदागर तो नेताओं के गुर्गे हैं। किसी को वोट नहीं देना। फुटबाल चौक पर छोले-कुल्चे लगाए राजहंस बोले- देशभर से यहां खेल का सामान खरीदने आने वाले लोग सड़कों की दुर्दशा का रोना रोते हैं। 
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