पंजाब विधानसभा चुनाव: एनआरआई ने प्रचार से फेरा मुंह, किसी नेता ने भी नहीं किया विदेश का दौरा
पंजाब के चुनावों में एनआरआई की अहम भूमिका को देखते हुए सारे नेताओं में विदेशी टूर का क्रेज होता था। कैप्टन अमरिंदर सिंह, राणा गुरजीत सिंह, केवल सिंह ढिल्लो आदि की टीम विदेशों में पहुंच जाती थी। वहां पर न केवल प्रचार किया जाता था बल्कि फंड भी एकत्रित किया जाता था।
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पंजाब में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और पार्टियों की तरफ से उम्मीदवारों की घोषणा की जा रही है लेकिन इस बार माहौल बदला हुआ है। पंजाब के चुनावों में अहम भूमिका अदा करने वाले एनआरआई इस बार चुनावों से दूर हैं। एनआरआई जहां विशेष तौर पर पंजाब में प्रचार के लिए आते थे लेकिन इस बार उनकी संख्या ना के बराबर है। पंजाब की राजनीतिक पार्टियों के लिए दिसंबर माह में विदेशी टूर पर जाकर पार्टी का प्रचार व फंड एकत्रित करते थे, वह भी सिस्टम नहीं है। तमाम पार्टियों के एनआरआई विंग बिल्कुल ठंडे हो चुके हैं। पंजाब का दोआबा एनआरआई का गढ़ है और उनका 34 सीटों पर खासा प्रभाव है।
दिल्ली की तर्ज पर ही आम आदमी पार्टी ने 2017 में पंजाब में एनआरआई समर्थकों को पंजाब में आकर चुनावों में प्रचार की कमान संभालने को कहा था। आप ने अलग-अलग देशों जैसे कनाडा, अमेरिका, लंदन और आस्ट्रेलिया में बसे अपने करीब 30 हजार से ज्यादा समर्थकों को वोट जुटाने के लिए प्रेरित किया और पूरे जहाज बुक होकर एनआरआई पंजाब की धरती पर पहुंचे थे और प्रचार में जोर लगाया था। हालात यह थे कि जनवरी माह में टोरंटो दिल्ली के कई डायरेक्ट फ्लाइट्स उन एनआरआई की पंजाब आई थी, जिन्होंने प्रचार करना था। पिछले चुनावों में 24 जनवरी को भी लंदन से एक विशेष फ्लाइट अमृतर एयरपोर्ट पर एनआरआई की बुक होकर आई थी, जिन्होंने डटकर चुनावों में प्रचार किया था।
विदेशी टूर से दूर हुए राजनीतिक दल
पंजाब के चुनावों में एनआरआई की अहम भूमिका को देखते हुए सारे नेताओं में विदेशी टूर का क्रेज होता था। कैप्टन अमरिंदर सिंह, राणा गुरजीत सिंह, केवल सिंह ढिल्लो आदि की टीम विदेशों में पहुंच जाती थी। वहां पर न केवल प्रचार किया जाता था बल्कि फंड भी एकत्रित किया जाता था। सुखबीर बादल भी एनआरआई सुरजीत सिंह रखड़ा को आगे रखकर विदेशों में अपना टूर तैयार करते थे। पिछली बार तो अरविंद केजरीवाल ने भी पंजाब चुनावों के लिए विदेश का टूर लगाया था। कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी टीम के साथ अमेरिका गए और वहां पर प्रचार किया था। इसके बाद पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री परनीत कौर के अलावा पंजाब कांग्रेस प्रभारी आशा कुमारी भी विदेश गई और वहां पर जाकर प्रचार किया।
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी 2016 में छह सितंबर को रोम की यात्रा पर गए। वहीं शिअद के मंत्री तोता सिंह, सुरजीत सिंह रखड़ा ने भी विदेशों में जाकर एनआरआई पर खूब डोरे डाले और उनको शिअद की मुहिम शुरू करने के लिए प्रेरित किया। लेकिन इस बार कोई भी नेता विदेशी टूर नहीं कर रहा है। वहीं एनआरआई इस बार पंजाब की किसी राजनीतिक पार्टी को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहे हैं।
एनआरआई के लिए कुछ नहीं हुआ
कनाडा की राजधानी ओटावा के नामवर जसविंदर सिंह जस्सा का कहना है कि एनआरआई का पंजाब के चुनावों से मोह भंग हो चुका है। पहले कनाडा से लेकर अमेरिका तक माहौल गर्मा जाता था। चुनाव पंजाब में होते थे लेकिन पार्टियों का दौर कनाडा में चलता था। एनआरआईज के लिए किसी सरकार ने कुछ नहीं किया है। आज भी एनआरआई अदालती केसों में उलझे हुए हैं।
बेअदबी, ड्रग, बेरोजगारी से उचट गया मन
अमेरिका में परिवार सहित शिफ्ट हुई मंजीत कौर संघा का कहना है कि पंजाब अपनी धरती है। प्यार व दिल पंजाब से लगाव रखता है। पिछले चुनावों में वह पंजाब आई थी लेकिन इस बार नहीं आना है। पंजाब में अब पुराना राजनीतिक माहौल नहीं रहा है। बेअदबी, ड्रग व बेरोजगारी की घटनाओं से दिल दुखी होता है पर कोई सुधार करता ही नहीं है।