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डाक्टरों में फैले भ्रष्टाचार ने खत्म किए सरकारी अस्पताल : ज्याणी
अमर उजाला, जालंधर
Updated Fri, 20 Dec 2013 11:04 PM IST
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सेहत मंत्री सुरजीत ज्याणी ने देर शाम जालंधर के सिविल अस्पताल में दबिश दी। अस्पताल का दौरा करने के बाद अमर उजाला से ज्याणी ने दो टुक में कहा कि इस अस्पताल में कुछ भी ठीक नहीं है।
सरकार की तरफ से दवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद मरीजों को बाहर से दवाएं लिखी जा रही हैं। सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है, अस्पताल की बिल्डिंग खस्ता है, नर्सों का मरीजों के प्रति रवैया ठीक नहीं है, एंबुलेंस को बिना दवाओं व स्टाफ के सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है।
उन्होंने साफ कहा कि डाक्टर अपने लाभ के लिए मरीजों को बाहर से दवाएं लिख रहे हैं। डाक्टरों की इस थोड़ी सी कमीशन के कारण ही मध्य वर्ग सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए नहीं पहुंच रहा है। यह सरकार के लिए चिंता की बात है। मौजूदा समय के दौरान डाक्टरों में फैले भ्रष्टाचार से सरकारी अस्पताल खत्म हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरे के दौरान उन्होंने जो जालंधर अस्पताल का हाल देखा है, उस मुताबिक वे संतुष्ट नहीं हैं।
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अस्पताल प्रबंधन को एक माह का समय दिया गया है, 20 जनवरी को वे फिर अस्पताल आएंगे। इस दौरान अगर कोई खामी मिलती है तो उसका सख्त एक्शन लिया जाएगा। जालंधर आने से पहले ज्याणी ने पठानकोट तथा मुकेरियां के अस्पतालों का भी दौरा किया। वे जालंधर अस्पताल में सायंकाल 5.34 पर पहुंचे और 7 बजे तक अस्पताल ही रहे। जहां अस्पताल का विजिट करने के बाद मंत्री ने डाक्टरों से भी एक मीटिंग की।
दवा चेक करने के लिए साथ लेकर आए डाक्टर
सेहत मंत्री ने इस दौरान लगभग प्रत्येक वार्ड का दौरा किया। वार्ड में जाकर मरीजों से बातचीत की व उनकी परेशानियों को सुना। मरीजों को बाहर से लिखी जाने वाली दवाओं को लेकर उन्होंने सिविल सर्जन आरएल बसन तथा एमएस जेएस चीमा को फटकार लगाई।
ज्याणी मरीजों की दवा को चेक करने के लिए अपने साथ अपने विधानसभा क्षेत्र से दो डाक्टर की टीम साथ लेकर आए थे। उन डाक्टर ने मरीजों की दवाएं चेक की ओर मंत्री को बताया कि ये दवाएं बाहर से लिखी गई हैं।
महिला ने मंत्री से मांगे छब्बीस सौ रुपये
महिला वार्ड में दाखिल एक मरीज गुरमेज कौर ने मंत्री से 2600 रुपये की मांग की। महिला ने कहा कि डाक्टर ने उन्हें एक इंजेक्शन लाने के लिए लिखा है। उसके पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह 2600 रुपये का इंजेक्शन ला सके। इस दौरान ज्याणी के साथ आए डाक्टर सुबोध ने स्लिप चेक की और मरीज को बताया कि वैसे तो डिलीवरी के लिए घर से अस्पताल लेकर आने व जाने का खर्च सहित पूरा खर्च सरकार देती है।
बावजूद इसके यह इंजेक्शन मरीज को ही लाना पड़ता है। इस इंजेक्शन की जरूरत उस समय पड़ती है जब बच्चे व जच्चा के खून का आरएच फैक्टर अलग होता है। अगर यह इंजेक्शन न लगाया जाए तो दूसरे बच्चे में बच्चे को खतरा हो सकता है।
बेड शीट न मिलने पर लगाई फटकार
मंत्री ने मरीजों को बेड शीट न मिलने पर फटकार लगाई है। ज्याणी ने कहा कि अगर अस्पताल को एक बेड के मुताबिक चार बेड शीट मिलती हैं तो मरीजो को यह क्यों नहीं दी जाती।
अधिक अटेंडेंट होने पर भी मंत्री खफा
मंत्री ने कहा कि मरीजों के साथ अधिक रिश्तेदारों का आना इलाज में रुकावट बनता है। गंदगी फैलती है। उन्होंने इस पर रोक लगाने के लिए एमएस को ठेके पर सिक्योरिटी गार्ड रखने की हिदायत दी।
सिल्लन देखकर डायरेक्टर को किया फोन
सर्जिकल वार्ड में पानी रिसने के कारण दीवारों का बुरा हाल हो चुका था। सर्दी के इस मौसम में खिड़कियों के शीशे टूट देख ज्याणी को गुस्सा आ गया। पहले तो उन्होंने एमएस से इसका जवाब मांगा लेकिन जवाब न मिलने के बाद तुरंत हेल्थ डायरेक्टर को फोन कर दिया। उन्होंने डायरेक्टर व एसई पब्लिक हेल्थ को शनिवार जालंधर अस्पताल विजिट करने के लिए कहा। हालांकि इस दौरान टीम को सोमवार तक का मौका देते हुए रिपोर्ट उन्हें देने के लिए कहा है।
दो रुपये की दवा मिल रही बीस में
मंत्री ने जब बर्न वार्ड का दौरा किया तो वहां मरीज को सिटरीजन का पत्ता भी बाहर से मंगवाया गया था। यह देखते ही मंत्री ने सिविल सर्जन को कहा क्या यह हाल है अपनी निगरानी का? उन्होंने कहा कि जो दवा मरीज को अस्पताल में नि:शुल्क मिलती है और जिसकी कीमत महज 2 रुपये है, वह मरीज को बाहर से 20 रुपये में मंगवाई जा रही है। ऐसे ही बच्चा वार्ड में एक मरीज तरनजोत के पिता परमजीत सिंह ने बताया कि जब भी डाक्टर राउंड पर आते हैं तो अपनी ही दवा लिख देते हैं। ऐसे में जब मंत्री के साथ आए डाक्टर ने दवाएं चेक की तो आरोप सही पाए गए। डाक्टर ने मंत्री को बताया कि बच्चों को जो टॉनिक लिखी गई है, वह जनरल कंपनी की है। जो मार्केट में 15 रुपये की है, लेकिन मरीज के मुताबिक यह दवा उन्हें 80 रुपये में मिली है।
छह मिनट में अस्पताल पहुंची एंबुलेंस
ज्याणी ने सिविल सर्जन को फोन करके एंबुलेंस मंगवाने के लिए कहा। एंबुलेंस के पहुंचने के लिए कितना समय लगता है इसके लिए एक अधिकारी की ड्यूटी भी लगाई गई। एंबुलेंस छह मिनट में अस्पताल पहुंची। मंत्री ने पहले तो ड्राइवर की पीठ थपथपाई और उसके बाद एंबुलेंस में दवाओं के बारे में पूछा। ड्राइवर ने बताया कि न तो उसके पास दवाएं हैं और न ही साथ में कोई अटेंडेंट होता है। इस पर भी अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगी।
330 डाक्टरों की हो रही है भर्ती : ज्याणी
सेहत मंत्री ने पत्रकारों के साथ बातचीत में बताया कि स्वास्थ्य विभाग में आगामी पांच माह के दौरान 532 डाक्टरों की भर्ती हो रही है। इसमें से 330 एमबीबीएस डाक्टरों की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। 202 पदों को भरने के लिए भी सरकार ने मंजूरी दे दी है। पत्रकारों के सवाल के जवाब में ज्याणी ने माना कि सरकारी अस्पतालों को स्पेशलिस्ट नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर जो स्टाफ तैनात है वही अपनी ड्यूटी ईमानदारी के साथ दे तो सरकारी इलाज पर लोगों का विश्वास बन जाएगा। इस दौरान उनके साथ सिविल सर्जन डा. आरएल बसन, एमएस जेएस चीमा तथा अन्य डाक्टर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि उनका यह विजिट नींद में डाक्टरों को जगाने के लिए था। इसके बाद सख्त एक्शन होगा।
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सरकार की तरफ से दवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद मरीजों को बाहर से दवाएं लिखी जा रही हैं। सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है, अस्पताल की बिल्डिंग खस्ता है, नर्सों का मरीजों के प्रति रवैया ठीक नहीं है, एंबुलेंस को बिना दवाओं व स्टाफ के सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है।
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उन्होंने साफ कहा कि डाक्टर अपने लाभ के लिए मरीजों को बाहर से दवाएं लिख रहे हैं। डाक्टरों की इस थोड़ी सी कमीशन के कारण ही मध्य वर्ग सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए नहीं पहुंच रहा है। यह सरकार के लिए चिंता की बात है। मौजूदा समय के दौरान डाक्टरों में फैले भ्रष्टाचार से सरकारी अस्पताल खत्म हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरे के दौरान उन्होंने जो जालंधर अस्पताल का हाल देखा है, उस मुताबिक वे संतुष्ट नहीं हैं।
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अस्पताल प्रबंधन को एक माह का समय दिया गया है, 20 जनवरी को वे फिर अस्पताल आएंगे। इस दौरान अगर कोई खामी मिलती है तो उसका सख्त एक्शन लिया जाएगा। जालंधर आने से पहले ज्याणी ने पठानकोट तथा मुकेरियां के अस्पतालों का भी दौरा किया। वे जालंधर अस्पताल में सायंकाल 5.34 पर पहुंचे और 7 बजे तक अस्पताल ही रहे। जहां अस्पताल का विजिट करने के बाद मंत्री ने डाक्टरों से भी एक मीटिंग की।
दवा चेक करने के लिए साथ लेकर आए डाक्टर
सेहत मंत्री ने इस दौरान लगभग प्रत्येक वार्ड का दौरा किया। वार्ड में जाकर मरीजों से बातचीत की व उनकी परेशानियों को सुना। मरीजों को बाहर से लिखी जाने वाली दवाओं को लेकर उन्होंने सिविल सर्जन आरएल बसन तथा एमएस जेएस चीमा को फटकार लगाई।
ज्याणी मरीजों की दवा को चेक करने के लिए अपने साथ अपने विधानसभा क्षेत्र से दो डाक्टर की टीम साथ लेकर आए थे। उन डाक्टर ने मरीजों की दवाएं चेक की ओर मंत्री को बताया कि ये दवाएं बाहर से लिखी गई हैं।
महिला ने मंत्री से मांगे छब्बीस सौ रुपये
महिला वार्ड में दाखिल एक मरीज गुरमेज कौर ने मंत्री से 2600 रुपये की मांग की। महिला ने कहा कि डाक्टर ने उन्हें एक इंजेक्शन लाने के लिए लिखा है। उसके पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह 2600 रुपये का इंजेक्शन ला सके। इस दौरान ज्याणी के साथ आए डाक्टर सुबोध ने स्लिप चेक की और मरीज को बताया कि वैसे तो डिलीवरी के लिए घर से अस्पताल लेकर आने व जाने का खर्च सहित पूरा खर्च सरकार देती है।
बावजूद इसके यह इंजेक्शन मरीज को ही लाना पड़ता है। इस इंजेक्शन की जरूरत उस समय पड़ती है जब बच्चे व जच्चा के खून का आरएच फैक्टर अलग होता है। अगर यह इंजेक्शन न लगाया जाए तो दूसरे बच्चे में बच्चे को खतरा हो सकता है।
बेड शीट न मिलने पर लगाई फटकार
मंत्री ने मरीजों को बेड शीट न मिलने पर फटकार लगाई है। ज्याणी ने कहा कि अगर अस्पताल को एक बेड के मुताबिक चार बेड शीट मिलती हैं तो मरीजो को यह क्यों नहीं दी जाती।
अधिक अटेंडेंट होने पर भी मंत्री खफा
मंत्री ने कहा कि मरीजों के साथ अधिक रिश्तेदारों का आना इलाज में रुकावट बनता है। गंदगी फैलती है। उन्होंने इस पर रोक लगाने के लिए एमएस को ठेके पर सिक्योरिटी गार्ड रखने की हिदायत दी।
सिल्लन देखकर डायरेक्टर को किया फोन
सर्जिकल वार्ड में पानी रिसने के कारण दीवारों का बुरा हाल हो चुका था। सर्दी के इस मौसम में खिड़कियों के शीशे टूट देख ज्याणी को गुस्सा आ गया। पहले तो उन्होंने एमएस से इसका जवाब मांगा लेकिन जवाब न मिलने के बाद तुरंत हेल्थ डायरेक्टर को फोन कर दिया। उन्होंने डायरेक्टर व एसई पब्लिक हेल्थ को शनिवार जालंधर अस्पताल विजिट करने के लिए कहा। हालांकि इस दौरान टीम को सोमवार तक का मौका देते हुए रिपोर्ट उन्हें देने के लिए कहा है।
दो रुपये की दवा मिल रही बीस में
मंत्री ने जब बर्न वार्ड का दौरा किया तो वहां मरीज को सिटरीजन का पत्ता भी बाहर से मंगवाया गया था। यह देखते ही मंत्री ने सिविल सर्जन को कहा क्या यह हाल है अपनी निगरानी का? उन्होंने कहा कि जो दवा मरीज को अस्पताल में नि:शुल्क मिलती है और जिसकी कीमत महज 2 रुपये है, वह मरीज को बाहर से 20 रुपये में मंगवाई जा रही है। ऐसे ही बच्चा वार्ड में एक मरीज तरनजोत के पिता परमजीत सिंह ने बताया कि जब भी डाक्टर राउंड पर आते हैं तो अपनी ही दवा लिख देते हैं। ऐसे में जब मंत्री के साथ आए डाक्टर ने दवाएं चेक की तो आरोप सही पाए गए। डाक्टर ने मंत्री को बताया कि बच्चों को जो टॉनिक लिखी गई है, वह जनरल कंपनी की है। जो मार्केट में 15 रुपये की है, लेकिन मरीज के मुताबिक यह दवा उन्हें 80 रुपये में मिली है।
छह मिनट में अस्पताल पहुंची एंबुलेंस
ज्याणी ने सिविल सर्जन को फोन करके एंबुलेंस मंगवाने के लिए कहा। एंबुलेंस के पहुंचने के लिए कितना समय लगता है इसके लिए एक अधिकारी की ड्यूटी भी लगाई गई। एंबुलेंस छह मिनट में अस्पताल पहुंची। मंत्री ने पहले तो ड्राइवर की पीठ थपथपाई और उसके बाद एंबुलेंस में दवाओं के बारे में पूछा। ड्राइवर ने बताया कि न तो उसके पास दवाएं हैं और न ही साथ में कोई अटेंडेंट होता है। इस पर भी अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगी।
330 डाक्टरों की हो रही है भर्ती : ज्याणी
सेहत मंत्री ने पत्रकारों के साथ बातचीत में बताया कि स्वास्थ्य विभाग में आगामी पांच माह के दौरान 532 डाक्टरों की भर्ती हो रही है। इसमें से 330 एमबीबीएस डाक्टरों की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। 202 पदों को भरने के लिए भी सरकार ने मंजूरी दे दी है। पत्रकारों के सवाल के जवाब में ज्याणी ने माना कि सरकारी अस्पतालों को स्पेशलिस्ट नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर जो स्टाफ तैनात है वही अपनी ड्यूटी ईमानदारी के साथ दे तो सरकारी इलाज पर लोगों का विश्वास बन जाएगा। इस दौरान उनके साथ सिविल सर्जन डा. आरएल बसन, एमएस जेएस चीमा तथा अन्य डाक्टर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि उनका यह विजिट नींद में डाक्टरों को जगाने के लिए था। इसके बाद सख्त एक्शन होगा।